Ranchi : कुलपति की जिद की वजह से नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के 1473 छात्र एडमिशन के बावजूद परीक्षा देने से वंचित रहे. राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के हस्तक्षेप के बाद चांसलर पोर्टल खोल कर इन छात्रों का एडमिशन लिया गया था.
लेकिन इनका रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया, जिसकी वजह से सभी छात्र परीक्षा नहीं दे पाए.
रजिस्ट्रेशन ना होने पर परीक्षा नहीं दे पाएं छात्र
उल्लेखनीय है कि नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के अधीन कुछ कॉलेजों में ऑफलाइन एडमिशन लेने वाले छात्रों का एडमिशन चांसलर पोर्टल से कराने के मुद्दे पर विवाद था.
विश्वविद्यालय द्वारा कुछ कॉलेजों के लिए चांसलर पोर्टल खोलकर एडमिशन लेने और कुछ के साथ भेदभाव करने का आरोप लगा. राज्य के वित्त मंत्री ने समस्या के समाधान के लिए राज्यपाल से मुलाकात की.
इसके बाद 2025-29 शैक्षणिक सत्र में एडमिशन के लिए चांसलर पोर्टल खोला गया. 25-27 फरवरी तक चांसलर पोर्टल खुलने के बाद कुल 1473 छात्रों का एडमिशन हुआ.
इसमें संत तुलसी दास कॉलेज के 287, सिद्धेश्वर सहाय मधेश्वर कॉलेज के 185, एके सिंह कॉलेज के 491, गोपी नाथ सिंह महिला कॉलेज के 174 छात्र और शेष छात्र दूसरे कॉलेज के हैं.
विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह ने इन छात्रों का एडमिशन लेने के बाद उनका रजिस्ट्रेशन नहीं किया. इसके लिए UGC के दिशा निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि नामांकन के 90 दिनों बाद रजिस्ट्रेशन का नियम है.
यह अवधि पूरी नहीं हुई है, इसलिए इन छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ. इससे 1473 छात्र नौ मार्च से हो रही परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गये. कुलपति की इस जिद की वजह से चंसलर पोर्टल खोलकर एडमिशन लेने के बावजूद छात्रों का एक साल बर्बाद होने का खतरा है.
वीसी पर लगा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप
इस बीच विश्वविद्यालय के कुलपति पर खुद ही नियमों का उल्लंघन करना का आरोप लगाया जा रहा है. इसमें यह कहा जा रहा है कि उच्च शिक्षा विभाग ने NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम में संशोधन की अधिसूचना चार दिसंबर 2024 को जारी कर दी थी.
लेकिन नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में 2025-29 शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यक्रम में संशोधन के लिए जनवरी 2026 में आदेश जारी किया.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें
Leave a Comment