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गंदा है जमीन का गोरखधंधा

  • अधिकारियों की चुप्पी की वजह से भू-माफिया बेखौफ
  • लगे हैं सरकारी जमीन कब्जाने में
Ranchi: हर आदमी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. इसके लिए वह जीवनभर मेहनत करता है. जब पैसा जमा हो जाता है तब जमीन या घर की तलाश में बाहर निकलता है. उसकी तलाश पूरी होती है जमीन दलालों या बिल्डरों के पास. जहां उसे जमीन दिखायी जाती है. उसे अपार्टमेंट दिखाए जाते हैं. वह पैसे देकर निश्चिंत हो जाता है. लेकिन जब जमीन या घर लेने का समय आता है तब उसे पता चलता है कि यह जमीन ही अवैध है. यहां न तो घर बन सकता है और न ही अपार्टमेंट. और तब यह मामला कोर्ट पहुंच जाता है. तब लोगों को हकीकत पता चलता है, लेकिन तब तक देर हो जाती है. आज ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां लोग अपनी जीवनभर की पूंजी गंवाकर दलालों के चक्कर काट रहे हैं. यह सब नियमों की कमजोरी और अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से हो रहा है. शहर के अंदर या बाहरी क्षेत्र में कई जगहों पर तालाब और नदी के पास रातोंरात दीवार खड़े किये जा रहे हैं. इसके अलावा गैरमजरुआ यानी जीएम लैंड या निजि जमीन पर कब्जे कर अवैध निर्माण किये जा रहे हैं. यह सब सरकार की नाक के नीचे हो रहा है. जबकि इसे रोकने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों पर होती है. लेकिन वे खामोश हैं. वास्तविकता को जानने शुभम संदेश की टीम लोगों के बीच पहुंची और तैयार की जमीन के इस गोरखधंधे की. धनबाद : रैयतों की आस पर पानी फेर रही सूर्या होप सिटी जोरिया को डायवर्ट कर निकाल ली 30 एकड़ जमीन, बना लिया भवन धनबाद जिले में सरकारी और रैयतों की जमीन को घेर कर बिल्डर का कब्ज़ा कर रहे हैं. ताजा मामला सरायढेला थाना क्षेत्र के बलियापुर-हीरक रोड स्थित सूर्या होप सिटी का है, जो 30 एकड़ भूमि में फैला हुआ है. नाम न छापने की शर्त पर रैयतों ने बताया कि जिस जगह पर सूर्या होप सिटी बनाया गया है, वहां एक जोरिया था. इस जोरिया को अवैध रूप से घेरकर जमीन निकाल ली गई और पूरा पानी डायवर्ट कर रैयत की जमीन पर बहा दिया जा रहा है. इधर कंपनी के वेबसाइट पर फ्लैट बुक कराने वालों की पीड़ा ही अलग है. भुक्तभोगी रूबी मंडल कह रही हैं कि विगत 6 साल से तारीख पर तारीख दे रहे हैं. पूरी रकम लेने के बाद, उन्हें अपने ग्राहकों की समस्याओं की परवाह नहीं है. पिछले 2 वर्षों से उनसे अनुरोध कर रही हूं कि माता-पिता को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, उन्हें अपने पास रखना चाहती हूं, कृपया मुझे मेरा घर दे दें. लेकिन कंपनी इतनी असभ्य है कि कोई परवाह नहीं करती. वे अपने ग्राहकों को परेशान कर रहे हैं. 