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डुमरिया : 7-8 अगस्त की रात लांगो में ग्रामीणों ने किया था नौ नक्सलियों का सेंदरा

Dumaria : घाटशिला अनुमंडल के ओडिशा सीमा से सटे गुड़ाबांदा और डुमरिया में वर्ष 2000 से नक्सली ( पीपुल्स वार) की गतिविधियां शुरू हो गयी थीं. तब तक गुड़ाबांदा के जियान के कान्हु मुंडा और पुटू मुंडा समेत कई युवक और युवतियां नक्सली संगठन में शामिल हो चुके थे. डुमरिया प्रखंड क्षेत्र के भी महेश्वर मुर्मू समेत कई युवक और युवतियां नक्सली संगठन में शामिल हो चुके थे. नक्सली गतिविधियों को देखते हुए जमशेदपुर के तत्कालीन एसपी डॉ अरुण कुमार उरांव ने नक्सलियों की नकेल कसने के लिए नागरिक सुरक्षा समिति गठित करने की पहल की. 31 मार्च 2003 को डुमरिया के भागाबांधी हाट हाट मैदान में हुई बैठक में नागरिक सुरक्षा समिति का गठन हुआ. इसे भी पढ़ें : जगन्नाथपुर">https://lagatar.in/jagannathpur-block-child-rights-protection-committee-meeting-held-in-todanghatu/">जगन्नाथपुर

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शंकर अध्यक्ष व धनाई महासचिव बनाए गए थे

शंकर चंद्र हेंब्रम समिति के अध्यक्ष बने और धनाई किस्कू महासचिव बनाए गए. इसके बाद नक्सलियों के खिलाफ एक अभियान शुरू हुआ. और 25 - 26 मई की रात सैकड़ों नक्सलियों ने गुड़ाबांदा थाना पर हमला कर दिया. पांच घंटे तक दोनों पक्ष से गोलियां चली. इस हमला में खाना की रसोईया शांति देवी की मौत हो गई.इसके बाद पुलिस और नागरिक सुरक्षा समिति नक्सलियों के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से जुट गए. और आखिरकार 7- 8 अगस्त 2003 की रात डुमरिया से लांगो गांव में नक्सली मात खा गए. ग्रामीणों ने 9 नक्सलियों सेंदरा कर दिया यानी की मौत के घाट उतार दिया और हथियार भी ले लिए. नक्सलियों के खून से लांगो की धरती लाल हो उठी. नक्सली इतिहास की यह पहली घटना थी जिसमें 9 नक्सली ग्रामीणों के द्वारा मार डाले गए. इस घटना ने लांगो गांव को देश में चर्चित बना दिया. नक्सली संगठन को झंकझोर कर रख दिया. लांगों के ग्रामीणों ने नक्सलियों की ताबूत में पहली कील ठोक दी. तब डुमरिया थाना के थानेदार आनंद मिश्रा थे. ग्रामीणों की वीरता को सलाम करने तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा समेत कई मंत्री लांगो आए. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने भी लांगो आकर ग्रामीणों की इस वीरता को सलाम किया. यहां के ग्रामीण हर साल 8 अगस्त को सेंदरा दिवस मनाते हैं और वीरता का गीत गाकर नाचते गाते हैं. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-free-service-camp-organized-for-kanwariyas-in-barajamda/">नोवामुंडी

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थाना पर हमला के बाद नक्सली अपना प्रभाव बढ़ा रहे थे

दरअसल, गुड़ाबांदा थाना पर हमला के बाद उत्साहित नक्सलियों ने डुमरिया क्षेत्र में अपना प्रभाव विस्तार करना शुरू कर दिया. गांव में अपना राज चलाने के लिए ग्रामीणों को धमकाना और मारना पीटना शुरू कर दिया. संगठन की बात नहीं मानने वाले ग्रामीणों को खेती करने पर रोक लगा दी. नक्सलियों की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश पनपा. फिर पुलिस, नागरिक सुरक्षा समिति और ग्रामीणों ने नक्सलियों को सबक सिखाने के लिए रणनीति बनाई और नक्सली इसमें फंस भी है. 7- 8 अगस्त की रात लांगो गांव में ग्रामीणों को धमकाने लिए और पुलिस तथा नागरिक सुरक्षा समिति के दूर रहने हिदायत देने के लिए सशस्त्र नक्सली आ पहुंचे. योजना के मुताबिक ही ग्रामीणों ने उन्हें बैठक के लिए राजी किया. बैठक के दौरान ही ग्रामीणों ने नक्सलियों पर हमला कर दिया और सभी को बांध दिया. फिर ग्रामीणों ने नौ नक्सलियों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. उनके हथियार भी ले लिए. मारे जाने वाले नक्सलियों में बंगाल की गौरी, मार्शल, टूटी मेलगांडी, पंचमी, राजेश मुंडा समेत नौ नक्सली थे. इसके बाद ग्रामीणों द्वारा नक्सलियों का सेंदरा करने का एक दौर शुरू हुआ. 10 अगस्त को चिरूगोड़ा में राम हेंब्रम, 12 अगस्त को रांगामाटिया के बोका माझी, फिर भागाबेड़ा के लेना पातर और जियान गांव के खोखा मुंडा का सेंदरा हुआ. इसके बाद वर्ष 2008 में डुमरिया के ही भीतरआमदा गांव के पहाड़ पर ग्रामीणों ने नक्सली संगठन के एरिया कमांडर विकास समेत सात नक्सलियों को मार गिराया और उनके हथियार भी ले लिए. इस सेंदरा अभियान के भय से कई ने नक्सली संगठन को छोड़ दिया और डुमरिया प्रखंड नक्सल मुक्त हो गया. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-parents-teachers-meeting-organized-in-xavier-school-gamharia/">आदित्यपुर

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हर वर्ष ग्रामीण मनाते हैं सेंदरा दिवस

लांगो में 9 नक्सलियों को मार गिराने के बाद से हर साल ग्रामीण सेंदरा दिवस मनाते हैं. ग्रामीण उत्सव मनाते हैं और नाच गाकर वीरता का गीत गाते हैं. विदित हो कि लांगो कांड के बाद कई युवाओं को पुलिस में नौकरी भी मिली थी. [wpse_comments_template]

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