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आजसू के प्रयासों से ही पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता खुला था : संजय मेहता

संजय मेहता ने कहा कि हेमंत सरकार ट्रिपल टेस्ट के बिना ही पंचायत और नगर निकाय चुनाव करवाना चाहती थी, ताकि ओबीसी को आरक्षण नहीं देना पड़े. इस पर आजसू सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी सुप्रीम कोर्ट गये.
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  • आजसू पार्टी ने दायर की थी सुप्रीम कोर्ट में रिट
  • नगर निकाय चुनाव में आजसू ने ही दिलाया ओबीसी को आरक्षण
  • चन्द्रप्रकाश चौधरी पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट

Ranchi :  झारखंड में ओबीसी आरक्षण का विषय एक बार फिर सुर्खियों में है. आजसू के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता संजय मेहता ने जानकारी दी कि पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो के प्रयास से पंचायत चुनाव में बड़े स्तर पर ओबीसी को आरक्षण मिला था.

 


उन्होंने बतौर पंचायती राज मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में दस हज़ार पदों पर (पंचायत चुनाव) ओबीसी को आरक्षण दिया था. आरोप लगाया कि हेमंत सरकार ने पंचायत चुनाव में 10 हजार पदों पर ओबीसी के आरक्षण को 2022 में साजिश के तहत समाप्त कर दिया   ओबीसी के सभी पद 2022 के पंचायत चुनाव में हेमंत सरकार ने सामान्य कर दिया था. 

 


ओबीसी के हक के लिए आजसू पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट : संजय मेहता ने कहा कि हेमन्त सरकार के इस ओबीसी विरोधी फ़ैसले के ख़िलाफ़ 2022 में आजसू पार्टी सुप्रीम कर्ट चली गयी थी. रिट संख्या 239/2022 के माध्यम से पार्टी के सांसद चन्द्र प्रकाश चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस रिट के फैसले के आधार पर    हाल में सम्पन्न हुए नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण मिला था.

 


संजय मेहता ने कहा कि 2027 के पंचायत चुनाव में सरकार को ओबीसी को आरक्षण देना ही होगा. ऐसा नहीं करने पर सरकार को अदालत की अवमानना की याचिका का सामना करना पड़ेगा.

 


सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए 2022 में कहा था कि वर्तमान में चल रहे पंचायत चुनाव के अलावा भविष्य में जो भी पंचायत या नगर निकाय चुनाव झारखंड सरकार करवाएगी उसमें ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी को आरक्षण देना अनिवार्य होगा.

 


ऐसे में झारखंड सरकार के लिए यह विधिक बाध्यता बन गयी  और सरकार को नगर निकाय में ओबीसी को आरक्षण देना पड़ा. अब सरकार को आगामी पंचायत चुनाव में भी इसका पालन करना होगा. 

 


संजय मेहता ने कहा कि हेमंत सरकार ट्रिपल टेस्ट के बिना ही पंचायत और नगर निकाय चुनाव करवाना चाहती थी, ताकि ओबीसी को आरक्षण नहीं देना पड़े. इस पर आजसू सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी सुप्रीम कोर्ट गये.

 


कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निकाय चुनाव से पूर्व सरकार ने ओबीसी के लिए ट्रिपल टेस्ट करवाया. हालांकि इसमें भी देरी के लिए ओबीसी आयोग के अध्यक्ष का पद लंबे समय तक खाली रखा गया था. आजसू लगातार इस गतिविधि पर नजर बनाये हुए थी जिसके बाद ओबीसी को आरक्षण देने के लिए सरकार को मजबूर होना पड़ा. 

 


संजय मेहता ने कहा कि आजसू पार्टी ओबीसी को अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. जेएमएम द्वारा लगातार ओबीसी के अधिकारों को कुचलने की साज़िश और कोशिश हुई. हम ओबीसी के अधिकारों को कुचलने नहीं देंगे.

 


सड़क, सदन से न्यायालय तक हमने इसकी लड़ाई लड़ी है. आज झारखंड में कई ओबीसी के मेयर, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, डिप्टी मेयर, पार्षद बने हैं. यह सिर्फ आजसू के प्रयासों से संभव हुआ है. यदि आजसू न्यायालय जाकर नहीं लड़ती तो आज नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण नहीं मिला होता. हम पंचायत चुनाव में भी ओबीसी को आरक्षण दिला कर रहेंगे.

 

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