Ranchi News : दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ के दौरान दूसरे राज्यों में पढ़ाई और काम करने वाले झारखंड लौटते हैं. वहीं झारखंड से कुछ लोग दूसरे राज्य जाते हैं. त्योहारों के समय रांची, धनबाद और जमशेदपुर से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है. इसके बावजूद इन रूटों पर पर्याप्त स्पेशल ट्रेनें नहीं चलने से यात्रियों को टिकट के लिए परेशानी उठानी पड़ती है.
झारखंड रेलवे के लिए कमाई का बड़ा केंद्र है. धनबाद रेल मंडल से वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 24,964 करोड़ रुपये की कमाई हुई. वहीं, वित्तीय वर्ष 2023-24 में धनबाद मंडल ने माल ढुलाई से करीब 16,790.83 करोड़ रुपये कमाए थे. यह देश के सबसे ज्यादा माल ढुलाई राजस्व वाले रेल मंडलों में शामिल रहा है.
चक्रधरपुर रेल मंडल भी रेलवे के लिए महत्वपूर्ण है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंडल ने यात्री ट्रैफिक से करीब 2,533 करोड़ रुपये की कमाई की. इस दौरान करीब 184.15 लाख यात्रियों ने सफर किया. यानी झारखंड के रेल मंडल रेलवे को बड़ी कमाई दे रहे हैं, लेकिन त्योहारों के समय यात्रियों को उसी अनुपात में सुविधा मिलती नजर नहीं आ रही है.
सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हो रही है, जिन्हें त्योहारों में अपने घर लौटना है. टिकट की बुकिंग खुलते ही कई ट्रेनों में सीटें तेजी से भर जा रही हैं. वेटिंग बढ़ने के कारण यात्रियों को या तो महंगे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं या फिर यात्रा टालनी पड़ रही है.
झारखंड के यात्रियों की शिकायत सिर्फ स्पेशल ट्रेनों की कमी तक सीमित नहीं है. कई यात्री ट्रेनों के लेट चलने और दूसरी यात्री सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं. यात्रियों का कहना है कि जब झारखंड के रेल मंडल रेलवे के लिए इतना बड़ा राजस्व जुटाते हैं, तो त्योहारों के समय यहां से प्रमुख शहरों के लिए ज्यादा ट्रेनें चलनी चाहिए.
इस बीच जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. झारखंड से 14 लोकसभा सांसद हैं. यात्रियों का सवाल है कि त्योहारों के समय ट्रेनों की कमी, टिकट की समस्या और लंबी वेटिंग को लेकर रेलवे से अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की मांग कितनी मजबूती से उठायी जा रही है.
त्योहारों में घर लौटना झारखंड के लाखों लोगों की जरूरत है. ऐसे में लोगों की मांग है कि रेलवे झारखंड के प्रमुख शहरों से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे जैसे शहरों के लिए पर्याप्त स्पेशल ट्रेनें चलाए, ताकि यात्रियों को टिकट के लिए मारामारी न करनी पड़े.
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