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पास्का पर्व नवीनता, आशा और ईश्वरीय प्रेम का संदेश देता है : अनिमा टोप्पो

Ranchi : पास्का पर्व जिसे ईस्टर भी कहा जाता है. कैथोलिक चर्च के अनुसार मसीही विश्वासियों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. इस पर्व की तैयारी चालीसा के प्रथम दिन. राख बुधवार से आरंभ होती है. जहां ख्रीस्त विश्वासी पुरोहित के माध्यम से अपने माथे पर राख से क्रूस का चिन्ह बनाकर चालीसा काल में प्रवेश करते हैं. चालीसा का पुण्य काल हमें प्रार्थना, उपवास, भिक्षा दान, त्याग-तपस्या, परोपकार, परहेज और परोपकार के कार्य करने के अनेक अवसर प्रदान करता है. इसके माध्यम से हम ख्रीस्त विश्वासी ईश्वर से पूरी तरह से जुड़ जाते हैं. पवित्र ग्रंथ बाइबल हमें यह सिखाता है कि हमें किसी भी बात की चिंता नहीं करनी है, बल्कि हर जरूरत में प्रार्थना करनी चाहिए, विनय और कृतज्ञता के साथ ईश्वर के समक्ष धन्यवाद देना चाहिए.

पास्का के रहस्य

जब हम पास्का पर्व मनाते हैं तो हम पास्का के रहस्यों को जानते हैं. कैसे यीशु मसीह ने मानव कल्याण के लिए दुख सहा, कोड़ो की मार सही, क्रूस की यातनाएं सही और अपनी मृत्यु से पहले सभी को उनकी गलतियों के लिए दिल से माफ किया. लेकिन अपनी मृत्यु के तीसरे दिन यीशु मुर्दों में से पुनर्जीवित हुये. यीशु ने मृत्यु पर विजय प्राप्त किया. इसलिए यीशु का पुनरुत्थान हमारे विश्वास का केंद्र बिंदु है और हमारी पूरी आस्था इसी पर आधारित है. अतः मसीही विश्वासी प्रभु यीशु के पुनरुत्थान को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. हम भी अपने जीवन में दुःख-तकलीफ, कठिनाई, दुर्घटना, दुविधा, चिंता और चुप्पी जैसी पीड़ाओं से गुजरते हैं. इस समय में हमें यह याद रखना चाहिए कि ज़रूर पुण्य शुक्रवार और पुण्य शनिवार के समान ये हमारे लिए पीड़ादायक है. ऐसे कठिन समय में भी, हमें विश्वास रखना चाहिए, हर दुख तकलीफ के बाद ही नए जीवन की शुरुआत होती है. दुख, भोग और मरण के बाद ही पुनरुथान होता है. हमारे जीवन में भी बुरे वक्त के बाद उल्लास और खुशियों का पास्का का दिन आएगा. हमारा जीवन केवल दुखों से भरा नहीं है, बल्कि उसमें खुशियों की सुबह भी होती है और हमारे मन के अंधेरे में उम्मीद की किरण का भी उदय होता है.

पास्का पर्व ईसाईयों के लिए नवीनता और आशा का संदेश देता है

यह पर्व यीशु मसीह के पुनरुत्थान की घटना को याद करता है. जो ईसाई धर्म में जीवन की जीत और मृत्यु पर विजय का प्रतीक है. यह विश्वासियों को याद दिलाता है कि जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद, आशा और नया जीवन संभव है. पास्का के समय, ईसाई अपने बपतिस्मा के प्रतिज्ञाओं को नवीनीकृत करते हैं और ईश्वर के साथ अपने संबंध को मजबूत करते हैं. साथ ही यीशु के साथ रहने और उसके आदर्शों पर चलते हुए हम पुनर्जीवित प्रभु के सच्चे साक्षी बनते हैं. यह पर्व सभी भक्तों को ईश्वर के प्रति अपनी आस्था और प्रेम को फिर से पुष्ट करने का अवसर देता है. इस तरह पास्का पर्व ईसाईयों को उनके विश्वास के मूल सिद्धांतों की याद दिलाता है और उन्हें आध्यात्मिक रूप से नवीनीकृत करता है. इसे भी पढ़ें : गांडेय">https://lagatar.in/bjp-made-dilip-kumar-verma-its-candidate-in-gandey-by-election/">गांडेय

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