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Education News : सरकारी कॉलेजों में सीटों पर कैंची, निजी संस्थानों की राह पर धकेले जाएंगे छात्र

Ranchi : झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर छात्रों के अंदर असंतुष्टि देखने को मिल है. राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में स्नातक स्तर की सीटों में बड़े पैमाने पर कटौती किए जाने है. छात्रों का कहना है कि सीटें कम होने से हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा और उन्हें मजबूर होकर निजी शिक्षण संस्थानों का रुख करना पड़ेगा.

 

हाल ही में सामने आए रांची विश्वविद्यालय के रियलाइनमेंट (Realignment) दस्तावेज के अनुसार कई कॉलेजों में विभिन्न विषयों की सीटें पहले की तुलना में काफी कम कर दी गई हैं. उदाहरण के तौर पर डोरंडा कॉलेज में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, सांख्यिकी, लाइफ साइंस, भूगोल सहित कई विषयों में प्रवेश क्षमता घटाई गई है.बीसीए (सेल्फ फाइनेंस) में भी सीटें 420 से घटाकर 120 किए जाने का उल्लेख दस्तावेज में है. कुल स्वीकृत शिक्षकों के पदों में थोड़ी बदलाव देखी जा रही है.

 

राज्य के कई अंगीभूत कॉलेजों में विषयवार सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक कटौती की गई है.मारवाड़ी कॉलेज में कई विषयों की सीटें 180 से घटाकर 90 और 360 से घटाकर 120 की गई हैं.संत जेवियर्स कॉलेज, गोस्सनर कॉलेज, निर्मला कॉलेज, उर्सुलाइन कॉलेज और डोरंडा कॉलेज सहित अन्य संस्थानों में भी विभिन्न विषयों की सीटों में कमी दर्ज की गई है.कई विभागों में पहले जहां 240 या 360 सीटें थीं, उन्हें घटाकर 120 या 180 कर दिया गया है.

 

साथ ही बीआईटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत सीटों की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है.इसपर लगातार मीडिया से वार्ता कर छात्रों और छात्र नेताओं ने बताया कि सरकारी कॉलेजों में सीटें कम किए जाने से बड़ी संख्या में छात्र प्रवेश से वंचित होंगे और उन्हें मजबूरी में महंगे निजी कॉलेजों में दाखिला लेना पड़ेगा. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा. उनका कहना है कि यह प्रक्रिया उच्च शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली होती जा रही है.

 

छात्र संगठनों ने कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि कई कॉलेजों में सीमित सीटों के बावजूद सैकड़ों छात्रों से आवेदन शुल्क लिया जाता है. उदाहरण के तौर पर यदि 125 सीटें हैं तो 700-800 छात्रों से आवेदन लिए जाते हैं, लेकिन प्रवेश केवल सीमित छात्रों का होता है. ऐसे में बाकी छात्रों का आवेदन शुल्क वापस नहीं होता, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.


इस पूरे मामले पर एनएसयूआई छात्र नेता विश्वजीत सिंह ने कहा कि सरकार का दायित्व छात्रों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाना है, लेकिन इसके उलट सरकारी कॉलेजों में सीटें लगातार कम की जा रही हैं.उन्होंने कहा, हजारों छात्र किसी एक विषय में आवेदन करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण केवल कुछ सौ छात्रों को ही प्रवेश मिल पाता है. 

 

बाकी छात्रों का समय, पैसा और भविष्य प्रभावित होता है. जो छात्र सरकारी कॉलेजों में दाखिला नहीं ले पाते, उन्हें मजबूरी में महंगे निजी कॉलेजों का रुख करना पड़ता है. शिक्षा, जो समाज को आगे बढ़ाने का माध्यम होनी चाहिए, आज कई जगह कमाई का साधन बनती जा रही है.

 

विश्वजीत सिंह ने कहा कि वे झारखंड के सभी छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को भी घेरे में लेते ही सवाल उठाये कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी आवाज क्यों नहीं उठ रही है? उनके अनुसार यदि शिक्षा और युवाओं का भविष्य प्राथमिकता नहीं है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.अगर उदाहरण के तौर पर हम कुछ कॉलेजों की सीट देखें तो वो इस प्रकार है. 

 

मारवाड़ी कॉलेज (सीटें घटीं)

विषय   पहले   अब
वाणिज्य 1800 540
बीबीए 900 240
बीसीए 900 660
केमिस्ट्री   110 60
फिजिक्स 110 60
गणित 165 120
प्लांट साइंस 165 120
जूलॉजी 44  60
एंथ्रोपोलॉजी 44 120
सांख्यिकी  66 120
साइकोलॉजी 110 120
लाइफ साइंस 110 120
हिंदी   165   240
उर्दू   165 240
बंगला  132 240

 

 

डोरंडा कॉलेज (सीटें घटीं

विषय      पहले अब
फिजिक्स 240  120
केमिस्ट्री 240 120
मैथ्स   360 120
स्टैटिस्टिक्स 120 60
लाइफ साइंस 360 180
जियोलॉजी 120 120
जियोग्राफी   360 180
ईवीएस   120 60
हिंदी 200 60
अंग्रेजी 150 60
पॉलिटिकल साइंस  250 180
सोशियोलॉजी  100 60
उर्दू 100  60
कॉमर्स  250 180

                      

     

 जे.एन. कॉलेज, धुर्वा

 

विषय   पहले   अब
हिस्ट्री 360 240
पॉलिटिकल साइंस 360 240
साइकोलॉजी   120  60
हिंदी  240 120
अंग्रेजी  240 120

                     

                          
       एस.एस. मेमोरियल कॉलेज

 

विषय     पहले   अब
जियोग्राफी  240      240    
हिस्ट्री 480   420
पॉलिटिकल साइंस 480 420
सोशियोलॉजी 240 180
हिंदी   360     360    
अंग्रेजी     360 360
बंगला   360 360
कॉमर्स   200   240

                   

                  
                         
 रामलखन सिंह यादव कॉलेज

 

विषय   पहले अब
जियोग्राफी  240  240
हिस्ट्री 480 420
पॉलिटिकल साइंस  480 420
सोशियोलॉजी  240 180
हिंदी 360 360
अंग्रेजी   360 360
उर्दू   240   60
कॉमर्स   200   240
फ्रेंच    0 60
जर्मन 0 60

                         

                    
                           
               
                   
                           
                      
                           
                        
                             
                               

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