Dumka : दुमकाhttps://www.jagran.com/jharkhand/dhanbad-police-caught-one-person-involved-on-wrong-doing-dumka-dhanbad-jharkhand-news-22135768.html">
style="color: #ff0000;"> (Dumka)- घर से भागी एक 17 वर्षीया एक किशोरी को चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह ने अगवा कर लिया. किशोरी बिहार के जहानाबाद जिले की रहने वाली है. उसे पहले उत्तर प्रदेश के बनारस और बाद में दुमका जिले के सीमावर्ती इलाके में रखा गया. किशोरी वहां से किसी तरह जान बचाकर भाग निकली. जिला बाल सरंक्षण पदाधिकारी प्रकाश चंद्र के निर्देश पर चाइल्डलाईन दुमका के केंद्र समन्वयक मधूसुदन सिंह और टीम मेंबर शांतिलता हेंब्रम ने किशोरी को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के हवाले 28 मई को किया. किशोरी की मां, भाई और चाचा जहानाबाद से दुमका पहुंचे. सीडब्ल्यूसी ने बालिका की सुरक्षा और हित को देखते हुए अभिभावकों को नहीं सौंप बालगृह (बालिका) भेज दिया. समिति के चेयरपर्सन अमरेंद्र कुमार और सदस्य डॉ. राज कुमार उपाध्याय ने किशोरी से बयान लिया. किशोरी ने बयान दिया कि उसके अभिभावक उसकी शादी की बातचीत चला रहे थे. हिमाचल प्रदेश से उसके पिता उसे लेकर जहानाबाद आए. किशोरी अपने सहपाठी से शादी करना चाहती थी. 4 मई को वह घर से छोटे भाई के साथ निकली. बाद में भाई को घर वापस भेज दी. उसने फोन कर अपने सहपाठी को जहानाबाद आने को कहा, लेकिन वह आने से इंकार कर गया. वह ट्रेन से कटकर आत्महत्या करना चाहती थी. किशोरी बस स्टेंड में अकेली बैठी थी. इसी बीच एक टैंपो आकर वहां रूकी. टैंपो में दो महिलाएं सवार थी. दोनों ने किशोरी से पूछा कि वह कहां जाना चाहती है? घर का पता बताने पर महिलाओं ने कहा कि टैंपों उसके घर की तरफ जाएगी. महिलाओं ने उसे टैंपों में बैठा लिया. आगे बढ़ने पर उसमें पांच पुरूष सवार हुए. टैंपों में ही किशोरी को बेहोश कर दिया गया. होश आने पर वह खुद को एक बंद कमरे में बंद पाई. झांककर देखने पर बनारस लिखा एक बोर्ड नजर आया. वहां कुछ किन्नर थे, जो उसे जबरन नाच-गाना सिखाते थे. किशोरी के इंकार पर वे लोग मारपीट करते थे. बनारस से पांच किन्नर उसे लेकर बनारस से दुमका">https://www.jagran.com/jharkhand/dumka-arresting-crimal-21892134.html">दुमका
आ गए. जहां उसे एक करकट के बने कमरे में बंद कर दिया गया. वह भागने का अवसर तलाश रही थी. मौका मिलने पर वह उस कमरे से भाग गई. किन्नरों ने उसे खोजकर पकड़ लिया और फिर उसी कमरे में बंद कर दिया. 27 मई की सुबह किशोरी फिर वहां से भाग निकली. मसानजोर नामक जगह पर सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार को उसने आपबीती सुनाई. बाइक सवार उसे पत्ताबाड़ी तक साथ ले गए और एक सौ रुपये नगद देकर दुमका जाने वाली बस में बैठा दिया. दुमका आने के बाद वह नगर थाना प्रभारी के पास पहुंची. पुलिस ने उसे चाइल्डलाइन के हवाले कर दिया. किशोरी की मां ने पुलिस को बयान दिया कि लोकलाज के कारण वह बेटी के गायब होने की रिपोर्ट थाना में दर्ज नहीं कराई. मां ने स्वीकार किया कि बेटी की शादी की बातचीत चल रही थी, लेकिन शादी तय नहीं हुई थी. अब बालिग होने के बाद ही बेटी की शादी करेगी. अभिभावक उसे लेकर घर लौटना चाहते हैं. वहीं भाई ने पुलिस को बयान दिया कि उसकी बहन एक लड़के के साथ घर से भाग गई थी. इस कारण घर के लोगों को उसके प्रति आक्रोश है. समिति ने किशोरी, उसकी मां और भाई के बयान के आधार पर माना कि वह पूरा सच नहीं बोल रही है. समिति ने मामले को रन अवे (घर से भागना) की श्रेणी में दर्ज कर किशोरी को बालगृह (बालिका) भेज दिया. समिति के चेयरपर्सन ने किशोरी के अभिभावकों को बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जहानाबाद के डीसीपीओ से एसआईआर (सामाजिक जांच प्रतिवेदन) मंगवाया जाएगा. इसके बाद मामला जहानाबाद सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया जाएगा. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=319552&action=edit">यह
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आ गए. जहां उसे एक करकट के बने कमरे में बंद कर दिया गया. वह भागने का अवसर तलाश रही थी. मौका मिलने पर वह उस कमरे से भाग गई. किन्नरों ने उसे खोजकर पकड़ लिया और फिर उसी कमरे में बंद कर दिया. 27 मई की सुबह किशोरी फिर वहां से भाग निकली. मसानजोर नामक जगह पर सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार को उसने आपबीती सुनाई. बाइक सवार उसे पत्ताबाड़ी तक साथ ले गए और एक सौ रुपये नगद देकर दुमका जाने वाली बस में बैठा दिया. दुमका आने के बाद वह नगर थाना प्रभारी के पास पहुंची. पुलिस ने उसे चाइल्डलाइन के हवाले कर दिया. किशोरी की मां ने पुलिस को बयान दिया कि लोकलाज के कारण वह बेटी के गायब होने की रिपोर्ट थाना में दर्ज नहीं कराई. मां ने स्वीकार किया कि बेटी की शादी की बातचीत चल रही थी, लेकिन शादी तय नहीं हुई थी. अब बालिग होने के बाद ही बेटी की शादी करेगी. अभिभावक उसे लेकर घर लौटना चाहते हैं. वहीं भाई ने पुलिस को बयान दिया कि उसकी बहन एक लड़के के साथ घर से भाग गई थी. इस कारण घर के लोगों को उसके प्रति आक्रोश है. समिति ने किशोरी, उसकी मां और भाई के बयान के आधार पर माना कि वह पूरा सच नहीं बोल रही है. समिति ने मामले को रन अवे (घर से भागना) की श्रेणी में दर्ज कर किशोरी को बालगृह (बालिका) भेज दिया. समिति के चेयरपर्सन ने किशोरी के अभिभावकों को बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जहानाबाद के डीसीपीओ से एसआईआर (सामाजिक जांच प्रतिवेदन) मंगवाया जाएगा. इसके बाद मामला जहानाबाद सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया जाएगा. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=319552&action=edit">यह
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