7 साल बाद भी फ्लैट ग्राहकों को हैंडओवर नहीं सुदेशना घोषाल ने कहा है कि सूर्या होप सिटी में फ्लैट बुक किए 7 साल (2016) हो चुके हैं, अब तक फ्लैट हैंडओवर नहीं किया गया है. यह बहुत ही घिनौना है. यहां तक कि वे कभी भी एक संवाद तक नहीं करते हैं. सारे पैसे ले लिए. यह एक फ्रॉड कंपनी है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. इस संबंध में सूर्य होप सिटी के पीआरओ शरद पांडे ने बताया कि ऐसा कोई मामला हमारे संज्ञान में नही है. उस जगह पर अभी किसी प्रकार का काम नहीं किया जा रहा है. झारखंड सरकार की जमीन पर लगाया गया था भूमि चिह्नितकरण का बोर्ड बागबेड़ा थाना के हरहरगुटू के सोमाय झोपड़ी में भू-माफियाओं की दबंगई इस कदर हावी है कि सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने के लिए सरकार की ओर से लगाए गए भूमि चिन्हितीकरण का बोर्ड उखाड़कर गायब कर दिया. भूमि चिन्हितीकरण बोर्ड नहीं रहने से अतिक्रमण में आसानी हुई. जेसीबी लगाकर जमीन समतल कर दिया गया. उक्त सरकारी भू-खंड के बगल में एक निजी तालाब था. उसकी आड़ में अतिक्रमणकारियों ने सरकारी जमीन का अधिकांश हिस्सा कब्जा कर लिया. हालांकि इसकी जानकारी तत्कालीन मुखिया सुषमा जोड़ा को होने के बाद उन्होंने वहां दूसरा बोर्ड लगवाया. लेकिन नए बोर्ड में उन्होंने भूमि की चौहदी एवं रकबा दर्ज नहीं किया. जमशेदपुर अंचल कार्यालय ने लगाया था बोर्ड हरहरगुटू के सोमाय झोपड़ी में सरकारी भूखंड अतिक्रमण किए जाने की जानकारी मिलने के बाद वर्ष 2020 में जमशेदपुर अंचल कार्यालय ने तत्कालीन डीसी के निर्देश पर सरकारी भूमि चिन्हित करने का बोर्ड लगाया था. इसमें मौजा घाघीडीह, खाता संख्या 1075, प्लॉट संख्या 2099 तथा 2096 को सरकारी भू-खंड बताया गया. साथ ही इसका अतिक्रमण करने अथवा खरीद-बिक्री को वर्जित किया गया. लेकिन जमीन अतिक्रमणकारियों ने उक्त सरकारी बोर्ड को वहां से उखाड़कर गायब कर दिया था. हालांकि वर्तमान में उक्त भूमि पर तत्कालीन मुखिया द्वारा लगाया गया बोर्ड मौजूद है. मुखिया ने प्लॉट संख्या 2099 पर सचिवालय निर्माण का प्रस्ताव भेजा जमशेदपुर अंचल कार्यालय की ओर से जिस भूखंड (खाता संख्या 1075, प्लॉट संख्या 2099) पर सरकारी जमीन चिन्हितीकरण का बोर्ड लगाया था, वह घाघीडीह मौजा के दक्षिणी घाघीडीह पंचायत में पड़ता है. पंचायत के वर्तमान मुखिया भरत जोड़ा ने उक्त भूखंड को अतिक्रमण से बचाने के लिए वहां पंचायत सचिवालय निर्माण का प्रस्ताव प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से जिला प्रशासन को भेज दिया गया है. भरत जोड़ा ने कहा कि उक्त जमीन पर अंचल कार्यालय की ओर से सरकारी जमीन का बोर्ड लगाया गया था, जिसे असामाजिक तत्वों ने उखाड़ दिया था. उनके द्वारा वहां दूसरा बोर्ड लगाया गया है, जो वर्तमान में मौजूद है. उसी जगह पर पंचायत भवन का निर्माण कराया जाना है. राजस्व कर्मचारी ने स्थल पर जाकर किया निरीक्षण सोमाय झोपड़ी में सरकारी भूखंड पर प्रस्तावित पंचायत सचिवालय निर्माण के लिए भूमि की जांच सोमवार को अंचल का राजस्व कर्मचारी काजल षाड़ंगी एवं अमीन ने की. जमीन की पूरी वस्तुस्थिति की रिपोर्ट राजस्व कर्मचारी द्वारा दिए जाने के बाद ही पंचायत सचिवालय निर्माण की कवायद आगे बढ़ेगी. दूसरी ओर राजस्व कर्मचारी के वहां आने से भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है. बताया जाता है कि मौके पर मौजूद अतिक्रमणकारी अपने संपर्क सूत्र के माध्यम से राजस्व कर्मचारी के आने की जानकारी प्राप्त करते रहे. चाईबासा : 20 वर्षों से दिव्यांग आदिवासी की जमीन पर गैर आदिवासियों का कब्जा चाईबासा शहर के इर्द-गिर्द सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर एसटी जमीन पर अवैध कब्जा तथा उसकी खरीद-बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है. शहर से सटे मतकमहातु, दुंबीसाई, तुईवीर, तांबो, गितिलपी, गुटूसाई, नीमडीह, टुंगरी, तांबो,पताहातु आदि गांवों में ऐसी शिकायतें आम हैं. बावजूद संबंधित विभाग उदासीन बना हुआ है. जहां इस पर कार्रवाई होनी चाहिए वहां मौन है. नतीजा, जमीन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं. वे बेखौफ जमीन की लूट-खसोट में लगे हुए हैं. इस पर किसा का ध्यान नहीं है. दिव्यांग मंगल सिंह देवगम की पुश्तैनी जमीन पर जमा लिया है कब्जा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के गुटूसाई-नीमडीह में एक 45 वर्षीय आदिवासी दिव्यांग मंगल सिंह देवगम की सीएनटी जमीन पर किरायेदार के रूप में रह रहे गैर आदिवासियों ने कब्जा जमा लिया है. मंगल सिंह देवगम ने इसकी लिखित शिकायत उपायुक्त से की है. उन्होंने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर जमीन से अवैध कब्जा हटाने की गुहार लगायी है. यह जमीन मेरे दादा के नाम पर खतियानी है गुटूसाई निवासी मंगल सिंह देवगम का कहना है कि यह जमीन मेरे दादा के नाम पर खतियान में दर्ज है और इस जमीन की मालगुजारी भी नियमित अदा करता हूं. यह समय पर करता रहा हूं. वह मूलरूप से दुंबीसाई का निवासी है. इस जमीन पर मेरे पिता का छोटा सा मकान था, जिसमें शंकर साव (पिता स्व जटलू साव) अपने परिवार के साथ किराये में रहता था. पिता की मृत्यु के बाद भी ऐसा ही चलता रहा. लेकिन बाद में मिट्टी की जगह पक्का मकान बनवाकर कब्जा कर लिया. कई बार कब्जा हटाने की मांग की लेकिन कब्जेदार ने नहीं माना. आज भी उसका कब्जा वैसे ही बरकरार है. एक वर्ष पूर्व ही उपायुक्त से की गई थी शिकायत दिव्यांग मंगल सिंह देवगम ने बताया कि इस अवैध कब्जे की शिकायत उसने एक वर्ष पहले 6 अप्रैल 2022 को भी उपायुक्त से की थी. प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. नतीजतन अवैध कब्जे का दायरा बढ़ता गया और अब पूरी जमीन पर कब्जा हो गया. इसकी शिकायत उपायुक्त के अलावा सीओ और एसडीओ से भी की गयी थी, लेकिन इसका भी नतीजा सिफर ही रहा. मंगल ने कहा कि मैं पैरों से दिव्यांग और अत्यंत गरीब हूं. इसलिये सरकारी दफ्तरों की दौड़ अब और मुश्किल हो गयी है. डीसी से आग्रह है कि इस मामले में कार्रवाई करें. कोल्हान समिति लड़ेगी मंगल की लड़ाई : विनोद मंगल सिंह देवगम की ओर से उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के बाद कोल्हान भूमि बचाओ समिति ने उनकी लड़ाई को आगे बढ़ाने की घोषणा की है. समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सावैयां तथा उपाध्यक्ष डीबर देवगम ने कहा कि मंगल की आगे की लड़ाई अब समिति लड़ेगी. इसके लिये जो भी विधि सम्मत होगा, वह किया जाएगा. जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी इसकी शिकायत की जायेगी. शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. इसलिए हमारी मांग है कि प्रशासन इस मामले में संज्ञान ले और उचित कार्रवाई कर मंगल की जमीन लौटाए. तभी मंगल को न्याय मिलेगा. क्या है शिकायत दिव्यांग मंगल सिंह देवगम ने लिखित शिकायत