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इडी ने ग्रामीण विकास विभाग मे कमीशनखोरी के आरोप में JE सुरेश वर्मा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया

Ranchi: प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने ग्रामीण विकास विभाग में कमीशनखोरी के मामले में जूनियर इंजीनियर (JE) सुरेश वर्मा के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दायर कर दिया है. इडी ने ग्रामीण विकास में कमीशनखोरी की जांच जमशेदपुर में सुरेश वर्मा के खिलाफ दर्ज करायी गयी प्राथमिकी को इसीआइआर के रूप में दर्ज कर शुरू की थी. 
 
ग्रामीण विकास में कमीशनखोरी के मामले में इडी द्वारा दायर किया जाने वाला यह चौथा आरोप पत्र है. कमीशनखोरी के इस मामले मे इडी द्वारा आरोपित किया जाने वाला यह 14 वां व्यक्ति है. कमीशनखोरी के इस मामले में ग्रामीण विकास के तत्कालीन मंत्री सहित आठ लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. साथ ही ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर मूल्य का तान प्रतिशत कमीशन के तौर पर वसूले जाने और इसके बंटवारे के प्रमाण मिले हैं.
 
 
ग्रामीण विकास विभाग में कमीशनखोरी और मनी लाउंड्रिंग के मामले की जांच के दौरान इडी द्वारा 38 करोड़ रुपये नकद जब्त किया जा चुका है. इसमें से 32.20 करोड़ रुपये तत्कालीन मंत्री आलमगीरी आलम के करीबी जहांगीर आलम के घर से जब्त किया गया था. इसके अलावा 1.65 करोड़ रुपये के ज़ेवरात और आठ मंहगी गाड़ियों को जब्त किया गया था.
 
कमीशनखोरी की रकम की मनी लाउंड्रिंग के मामले में तीन स्थायी जब्ती आदेश जारी किया जा चुका है. इन आदेशों के सहारे 44 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति इडी ने जब्त की है. इसके अलावा आठ लक्जरी गाड़ियां भी जब्त की जा चुकी है.
 
वर्ष 2019 में एसीबी जमशेदुपर ने सुरेश वर्मा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. इसमें उस पर ठेकेदार से बकाया बिल भुगतान करने के लिए 10 हज़ार रुपये घूस लेने का आरोप था. जूनियर इंजीनियर को घूस लेते गिरफ़्तार करने के बाद उसके घर की तलाशी के दौरान 2.67 करोड़ रुपये जब्त किये गये थे. जूनियर इंजीनियर के घर से भारी नकदी की बरामदगी की सूचना के बाद आयकर विभाग की टीम वहां पहुंची थी. लेकिन निगरानी ने आयकर विभाग के अधिकारियों को जांच पड़ताल में शामिल नहीं किया था.
 
आयकर विभाग ने निगरानी के अधिकारियो के इस रवैये की शिकायत की थी. निगरानी ने 10 हजार रुपये घूस लेने के इस मामले की जांच के बाद जूनियर इंजीनियर सुरेश वर्मा के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दायर किया. हालांकि उसके घर के पहली मंजिल के कमरे से बरामद 2.67 करोड़ रुपये के स्रोत के सिलसिले में जांच जारी रखा. इडी ने इसी प्राथमिकी को इसीआइआर के रूप में दर्ज करने के बाद ग्रामीण विकास विभाग मे कमीशनखोरी और मनी लाउंड्रिंग के मामले की जाँच शुरू की.
 
इडी ने जांच के पहले दौर में ही जूनियर इंजीनियर के घर से बरामद नकदी का संबंध मुख्य अभियंता बीरेंद्र राम के होने की पुष्टि की. इसके बाद बीरेंद्र राम के ठिकानों पर छापा मारा. बीरेंद्र राम से हुई पूछताछ के दौरान विभाग में कमीशनखोरी और उसमें विभिन्न लोगों की हिस्सेदारी की जानकारी मिली. बीरेंद्र राम की जांच के दौरान ही दिल्ली के हवाला कारोबारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा मनी लाउंड्रिंग में मदद की जानकारी मिली.
 
बीरेद्र राम द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर इडी ने वर्ष 2024 में ग्रामीण विकास मंत्री अलामगीर आलम के आप्त सचिव लाल, करीबी जहांगीर आलम सहित अन्य के ठिकानों पर छापा मारा. इस में जहांगीर आलम के घर से 32.20 करोड़ रुपये नकद जब्त किये गये.
 

ग्रामीण विकास में कमीशनखोरी और मनी लाउंड्रिंग में आरोपितों का ब्योरा

  • बीरेंद्र राम, मुख्य अभियंता ग्रामीण विकास
  • आलोक रंजन, बीरेंद्र राम का रिश्तेदार
  • राज कुमारी, बीरेंद्र राम की पत्नी
  • गेंदा राम, बीरेंद्र राम के पिता
  • मुकेश मित्तल, दिल्ली का चार्टर्ड अकाउंटेंट
  • तारा चंद, फर्जी आइडी के सहारे कंपनी खोल कर मनी लाउंड्रिग करने वाला
  • नीरज मित्तल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
  • राम प्रकाश भाटिया, फर्जी कंपनी से मनी लाउंड्रिग करने वाला
  • हृदय नंद तिवारी, हवाला कारोबारी
  • हरीश यादव,  हवाला कारोबारी
  • अलमगीर आलम, तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री
  • संजीव कुमार लाल, मंत्री का आप्त सचिव
  • जहांगीर आलम, मंत्री व आप्त सचिव का करीबी
  • सुरेश वर्मा, जूनियर इंजीनियर ग्रामीण विकास

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