Ranchi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड राज्य कॉपरेटिव बैंक में हुए 50 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के दौरान बैंक से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे हैं. बैंक के सरायकेला स्थित ब्रांच में हुए इस घोटाले की प्रारंभिक जांच के बाद व्यापारी संजय कुमार डालमिया और बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी.
ईडी ने इस बैंक घोटाले की जांच के लिए ECIR दर्ज किया था. इसमें सरायकेला कॉपरेटिव बैंक में हुए घोटाले के सिलसिले में दर्ज दो प्राथमिकी को शामिल किया गया था. ईडी ने मामले की जांच दौरान सरायकेला बैंक के प्रबंधक को पत्र लिखकर मामले से जुड़े दस्तावेज की मांग की है. इसमें बैक से कर्ज की स्वीकृति से संबंधित फाइलें, डालमिया को कर्ज स्वीकृत करने के लिए हुए आंतरिक पत्राचार सहित अन्य दस्तावेज शामिल है.
ईडी ने Loan Account नंबर 1037501559,1037501561, 1037501562 सहित कर्ज से जुड़े अन्य कई खातों से संबंधित ब्योरे की मांग की है. इन खातों के विस्तृत ब्योरे के अलावा कर्ज लेने के लिए बैंक को दिये गये आवेदन, स्वीकृति आदेश, कर्ज स्वीकृत करने वाले अधिकारी का नाम, कर्ज से संबंधित एकरारनामा और कर्ज लेने के लिए गारंटी के रूप में दिया गये दस्तावेज की कॉपी भी मांगी गयी है.
ईडी ने बैंक से संजय डालमिया द्वारा गारंटी के तौर पर दिये गये बीमा से संबंधित सर्टिफिकेट, कर्ज के लिए गारंटी के तौर पर रखी गयी चीजों के मूल्यांकन से संबंधित दस्तावेज और थर्ड पार्टी अंडरटेकिंग से संबंधित दस्तावेज की मांग की है. इसके अलावा ईडी कर्ज के नाम पर गड़बड़ी करने के लिए इस्तेमाल किये गये संदेहास्पद बैंक खातों का ब्योरा भी मांगा है.
संदेहास्पद बैंक खातों के दायरे में मेसर्स पिंटू इंजीनियरिंग, मेसर्स एसकेएम इंफ्रा वेचर, सौरभ इंजीनियरिंग, बिलियन मिश्रा ज्वाइंट वेंचर, सचिंद्र गोप आदि से जुड़े अकाउंट शामिल हैं. ईडी ने इन बैंक खातों को खोलने के समय इस्तेमाल किये गये दस्तावेज या बाद में KYC से संबंधित दस्तावेज की भी मांग की है. ईडी ने सरायकेला बैंक के मैनेजर से व्यापारी संजय कुमार डालमिया को दिये गये Cash Credit Loan का ब्योरा भी मांगा है. इसमें डालमिया को स्वीकृत किये गये एक करोड़ रूपये के Cash Credit Loan को बाद में बढ़ाकर 4.50 करोड़ रुपये करने से संबंधित दस्तावेज और इसे स्वीकृत करने वाले अधिकारियों का ब्योरा मांगा है.
ईडी ने बैंक में हुए घोटाले की सूचना मिलने के बाद विभाग द्वारा करायी गयी जांच से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी है. जिसमें सुनील कुमार, मनसा राम महतो, मनीष देवगम, मदन लाल प्रजापति, विरेंद्र कुमार सवैया,शंकर बंदोपाध्याय, संदीप जैन, लाल मंजूनाथ शाहदेव और राजेश्वर नाथ को दोषी पाया गया था. इसके अलावा ऑडिट रिपोर्ट, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया या नाबार्ड के इंस्पेक्शन रिपोर्ट की भी मांग की गयी है.
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