तीन दशकों में सबसे उच्च स्तर पर थोक महंगाई दर
आपको बता दें कि नवंबर में भारत में थोक महंगाई दर 14.23 फीसदी थी. इससे पहले अक्टूबर में यह 12.54 फीसदी रही थी. वहीं सितंबर में होलसेल प्राइस इंडेक्स 10.66 फीसदी रही थी. इससे पहले नवंबर 2020 में यह 2.29 फीसदी था. लगातार आठवें महीने में थोक महंगाई 10 फीसदी से अधिक है. थोक महंगाई का आंकड़ा तीन दशकों के सबसे उच्च स्तर पर है. वहीं अप्रैल 1992 में यह 13.8 फीसदी थी. 1992 की तुलना में अभी थोक महंगाई दर 30 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. इसे भी पढ़े : सनी">https://lagatar.in/sunny-leones-new-song-madhuban-embroiled-in-controversy-accused-of-hurting-hinduism/">सनीलियोनी का नया गाना ‘मधुबन’ विवादों में फंसा, हिंदू धर्म को आहत करने का आरोप
नयी लहर के संकट के समय यह चिंताजनक
भारत में थोक महंगाई का आंकड़ा अर्थशास्त्रियों को परेशान कर रही है. थोक महंगाई के चिंताजनक स्तर के पीछे का कारण सप्लाई है. यह देश की इकोनॉमी के लिए अच्छी नहीं है. खासकर तब जब भारत के सामने महामारी की नयी लहर का संकट मंड़रा रहा है.आने वाले महीनों में और बढ़ेगी खुदरा महंगाई दर
भारत में खुदरा महंगाई दर अभी 4.9 फीसदी पर है. यह रिजर्व बैंक के दायरे में है. भारत में खुदरा महंगाई भले ही रिजर्व बैंक के दायरे में है. लेकिन यह अपर बैंड के करीब है. जिस तरह से थोक महंगाई रिकॉर्ड हाई पर है. आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई दर चरम पर पहुंच सकता है. इसे भी पढ़े : मुठभेड़">https://lagatar.in/encounter-took-place-with-jjmp-maoist-papers-recovered-is-there-any-sign-of-alliance-between-the-two-organizations/">मुठभेड़हुई JJMP के साथ, बरामद हुए माओवादी पर्चा, कहीं दोनों संगठनों में गठजोड़ के संकेत तो नहीं!
सभी प्रमुख देशों में महंगाई ऐतिहासिक स्तर पर
सभी प्रमुख देशों में महंगाई ऐतिहासिक स्तर पर है. अमेरिका में पिछले महीने महंगाई दर 6.8 फीसदी रही. जो करीब 40 साल बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. ब्रिटेन में महंगाई एक दशक के उच्च स्तर 4.2 फीसदी पर है. फ्रांस की भी लगभग यही स्थिति है. यहां महंगाई दर 3.4 फीसदी रही. पिछले महीने जापान में भी थोक महंगाई 40 साल के हाई पर पहुंच गयी. यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी जर्मनी में पिछले महीने महंगाई 5.2 फीसदी के साथ 29 साल के हाई पर रही. इसे भी पढ़े : सरायकेला">https://lagatar.in/post-mortem-of-dead-bodies-is-closed-in-seraikela-for-seven-days-now-being-done-in-jamshedpur-mgm-college/">सरायकेलामें सात दिनों से बंद है शवों का पोस्टमार्टम, अब जमशेदपुर एमजीएम कॉलेज में हो रहा
आरबीआई आने वाले दिनों में बढ़ायेगा ब्याज दर
सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड पब्लिक फाइनेंस के इकोनॉमिस्ट डॉ सुधांशु कुमार ने बताया कि भारत में बढ़ती महंगाई के लिए सिर्फ सप्लाई-डिमांड का बैलेंस बिगड़ना जिम्मेदार नहीं है. बल्कि क्रूड ऑयल समेत अन्य बहुत सारे कारण है. सुधांशु कुमार ने कहा कि अमेरिका समेत विकसित देशों में महंगाई ऐतिहासिक स्तर पर है. इसका असर बहुत जल्द भारत में भी देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि आरबीआई अगर ब्याज दर बढ़ाता है तो इसका खामियाजा भी आम लोगों ही भरना पड़ेगा. ब्याज दर बढ़ने से उनपर ईएमआई का बोझ बढ जायेगा.सभी चीजों के दामों में होगा इजाफा
इक्वायरस इकोनॉमिस्ट अनीथा रंगन ने कहा कि आरबीआई के एकोमोडेटिव स्टांस के लिए इंफ्लेशन सबसे बड़ा रिस्क है. अभी तक खुदरा महंगाई बहुत नहीं बढ़ी है क्योंकि इसमें फूड बास्केट का हिस्सा अधिक होता है. हालांकि खाने-पीने के सामानों के बेस इफेक्ट में रिवर्सल दिखने लगा है. चूंकि थोक महंगाई चरम पर है. अगले साल मार्च-अप्रैल में खुदरा महंगाई छह फीसदी के दायरे को पार कर लेगी. यह स्थिति पूरे वित्त वर्ष 2022-23 में बनी रह सकती है. इसका परिणाम होगा कि प्रोड्यूसर्स कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होंगे और इसका बोझ आम लोगों की जेबों पर पड़ेगा. इसे भी पढ़े : लोहरदगा:">https://lagatar.in/lohardaga-villager-killed-in-ied-blast-in-serengdag/">लोहरदगा:सेरेंगदाग में IED ब्लास्ट में ग्रामीण की मौत,पहले भी हुई हैं घटनाएं [wpse_comments_template]
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