Dumaria (Sanat Kr Pani) : डुमरिया प्रखंड के काशीडीह, कुमड़ाशोल,
इचाडीह और
ओड़िशा मयुरभंज जिला अंतर्गत
बड़केड़म गांव के ग्रामीणों ने अपने वर्षों पुरानी मैत्री संबंध और मेल मिलाप की परंपरा को पुनर्जीवित
किया. ओड़िशा के
बड़केड़म के ग्रामीणों का काशीडीह में पारंपरिक तरीके से स्वागत किया
गया. शुक्रवार को आयोजित इस मैत्री कार्यक्रम में ऑल इंडिया सरना धरम
चेमेद आसड़ा के संस्थापक
गुरुबाबा बानाव मुर्मू के परिवार के सदस्य भी उपस्थित
थे. ड़केड़म गांव के स्वर्गीय
गुरुबाबा के भतीजे
सुनाराम मुर्मू और ग्रामीण
पिथो हांसदा, कुंवर हांसदा,
घासिराम मुर्मू,
निमाई हांसदा आदि ने बताया कि काशीडीह, कुमड़ाशोल,
इचाडिह और
ओड़िशा के
बड़केड़म गांव के लोगों ने आदिवासी सरना धरम
चेमेद आसड़ा की स्थापना वर्ष 1936 में मिलकर किया
था. इसे भी पढ़ें : सिमडेगा">https://lagatar.in/simdega-review-of-health-education-and-environment-department-in-standing-committee-meeting/">सिमडेगा
: स्थायी समिति की बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण विभाग की समीक्षा पूर्वजों ने बनाया था मैत्री का रिश्ता

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/Dumaria-Parampara-1.jpg"
alt="" width="600" height="400" /> इसके बाद पूरे भारत में लाखों लोग
गुरुबाबा स्वर्गीय
बानाव मुर्मू के
अनुयाई बने. उन्होंने बताया कि पहले इस
आसड़ा को चासा
गांवता चेमेद माड़वा के नाम से जाना जाता
था. काशीडीह के ग्राम प्रधान गणेश टुडू,
इचाडिह प्रधान रघुनाथ सोरेन बैद्यनाथ टुडू,
आंता टुडू,
जासाई सोरेन आदि ने बताया कि
बड़केड़म गांव के साथ इस तीनों गांव का अपने घर परिवार और मैत्री का रिश्ता हमारे पूर्वजों द्वारा बनाया गया
है. पिछले कुछ वर्षों से मेल मिलाप नहीं हो पाया
था. इस लिए दोनों गांवों के ग्रामीणों ने मेल मिलाप का आयोजन कर परंपराओं को पुनर्जीवित
किया. आयोजन में
कादे मुर्मू,
जासाई मुर्मू,
किस्टो सोरेन,
कुनू टुडू समेत अनेक ग्रामीण जुटे. [wpse_comments_template]
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