इको विकास समिति का अहम योगदान
इन वादियों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए इको विकास समिति लगातार प्रयासरत रहा है. इस समिति में गांव के ही भोले-भोले आदिवासी महिला-पुरुष शामिल हैं. जो इस क्षेत्र में साफ-सफाई से लेकर रास्तों को सुगम बनाने में लगे रहते हैं. इको विकास समिति का गठन होने के बाद इस पर्यटक स्थल में काफी बदलाव आया है. बरसात के दिनों में अक्सर पेड़ों के गिर जाने अथवा मिट्टी कटकर सीढ़ीओ पर आ जाने के बाद ये रास्ते कठिन हो जाते थे. इन्हें यहां गठित इको विकास समिति के सदस्य ही दुबारा दुरुस्त करने का कार्य करते हैं. इसके लिए इन्हें कोई भी मानदेय या पारिश्रमिक नहीं मिलता. यहां कार्य करने वाले 25 से 30 सदस्य सिर्फ यहां आने वाले पर्यटकों से मिलने वाले सहयोग राशि से ही अपना गुजर बसर करते हैं.रविवार को रास्तों को सुगम किया
रविवार को इको विकास समिति के सदस्य लोध फॉल तक जाने वाले सीढ़ियों में गिरे हुए पेड़ और मिट्टी के मलबों को साफ करते हुए दिखाई पड़े. यही नहीं इन क्षेत्रों में प्लास्टिक व कूड़े-कचड़ों को भी इनके द्वारा साफ किया गया. हो सकता है कुछ लोगों को इनकी मेहनत दिखाई ना देती हो और इनका सहयोग करना उचित ना समझते हो, लेकिन प्रत्येक दिन क्षेत्र की सुंदरता को बनाए रखने के लिए ये प्रयासरत रहते हैं. इको समिति ने प्रति पर्यटक निर्धारित दस रुपये का शुल्क अवश्य देने की अपील की. ताकि इन्हें उस राशि से पारिश्रमिक दिया जा सके. इसे भी पढ़ें : 17">https://lagatar.in/babulal-will-take-out-sankalp-yatra-in-7-phases-from-august-17-will-conclude-on-october-10-at-morhabadi-maidan/">17अगस्त से 7 चरणों में बाबूलाल निकालेंगे संकल्प यात्रा, 10 अक्टूबर को मोरहाबादी मैदान में होगा समापन [wpse_comments_template]
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