में कहा है कि मौजा-गुटूसाई में उनकी पुश्तैनी जमीन है. उसका खाता संख्या-45, प्लॉट संख्या-306, थाना नंबर-641 तथा रकवा 0.13 एकड़ है. यह जमीन खतियान में उनके दादा जुगी हो तथा डुबलिया हो, पिता-रोड़ो हो के नाम से दर्ज है. लेकिन इस जमीन पर सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर साव नाम के व्यक्ति ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन करते हुए अवैध ढंग से कब्जा कर लिया है. पहले इस जमीन पर मंगल सिंह देवगम के पिता द्वारा निर्मित मिट्टी के मकान में वह किरायेदार के रूप में रह रहे थे. फिर कालांतर में इसकी जगह पक्का मकान बनाकर जमीन पर कब्जा ही कर लिया. इससे हमारी परेशानी बढ़ गई. लिहाजा इस जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करते हुए उनकी लौटायी जाए, ताकि इसका इस्तेमाल कर सकें. चक्रधरपुर : तालाब पर भू माफियाओं की है नजर शहर के वार्ड संख्या आठ स्थित ग्वाला पट्टी तालाब पर भू-माफियाओं की नजर है. वर्षों पुरानी तालाब को अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमित कर कब्जा किया जा रहा है. तालाब के किनारे लगभग एक दर्जन से अधिक घर का निर्माण हो चुका है. वहीं, तालाब में रोजाना कचरा के साथ-साथ पुराने घर को तोड़े जाने वाले ईंट, पत्थर इत्यादि को फेंककर भरा जा रहा है. स्थानीय लोग बताते हैं कि वर्षों पूर्व राजा द्वारा तालाब को स्थानीय ग्वालों को दान स्वरुप दिया गया था. इसी के नाम से ही इस क्षेत्र का नाम ग्वाला पट्टी भी पड़ा. स्थानीय ग्वाला इस तालाब में मवेशियों को नहलाने-धुलाने का काम करते थे. वहीं मोहल्लेवासी भी इस तालाब के पानी का उपयोग नहाने, कपड़ा धोने इत्यादि के काम में करते थे. ग्वाला पट्टी के साथ-साथ आसपास मोहल्ले की बड़ी संख्या में लोग तालाब का उपयोग करते थे. पहले तालाब में लबालब पानी भरा रहता था, लेकिन वर्तमान समय में तालाब में सिर्फ कचरा ही नजर आता है. तालाब में कचरा फेंके जाने के कारण दिन-प्रतिदिन तालाब सिमटता जा रहा है. वहीं भू-माफिया भी चाहते हैं कि तालाब को भरकर समतल कर दिया जाए, ताकि इसकी खरीद-बिक्री कर इस पर फ्लैट इत्यादि का निर्माण कराया जा सके. तालाब का जीर्णोद्धार करने की हुई है शुरुआत : राहुल चक्रधरपुर नगर परिषद के सिटी मैनेजर राहुल अभिषेक ने कहा कि शहरी क्षेत्र के तालाब के जीर्णोद्धार करने की शुरुआत हुई है. शहरी क्षेत्र के तालाबों को चिन्हितिकरण सूची तैयार की जाएगी. फिलहाल शहर के पोटका तालाब का जीर्णोद्धार किया जा रहा है. भविष्य में अन्य तालाब का भी जीर्णोद्धार करने की योजना है. इससे लोगों को फायदा होगा. पहले तालाब का पानी साफ था : कवेला देवी ग्वाला पट्टी तालाब के समीप रहने वाली बुजुर्ग महिला कवेला देवी कहती हैं कि उनका बचपन इसी मोहल्ले में बीता है. पूर्व में यह तालाब काफी गहरा था और इसमें पानी भी साफ रहता था. बड़ी संख्या में लोग इस तालाब के पानी का उपयोग करते थे, लेकिन धीरे-धीरे इसमें कचरा फेंका जाने लगा और तालाब की गहराई कम होते गई. तालाब के आसपास कई घर बना दिये गये। धीरे-धीरे तालाब सिमटता जा रहा है. तालाब में कचरे की वजह से उठ रही है बदबू : ज्योति देवी वार्ड संख्या आठ के ग्वाला पट्टी में रहने