Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

दुमका : न्यू केअर हॉस्पिटल के शिविर में डाक बम की सेवा, मिसाल कायम

Advertisement
Advertisement
Dumka : दुमका स्थित न्यू केअर हॉस्पिटल के प्रोपराइटर डॉ. तुषार ज्योति समेत उनकी पूरी टीम ने डाक बम (कांवरिया) की सेवा कर नर सेवा, नारायण सेवा वाली कहावत को चरितार्थ किया है. टीम में मुस्लिम युवक भी सेवा कार्य करते हैं. सावन के पवित्र महीने में हर रविवार की रात इस टीम ने भागलपुर-बासुकीनाथ  मार्ग पर डाक बम की सेवा की. डाक बम के लिए इस हॉस्पिटल की शिविर डांडे मोड़ के समीप है. न्यू केअर हॉस्पिटल ने लगाई शिविर  [caption id="attachment_384208" align="aligncenter" width="293"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/dr.-tushar-jyoti-293x300.jpg"

alt="" width="293" height="300" /> हॉस्पिटल के  प्रोपराइटर डॉ. तुषार ज्योति[/caption] इस संबंध में डॉ. तुषार ज्योति ने बताया कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं. डॉक्टर होने के नाते उनका पेशा है सेवा करना. डाक बम की सेवा कर मानव धर्म का निर्वहन कर रहा हूं. सावन के महीने में सुल्तानगंज-देवघर मार्ग पर कई संस्थाओं की सेवा शिविर लगती है. वहीं भागलपुर-बासुकीनाथ मार्ग पर सेवा शविर की कमी खलती थी. हाल के वर्षों में भागलपुर के बरारी घाट से गंगाजल भरकर बासुकीनाथ आने वाले डाक बम की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. बरारी से दुमका की दूरी करीब 110 किलोमीटर है. इतनी लंबी दूरी तय कर डाक बम बासुकीनाथ में जलार्पण करने आते हैं. इस मार्ग में डाक बम के लिए खाने-पीने की सुविधा कम है. इस वजह से शिविर लगाई गई. शिविर में मुस्लिम युवक भी करते हैं सेवा कार्य [caption id="attachment_384213" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/md-tinku-ali-300x234.jpg"

alt="" width="300" height="234" /> मुस्लिम युवक मो. टिंकू अली[/caption] डॉ. तुषार ज्योति ने बताया कि दुमका जिले के कई वैसे शिव भक्त हैं जो हजारों किलोमीटर दूर देश-विदेश में रहते है. सावन महीने में कांवरियों की सेवा के लिए उनमें से अधिकांश दुमका आते हैं. न्यू केअर हॉस्पिटल गंगा-जुमनी तहजीब की मिसाल है. शिविर में मुस्लिम युवक भी सेवा कार्य करते हैं. मोहर्रम निकट होने के बावजूद वे मुस्लिम युवक शिविर में डटे रहते हैं. शिविर में सेवा कार्य करने वाले वैसे ही एक मुस्लिम युवक मोहम्मद टिंकू अली ने बताया कि डाक बम की सेवा कर सुकून मिलता है. शिविर में डाक कांवरियों के पैरों पर गर्म जल का छिड़काव, दर्द नाशक दवा का स्प्रे, विभिन्न तरह का फल, सुखे मेवे समेत भक्ति गीत सुनने की सुविधाएं उपलब्ध है. कई डाक बम वैसे होते हैं जो लगातार चलते रहने से थक जाते हैं. उन कांवरियों को रास्ते में शिविर के वालंटियर अपने कंधे का भी सहारा देते हैं. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=382615&action=edit">यह

भी पढ़ें : दुमका : आदिवासी छात्रों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का फूंका पुतला [wpse_comments_template]
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही