जिन महान रचानाकारों के कारण हिन्दी इतनी समृद्ध हुई है, उन्हें ही सिलेबस से हटा देना आश्चर्यजनक: डॉ. मुकुंद
बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के हिंदी के सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकुंद रविदास ने कहा कि जिन महान रचानाकारों के कारण हिन्दी इतनी समृद्ध हुई है, उन्हें ही सिलेबस से हटा देना आश्चर्यजनक है . निराला जैसे महान रचनाकार की कविता को कैसे कोई हटा सकता है ? अगर उनकी ही कोई दूसरी रचना को रखा जाता तो अलग बात थी. परंतु जो किया गया है वो चिंतनीय है. सम्पूर्ण हिन्दी जगत के अध्ययनार्थियों को इससे निराशा हुई है .महत्वपूर्ण रचनाकारों की कविताओं को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण : दीपक ठाकुर
पहाड़ी लड़की कविता संग्रह के लेखक सह पीएचडी शोधार्थी दीपक ठाकुर ने कहा कि महत्वपूर्ण रचनाकारों की कविताओं को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है . परंतु यदि सिर्फ निराला जी की कविता "गीत गाने दो" का जिक्र करें तो मेरी समझ यह कहती है कि उसे बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहिए . उच्च कक्षाओं के लिए ही वह सही है. सामान्य कक्षाओं में उस कविता की सकारात्मक व्याख्या करना मुश्किल है, और उस सकारात्मक व्याख्या को बच्चे सकारात्मक तरीके से लें ये भी चुनौतीपूर्ण है. इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-in-the-surprise-inspection-of-deputy-commissioner-many-employees-of-itda-were-found-missing-during-duty-hours/">जमशेदपुर: उपायुक्त के औचक निरीक्षण में ड्यूटी आवर में गायब मिले आईटीडीए के कई कर्मचारी [wpse_comments_template]

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