वाली ज्योति देवी ने बताया कि तालाब में कचरा व मिट्टी इत्यादि फेंककर दिन-प्रतिदिन तालाब को भरा जा रहा है. वहीं तालाब में कचरा व मृत पशुओं को फेंके जाने के कारण बदबू के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है. तालाब पर भू-माफियाओं की भी नजर है. इसके कारण तालाब को भरकर समतल करने की कोशिश की जा रही है. पुराने तालाब का जीर्णोद्धार होना चाहिए : अभिषेक साव ग्वाला पट्टी निवासी अभिषेक साव ने कहा कि शहर में कई ऐसे तालाब हैं, जिसका अतिक्रमण कर कब्जा किया जा रहा है. पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाता है, लेकिन शहरी क्षेत्र के तालाब पर किसी प्रकार का ध्यान नहीं दिया जाता है. इसके कारण भू-माफिया तालाब को कब्जे में कर तालाब की खरीद-बिक्री कर देते हैं, जिसकी कोई जांच नहीं की जाती. लातेहार : तालाब भरकर बनाए गए भवन लातेहार जिला मुख्यालय में लगभग आधा दर्जन जीवित जल स्त्रोंतों व तालाबों को भर कर सरकारी भवन बनाया जा चुका है. धर्मपुर स्थित गुहड़ी आहर को भर कर बहुउदेश्यीय भवन का निर्माण किया गया है. प्रारंभ में इस जीवित तालाब को भरने का धर्मपुर के लोगों ने विरोध भी किया था. बावजूद तालाब को भर दिया गया. हालांकि कई वर्षों तक बहुदेश्यीय भवन में सरकारी कार्यक्रम होते रहे. लेकिन विगत तीन चार सालों से यह बंद है. अगर कहें कि यह डेड एसेट में तब्दील हो गया है तो गलत नहीं होगा. इसी प्रकार धर्मपुर मुहल्ले में ही नर्सिंग प्रशिक्षण भवन का निर्माण थेथर अहरा को भर कर कराया गया. लेकिन विडंबना यह रही कि दस साल पहले तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण निमार्ण कार्य बंद कर दिया गया. जो आज तक बंद है. धर्मपुर मुहल्ले में ही भितियाही अहरा को भर का सिविल सर्जन का कार्यालय सह आवास का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन यह भवन आज भी अधूरा है. धर्मपुर मुहल्ले में ही इंटर प्लस टू विद्यालय के बगल में स्थित खेल छात्रावास का निर्माण भी कैनाल अहरा को भर कर किया गया है. वहीं पहाड़पुरी मुहल्ले में जीवित पहाड़ी नाला को भर कर अनुसूचित जनजाति के लाभुकों के लिए बाल्मीकि आवास का निर्माण कराया गया. लेकिन बारिश में घर में पानी घुस जाता है. क्या कहते हैं यहां के लोग धर्मपुर मुहल्ला निवासियों का कहना है कि जब तक ये तालाब यहां थे, धर्मपुर मुहल्ले का जल स्तर काफी ऊंचा रहता था. महज 10-12 फीट मिट्टी खोदने पर ही पानी निकल जाता था. लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि 60 से 80 फीट खोदने पर पानी मिल रहा है. कहीं-कहीं तो इससे अधिक खुदाई के बाद पानी मिलता है. जिस तेजी से तालाबों को भरा गया, उस अनुपात में शहर में तालाबों का निर्माण नहीं कराया गया. आदित्यपुर : बीएड कॉलेज का सरकारी जमीन पर हुआ है निर्माण गम्हरिया प्रखंड के उप प्रमुख कैय्याम हुसैन ने सरायकेला डीसी को पत्र लिखकर सरायकेला अंचल के विजय ग्राम स्थित इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन का निर्माण सरकारी जमीन पर होने की शिकायत की है. पत्र में उप प्रमुख ने कहा है कि सरायकेला के मौजा विजय में इस बीएड कॉलेज के तीन मंजिला भवन के निर्माण का आधा हिस्सा कॉलेज की अपनी