Giridih: गिरिडीह : (Giridih) – जिले की खूबसूरती में वन संपदा चार चांद लगाती है. अब इसकी खूबसूरती पर ग्रहण लगने लगा है. वन विभाग के कार्यालय में फोरेस्टर, रेंजर और वनरक्षियों की कमी है. कुल मिला जुलाकर वन विभाग भगवान भरोसे चल रहा है. जिले के विभिन्न हिस्सों में वनों की चोरी-छिपे कटाई भी बदस्तूर जारी है. पहाड़ों पर अवैध उत्खनन भी धड़ल्ले से किए जा रहे हैं. जिले में वन विभाग दो प्रमंडलों पूर्वी और पश्चिमी में बंटा है. दोनों प्रमंडलों में अधिकारियों व कर्मियों की कमी है. एक अधिकारी को दूसरे रेंज का अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है. एक लाख तीस हजार हेक्टेयर में फैला है जंगल वन विभाग के अनुसार गिरिडीह जिले में एक लाख तीस हजार हेक्टेयर में जंगल क्षेत्र फैला हुआ है. पूर्वी वन प्रमंडल में खुरचुटा वन प्रक्षेत्र, गावां, पारसनाथ, गिरिडीह और डुमरी वन प्रक्षेत्र है. वहीं पश्चिमी वन प्रमंडल में डोरंडा, जमुआ, धनवार, बेंगाबाद, बगोदर और सरिया वन प्रक्षेत्र शामिल है. दोनों ही प्रमंडल के जंगलों में साल, शीशम, गम्हार, लिप्टस, सखुआ, महुआ समेत अन्य पेड़ हैं. वन क्षेत्र और उससे सटे पहाड़ियों में काला, सफेद, माइका, ढ़ीबरा, सॉफस्टोन, क्वार्टज, बैरल कीमती पत्थरों का खजाना छुपा है. विभाग में अधिकारियों व कर्मियों के पद रिक्त रहने से पत्थरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. फोरेस्टर के 35, रेंजर के 8 और वनरक्षी के 107 पद खाली जिला में 36 वन परिसर कार्यालय है. जिसमें केवल एक फोरेस्टर कार्यरत हैं. शेष 35 वन परिसर कार्यालय वनरक्षी के प्रभार में है. जिले में 11 रेंज कार्यालय है. जिसमें केवल तीन स्थाई रेंजर पदस्थापित हैं. बाकी आठ रेंज कार्यालय प्रभारी के बदौलत चल रहा है. जिले में 239 वनरक्षी के स्थान पर केवल 133 वनरक्षी पदस्थापित हैं. 107 वनरक्षी के पद रिक्त हैं. वन विभाग अधिकारियों के अनुसार वर्ष 1989 से वनपाल और वर्ष 1993 से रेंजर की सीधी बहाली नहीं हुई है. वनरक्षियों को वनपाल के पद पर प्रोन्नति देने का विभाग ने प्रावधान बनाया है, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है. उदासीनता पर उठ रहे सवाल भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य राजेश यादव ने कहा कि जिले में वन संपदाओं पर खतरा मंडरा रहा है. इसे बचाने को लेकर वन विभाग गंभीर नहीं है. यही वजह है कि दिनोदिन जंगल कम होते जा रहे हैं. पर्यावरण रक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार अभियान चलाकर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है. इस अभियान से हासिल कुछ नहीं हो रहा है. डीएफओ भी जता रहे लाचारी पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ प्रवेश अग्रवाल के अनुसार अधिकारियों की कमी के कारण कामकाज में परेशानी हो रही है. विभाग में अधिकारियों की बहाली को लेकर उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है. वन संपदाओं की सुरक्षा अहम है. सिर्फ वन विभाग के भरोसे वन संपदाओं को नहीं बचाया जा सकता. इसके लिए वन सुरक्षा समिति और स्थानीय लोगों को भी आगे आना पड़ेगा. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=366195&action=edit">यह
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गिरिडीह की हरियाली पर लगने लगा है ग्रहण

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