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शिक्षाविदों ने कहा,12वीं के सिलेबस से निराला की कविता हटना दुर्भाग्यपूर्ण

Ranchi: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 2023-24 सेशन से 12वीं के हिंदी पुस्तक से सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता गीत गाने दो मुझे तो... सिलेबस से हटा दिया है. जिसे लेकर कोई विरोध कर रहे है, तो कोई इसके समर्थन में हैं. हिंदी के साथ कई विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है. कुछ हिंदी के विद्वानों का मानना है कि हिंदी के महान रचनाकार की कविताओं को हटाना नहीं चाहिए. इन जैसे विद्वानों से ही हिंदी की समृद्धि हुई है.

जिन महान रचानाकारों के कारण हिन्दी इतनी समृद्ध हुई है, उन्हें ही सिलेबस से हटा देना आश्चर्यजनक: डॉ. मुकुंद

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के हिंदी के सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकुंद रविदास ने कहा कि जिन महान रचानाकारों के कारण हिन्दी इतनी समृद्ध हुई है, उन्हें ही सिलेबस से हटा देना आश्चर्यजनक है . निराला जैसे महान रचनाकार की कविता को कैसे कोई हटा सकता है ? अगर उनकी ही कोई दूसरी रचना को रखा जाता तो अलग बात थी. परंतु जो किया गया है वो चिंतनीय है. सम्पूर्ण हिन्दी जगत के अध्ययनार्थियों को इससे निराशा हुई है .

महत्वपूर्ण रचनाकारों की कविताओं को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण : दीपक ठाकुर

पहाड़ी लड़की कविता संग्रह के लेखक सह पीएचडी शोधार्थी दीपक ठाकुर ने कहा कि महत्वपूर्ण रचनाकारों की कविताओं को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है . परंतु यदि सिर्फ निराला जी की कविता "गीत गाने दो" का जिक्र करें तो मेरी समझ यह कहती है कि उसे बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहिए . उच्च कक्षाओं के लिए ही वह सही है. सामान्य कक्षाओं में उस कविता की सकारात्मक व्याख्या करना मुश्किल है, और उस सकारात्मक व्याख्या को बच्चे सकारात्मक तरीके से लें ये भी चुनौतीपूर्ण है. इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-in-the-surprise-inspection-of-deputy-commissioner-many-employees-of-itda-were-found-missing-during-duty-hours/">जमशेदपुर

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