जमीन पर तथा आधा हिस्सा सरकारी जमीन पर है. उप प्रमुख ने कहा कि अगर उन्हें जिला स्तरीय न्यायालय से न्याय नहीं मिलता है तो वे इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय रांची में याचिका दायर करेंगे. उपप्रमुख ने कहा कि वे इसकी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक बीएड कॉलेज के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इससे यह प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन की मिलीभगत से बीएड कॉलेज का सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है. इसलिए वे आखिरी बार डीसी को पत्र लिख रहे हैं. अब वे शीघ्र उच्च न्यायालय की शरण में जाएंगे. हजारीबाग : शहर से गांव तक तालाब-नदियां सिमटती गईं, भू-माफिया कर रहे अतिक्रमण हजारीबाग जिले में शहर से लेकर गांव तक तालाब-नदियों का दमन किया जा रहा है. भू-माफिया इसके किनारों पर अतिक्रमण कर जलस्रोत का वजूद ही खत्म करने पर आमादा हैं. अतिक्रमण का हाल यह है कि बरही नदी आज नाला बन चुका है, वहीं हजारीबाग के कोर्रा तालाब में भी बड़ा ही गड़बड़झाला है. इसके बाद भी अधिकारी मौन हैं. बरही नदी का आकार और प्रकार दोनों बदला बरही नदी जो बराकर से मिलते हुए सीधे बंगाल की खाड़ी तक जाती है. अतिक्रमण ने इस नदी का स्वरूप बदलकर नाले में परिवर्तित कर दिया है. स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी चौड़ाई करीब 200 मीटर से भी अधिक थी, जो अब सिमटकर महज 20 फीट या उससे भी कम हो गई है. भू-माफियाओं ने अवैध कागजात बनाकर जमीनों की बंदरबाट कर दी. वहां नई बस्ती और कॉलोनी का निर्माण कर दिया है. ग्रामीणों ने इसकी शिकायत अंचल कार्यालय से कई बार की, परंतु स्थिति यथावत है. इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. इसी तरह चलता रहा तो नदी का अस्तित्व एक दिन समाप्त हो जाएगा. अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अब चौपारण में भी चलेगा बुलडोजर हजारीबाग सदर प्रखंड के बाद अब चौपारण में प्रशासन का बुलडोजर सरकारी अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ चलने की तैयारी चल रही है. चौपारण अंचल कार्यालय ने इसे लेकर नोटिस भी जारी कर दिया है और स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर घर या प्रतिष्ठान बनाए हैं उसे तोड़ दें. अन्यथा प्रशासन की बुलडोजर अतिक्रमण किए हुए जमीन को ध्वस्त कर देगी. लगभग 32 लोगों के खिलाफ यह नोटिस निर्गत किया गया है. जिसे अंचल कार्यालय के अलावा कई जगह लगाया भी गया है. जिन लोगों ने जमीन अतिक्रमण किया है उसे भी नोटिस भेजा जा रहा है. खाता संख्या 52 प्लॉट संख्या 850 पर किए गए अतिक्रमण को मुक्त कराया जा रहा है. साथ ही साथ यह भी कहा जा रहा है कि अगर कोई व्यक्ति जमीन का मालिकाना हक का दावा करता है तो मूल दस्तावेज और लिखित आवेदन के साथ कार्यालय में पहुंचे .अगर कोई नहीं पहुंचता है तो यह सर्वमान्य होगा कि यह जमीन सरकारी है. चौपारण में गैरमजरूआ जमीन पर अतिक्रमण जारी, प्रशासन है मौन चैपारण में जिस रास्ते से चौपारण अंचल कार्यालय के पदाधिकारी कर्मी हर रोज गुजरा करते हैं, उसी जमीन पर भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों ने अपना डेरा जमा लिया है. खाता नंबर 52 प्लॉट 850 व 851 रकबा एक एकड़ 26 डिसमिल अतिक्रमणकारियों की जद में हैं. इन अतिक्रमणकारियों को कई बार अंचल की ओर से अतिक्रमण हटाने का नोटिस भी दिया गया. लेकिन अतिक्रमणकारियों की सियासी पैठ मजबूत होने के कारण मामले को हर बार दबा दिया गया. इसमें अंचल अधिकारियों की मिलीभगत की चर्चा सरेआम है. उस जमीन पर कब्जा करने के लिए माफिया और अतिक्रमणकारी मंदिर और भगवान का भी सहारा ले रहे हैं. दुकान के ऊपर पहले तल पर मंदिर बना दिया गया है. अतिक्रमण के कारण नदी का मार्ग बदल गया : पूर्व मुखिया पूर्व मुखिया सह वर्तमान मुखिया मीनू देवी के पति छोटन ठाकुर ने बताया कि बरही नदी का आकार और प्रकार दोनों बदल गया है. अतिक्रमण के कारण नदी का मार्ग भी बदल गया है. इस नदी में पानी नहीं रहता है. इस क्षेत्र में यह नदी कृषि का एक मात्र साधन था. पानी के अभाव में करसो, बरहीडीह आदि क्षेत्र पूरी तरह प्रभावित है. सीओ को कई बार सूचित किया गया परंतु सिर्फ कार्रवाई का आश्वासन मिला. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की हो रही अनदेखी : गुरुदेव गुप्ता विश्व हिन्दू परिषद के जिला सह मंत्री गुरुदेव गुप्ता कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जलस्रोत प्रभावित नहीं करें. लेकिन बरही नदी किनारे की जमीन पर जिस तरह से कब्जा हो रहा है, इस पर रोक लगाने की जरूरत है. अभी तो दो-चार बूंद पानी भी है. अगर यही हाल रहा, तो आनेवाली पीढ़ी को पता भी नहीं चलेगा कि यहां कोई नदी भी थी. एक तरफ सरकार नदी बचाने की बात करती है पर नदी पर कोई ध्यान नहीं है. अभियान चलाकर नदी को है बचाने की जरूरत : भगवान समाजसेवी भगवान केशरी ने कहा कि अभियान चलाकर बरही नदी को बचाने की जरूरत है. इसका पुराना वजूद तो लौटना संभव नहीं है, लेकिन जितना भी बचा हुआ है, उसे संरक्षित करने की आवश्यकता है. स्थानीय लोगों को ही पहल करने की जरूरत है. नदी पर अतिक्रमण करना सही नहीं है. प्रशासन को भी इस पर कार्रवाई करना चाहिए. तभी जमीन माफिया अपने हरकतों से बाज आएंगे. नदी-तालाब से ही जीवन है इसे बचाना चाहिए : मेवालाल समाजसेवी मेवालाल केसरी ने कहा कि नदी-तालाब से ही जीवन है. पानी के बिना जीवन संभव नहीं है. अगर जलस्रोत को ही खत्म कर दिया जाए, तो मानव, पशु, पक्षी सबके जीवन पर खतरा मंडराने लगेगा. बरही नदी पर अतिक्रमण से कई गांवों को पानी की परेशानी होने लगी है. नदियों के महत्व को समझने की जरूरत है. समय रहते इस नदी को बचाने की जरूरत है. अतिक्रमणकारियों पर होनी चाहिए कार्रवाई : छोटन ठाकुर बरही पूर्वी के पूर्व मुखिया छोटन ठाकुर कहते हैं कि नदी-तालाबों के किनारे की जमीन पर अतिक्रमण करनेवालों पर कार्रवाई होनी चाहिए. यह पता करने की जरूरत है कि आखिर नदी किनारे की जमीन किसने बेची. खरीदने वालों को भी पहले यह सोचना चाहिए था कि कहीं कभी अभियान चला, तो उनका घर भी कार्रवाई की जद में आ सकता है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तो अनुपालन होना चाहिए. बरहीवासियों को है आवाज बुलंद करने की जरूरत : बद्री पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी बद्री यादव कहते हैं कि नदी पर अतिक्रमण के