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नगर आयुक्त मनोज कुमार के कार्यकाल में टीपी गजानंद ने पास किया था भुइंहरी जमीन पर नक्शा, जानें इतिहास

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Pravin Kumar Ranchi :  रांची नगर निगम ने बिल्डिंग बायलॉज को ताक पर रख कर भूइंहरी जमीन का नक्शा स्वीकृत करने का काम किया है. यह कारनामा रांची नगर निगम के नगर आयुक्त मनोज कुमार के कार्यकाल में किया गया है. टाउन प्लानर गजानंद ने आलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नक्शे को अप्रूव किया था. वर्तमान में टाउन प्लानर गजानंद नगर विकास एवं आवास विभाग में पदस्थापित हैं. आलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का नक्शा पास करने के समय नगर आयुक्त के पद पर मनोज कुमार,  टाउन प्लानर के पद पर गजानंद और विधि शाखा में अरुण कुमार पदस्थापित थे. रांची नगर निगम ने 19 फरवरी 2021 को नक्शा का प्लान जारी किया है.

भूइंहरी जमीन पर नक्शा पास करने को लेकर विभाग ने 15 जुलाई 2020 को भेजा था मंतव्य

तत्कालीन नगर आयुक्त मनोज कुमार ने भूइंहरी जमीन पर नक्शा पास करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग से 27 जुलाई 2019 को पत्रांक संख्या 2254 के माध्यम से स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की थी. इसके बाद नगर विकास विभाग द्वारा राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार से भी परार्मश प्राप्त किया गया. इसी क्रम में विधि विभाग ने महाधिवक्ता झारखंड सरकार से मंतव्य लिया. विधि विभाग से प्राप्त महाधिवक्ता झारखंड सरकार के मंतव्य को 15 जुलाई 2020 को नगर आयुक्त रांची नगर निगम को नगर विकास विभाग ने भेजा था. इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि बिल्डिंग बायलॉज 2016 के आलोक में ही नक्शा पास किया जाना चाहिए. इस मंतव्य की सूचना पूर्व में ही रांची नगर निगम को मिल चुकी थी. आनन- फानन में रांची नगर निगम द्वारा 14 जुलाई 2020 को आलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का प्रस्तावित नक्शा, जो भूइंहरी जमीन का था, उसे स्वीकृत किया. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2021/12/bhh1-1-750x536.jpg"

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पूर्व नगर आयुक्त मनोज कुमार, टाउन प्लानर गजानंद व अरुण कुमार के समय हुआ नक्शा पास

प्राप्त सूचना के अनुसार, भूइंहरी जमीन पर नक्शा पास करने के दैरान नगर आयुक्त के पद पर मनोज कुमार, टाउन प्लानर के पद पर गजानंद और विधि शाखा में अरुण पदस्थापित थे. इन्होंने नियमों को ताक पर रखते हुए आलम हॉस्पिटल का नक्शा स्वीकृत किया.

क्या कहते हैं रांची नगर निगम के पूर्व टाउन प्लानर गजानंद

भूइंहरी जमीन पर बिल्डिंग बायलॉज 2016 को ताक पर रख कर नक्शा अप्रूव करने को लेकर किये गये सवाल के जबाव में रांची नगर निगम के पूर्व टाउन प्लानर गजानंद ने कहा, टाउन प्लानर की जिम्मेवारी नक्शा के तकनीकी पक्ष को देखना होता है. भूमि संबंधी दस्तावेज की जांच का जिम्मा विधि शाखा के अरुण की थी. वह अभी भी निगम की विधि शाखा में पदस्थापित हैं. रांची नगर निगम ने भूइंहरी जमीन पर एप्लिकेशन नंबर आरएमसी/बीपी/0597/w09/2019 को 14 जुलाई 2020 की शाम 7:35 नक्शा स्वीकृत किया, जिसका बिल्डिंग प्लान 14 जुलाई 2023 तक प्रभावी है. रांची नगर निगम ने मेमो नंबर आरएमसी/ बीपी/ 1568 / w09/ 2019 को 19 फरवरी 2021 को शाम 5 बजकर 15 मिनट पर जारी किया. इस पूरे मामले में पूर्व नगर आयुक्त मनोज कुमार को फोन कर पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.

क्या है भूइंहरी जमीन का इतिहास

दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में 2482 मौजा में भूइंहरी जमीन फैली हुई है. भूइंहरी जमीन के मालिक वे परिवार हैं, जिनके पूर्वजों ने जंगल साफ कर जमीन को आबाद किया और खेती लायक बनाया. साथ ही गांव को बसाया है. जब अंग्रेज इन इलाकों में आये, तब उन्होंने यहां की सभी जमीन को जमींदारों की जमीन समझने की भूल की. इसके विरुद्ध भूइंहरी गांवों में संघर्ष और विद्रोह तेज हो गया. यह संघर्ष जमींदारों, अंग्रेजों और भूइंहरी परिवारों के बीच चलने लगा. इलाका अशांत हो गया. इसके उपरांत अंग्रेजों ने सन 1869 में एक कानून बनाया, जिसे छोटानागपुर टेन्योर एक्ट के रूप में जाना जाता है. और यह कानून 1869 में 2482 भूइंहरी मौजा के लिए लागू किया गया. छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट 1908 में भी भूइंहरी अधिकार को बनाये रखा गया. और इस जमीन की खरीद- बिक्री पर रोक लगायी गयी. इस जमीन पर भूइंहरी परिवार सिर्फ अपने सगे-संबंधियों को बसा सकते थे, लेकिन उनका भी सीमित अधिकार ही था. इस जमीन का सरकार द्वारा लगान रसीद नहीं काटी जाती है.

भूमि सुधार कानून 1954 आने के समय भी विद्रोह सुलगा

भूमि सुधार कानून 1954 लागू करने के समय भी इलाके में विद्रोह की स्थिति बनी. इसके बाद भूइंहरी जमीन को भूमि सुधार कानून से अलग रखा गया. यह जमीन सरकार में निहित नहीं है. सरकार इस जमीन का दाखिल-खारिज नहीं कर सकती और न ही रसीद काट सकती है.

उपायुक्त का परमिशन लेने पर भी सीमित अधिकार

भूइंहरी जमीन का हस्तांतरण आदिवासियों के बीच भी नहीं हो सकता, न ही हस्तांतरण की कोई नियमावली बनी हुई है. सीएनटी एक्ट की धारा 48 में भूइंहरी जमीन की बिक्री पर रोक लगी हुई है. भूइंहरी जमीन अगर कोई व्यक्ति उपायुक्त की स्वीकृति के बाद विशेष प्रयोजन से लेता भी है, तो इसके बाद भी भूइंहरी जमीन की प्रजा (उपायुक्त के परमिशन से जिसे मिला है) का उस जमीन पर सीमित अधिकार है. इस जमीन का प्रजा खरीद -बिक्री नहीं कर सकती. चूंकि उपायुक्त के परमिशन से विशेष कार्य के लिए भूइंहरी जमीन ली गयी है, ऐसे में अगर वह उस कार्य को नहीं करता, तब उस व्यक्ति का अधिकार स्वत: खत्म हो जाता है. इस जमीन की किसी भी सूरत में खरीद -बिक्री नहीं की जा सकती. इसे भी पढ़ें – मॉब">https://lagatar.in/to-stop-mob-lynching-jharkhand-mob-violence-and-prevention-of-mob-lynching-bill-2021-passed-from-the-house/">मॉब

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