Manoharpur (Ajay singh) : मनोहरपुर के विभिन्न चर्चों में शुक्रवार को गुड फ्राइडे का त्योहार पारंपरिक तरीके से मनाया
गया. इस मौके पर मनोहरपुर, आनंदपुर प्रखंड
अंर्तगत सीएनआई, आरसी
मिसन चर्च एवं
जीईएल चर्च में ईसाई समुदाय के लोगों ने विशेष प्रार्थना
की. वहीं चर्च के पादरी, पुरोहितों ने प्रभु यीशु का शुभ संदेश
दिया, साथ ही यीशु मसीह के उस बलिदान को याद कर कहा कि मानव जाति की रक्षा के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया
था. प्रभु यीशु को यहूदी शासकों ने कई तरह की मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी
थी. उसके बाद उन्हें क्रॉस पर चढ़ा दिया गया
था. जिस दिन उन्हें क्रॉस पर चढ़ाया गया
था वह दिन शुक्रवार यानी
फ्राइडे का दिन
था. इसलिए यह दिन गुड फ्राइडे के रूप में मनाया जाता
है. यह भी कहा जाता है कि क्रॉस पर
चढ़ाने के तीन दिन बाद ईसा मसीह दोबारा से जीवित हो गए थे और उस दिन रविवार
था. ऐसे में पूरी दुनिया में उसे ईस्टर संडे के रूप में मनाया जाता
है.
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गुड फ्राइडे से 40 दिन पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती
हैं. ईसाई धर्म के लोग 40 दिन तक उपवास रखते हैं वहीं कुछ लोग सिर्फ शुक्रवार को उपवास रखते हैं, इसे
लेंट कहा जाता
है. प्रभु यीशु की याद में लोग उपवास करते हैं और मीठी रोटी बनाकर खाते
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गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म के अनुयायी चर्च और घरों में सजावट की वस्तुएं कपड़े से ढक देते
हैं. चर्च में काले कपड़े पहनकर जाते हैं और शोक जताते हैं और प्रभू यीशु से अपने गुनाहों की माफी मांगते
हैं. ईसा मसीह के अंतिम सात
वाक्यों की विशेष व्याख्या की जाती
है. इस दिन चर्च में विशेष प्रार्थना सभाएं होती है, बाईबल के उपदेश
पढ़े जाते
हैं. गुड फ्राइडे
प्रशू यीशु के बलिदान दिवस के तौर पर याद किया जाता
है. ये
प्रायश्चित्त और प्रार्थना का दिन है इसलिए इस दिन चर्च में
घंटियां नहीं बजाई
जातीं. बल्कि
लकड़ी के
खटखटे बजाए जाते
हैं. लोग चर्च में क्रॉस को चूमकर उनका स्मरण करते
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