खिलाफ लोगों को आवाज बुलंद करने की जरूरत है. अबर अब भी पहल नहीं की गई, तो आनेवाले दिनों में दूसरे जलस्रोतों का भी यही हाल होगा. बेखौफ भू-माफिया की नजरें ऐसी हर जमीन पर है. ऐसी जमीन बगैर प्रशासनिक साठ-गांठ के बेची नहीं जा सकती. ऐसे में निष्पक्षता और ईमानदारी से पूरे मामले की जांच होनी चाहिए. कस्तूरबा विद्यालय की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए कार्रवाई शुरू, 16 लोगों को दिया गया नोटिस हजारीबाग के चरही पंचायत स्थित उंटमरवा टोला में कस्तूरबा विद्यालय की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है. सरकारी जमीन पर कब्जा को लेकर प्रखंड कार्यालय ने 16 लोगों को नोटिस जारी किया है. नोटिस मिलने के बाद कई लोगों ने सीइओ शशि भूषण सिंह से मुलाकात कर बताया कि अगर उनकी जमीन पर बुलडोजर चल जाएगा, तो वे लोग बेघर हो जाएंगे. इन सारी बातों पर सीओ ने लोगों से सवाल किया कि वे लोग जीएम लैंड पर मकान कैसे बना लिया. अंचल से नोटिस दिया गया है. इसमें 15 जून तक की मोहलत दी गई है. 16 जून को सभी लोग अपनी जमीन संबंधित कागजात लेकर 11:00 बजे अंचल कार्यालय पहुंचेंगे. सभी का पक्ष सुना जाएगा. जिनके पास जमीन के वैध कागजात होंगे, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. जिनके पास अवैध दस्तावेज मिलेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी. उंटमरवा टोली में कई लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर मकान बना लिया है. सरकारी भूमि को कब्जे से मुक्त कराने के लिए अंचल के अमीन राजेश कुमार और सीआई इदरीश अंसारी सहित अंचल के कई कर्मियों के माध्यम से चार दिनों तक कस्तूरबा विद्यालय की जमीन की मापी की गई थी. तब पता चला था कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है. तब तत्कालीन डीसी और सीओ को पार्टी बनाकर दायर किया था रिट ताजपुर निवासी सुमन कुमार सिन्हा ने भी अतिक्रमण हटाने के लिए अंचल से लेकर जिला अधिकारी तक दौड़ लगाई, पर भू-माफिया के आगे उनकी कुछ नहीं चली. थक हार कर उन्होंने उच्च न्यायालय रांची में सरकार के खिलाफ रिट दायर किया. उच्च न्यायालय ने हजारीबाग जिले के डीसी और चौपारण के अंचल अधिकारी को इस मामले में पार्टी बनाकर उस भूमि पर हुए अतिक्रमण की जांच कर एक आदेश पारित करने को कहा. इस पर तत्कालीन डीसी ने किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की. इस कारण उच्च न्यायालय ने जिले के तत्कालीन डीसी पर अवमानना मुकदमा भी दायर किया. डीसी ने दिया कार्रवाई का आदेश विविध वाद संख्या 22/2021 की सुनवाई कर डीसी नैंसी सहाय ने 22.03.22 को चौपारण अंचल अधिकारी को अपने फैसले में आदेश देते हुए कहा कि खाता 52 प्लॉट 850 व 851 में जितने प्रकार के अतिक्रमण हैं, उसे हटाया जाए. इस मामले को लेकर अब अंचल कार्यालय की ओर से जमीन मापी भी की जा रही है ताकि सरकारी जमीन को चिह्नित कर अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके. पदाधिकारियों ने भी कहा है कि कोर्ट का आदेश है और यह सरकारी जमीन है. इस पर कोई भी व्यक्ति अतिक्रमण नहीं कर सकता है. ऐसा होता है तो इस कार्रवाई की जाएगी. 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