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दुमका : दो दिवसीय साहित्य महोत्सव का शानदार आगाज

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Dumka : राजकीय पुस्तकालय दुमका में दो दिवसीय साहित्य महोत्सव की शुरुआत शनिवार 16 अप्रैल से हो गई. महोत्सव में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नामचीन लेखकों और कवियों ने शिरकत की. इसके आयोजन का उद्देश्य जिले में पुस्तकालय और पुस्तकों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है. लेखकों ने भ्रमणशील पुस्तकालय का फीता काट कर उद्घाटन किया. दुमका के साहित्य प्रेमी इस महोत्सव के आयोजन से खुश हैं. 17 अप्रैल को महोत्सव का समापन होगा. महोत्सव में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त उपन्यासकार एवं समालोचक चंद्रहास चौधरी, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकार सह भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रजत उभयकर, विख्यात पक्षी विज्ञानी एवं संरक्षणवादी विक्रम ग्रेवाल,  वॉकिंग बुकफेयर के लेखक और सह-संस्थापक अक्षय बहिबाला, आदिवासी विचारक व कवि महादेव टोप्पो, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक अनुज लुगुन, प्रोफेसर अच्युत चेतन, लेखक विनय सौरभ, आलोचक रणेंद्र, सहायक प्रोफेसर यदुवंश प्रणय, प्रोफेसर अभिजीत गुप्ता, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक मिहिर वत्स ने भाग लिया. महोत्सव की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर हुई. पहले दिन 7 सत्रों में कार्यक्रम हुए. पहला सत्र का विषय लाइब्रेरी ऑफ माय लाइफ था. इस सत्र में वक्ताओं ने पुस्तकालय के महत्व और पुस्तकालय से जीवन में होने वाले परिवर्तन पर विचार रखे. इस सत्र की अध्यक्षता अंग्रेजी के साहित्यकार चंद्रहास चौधरी ने की. प्रोफेसर अच्युत चेतन ने कहा कि उनके जीवन का पहला लाइब्रेरी उनके घर में था, जिसे उनके पिताजी ने संजोया था.

दुमका के लिए आज का दिन ऐतिहासिक

पहले सत्र में नीलोत्पल मृणाल ने भी विचार रखे. उन्होंने कहा कि दुमका के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है. साहित्य महोत्सव आयोजित करने पर उन्होंने डीसी रविशंकर शुक्ला के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि वे लेखक के तौर पर इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर रहे हैं. दुमका के एक उत्साहित युवा के रूप में इसमें शामिल हुए हैं. यहां लोगों के बैठने की जगह नहीं है. यह महोत्सव के सफल होने का परिचायक है. महोत्सव में डीसी खुद उत्साहित नजर आए. उन्होंने बेहतर तरीके से इसका प्रबंधन किया. महोत्सव में भाग लेने आए सभी लोगों को वे खुद बैठा रहे थे. सत्रों में वे खड़े नजर आए. दूसरे सत्र का विषय वाइल्ड लाइफ क्राइसिस इन इंडिया था. इस सत्र में पक्षी विज्ञानी विक्रम ग्रोवर ने विचार रखे. उन्होंने जीव-जंतुओं के जीवन पर प्रकाश डाला. तीसरे सत्र में अनुज लुगुन और महादेव टोप्पो ने आदिवासी साहित्य पर चर्चा की. सायं 5 बजे पांचवे सत्र में चंद्रहास चौधरी बुक ऑफ माय लाइफ विषय पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि इस महोत्सव को लेकर रोमांचित हूं. इसे लेकर विगत कुछ दिनों यहां आता-जाता रहा हूं. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=289753&action=edit">यह

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