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अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से नागपुरी लोक संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास

Ranchi: आधुनिकता की चकाचौंध में विलुप्त हो रही झारखंड की लोककला सादरी नागपुरी के संरक्षण को लेकर गुमला प्रखंड के ग्राम टैंसेरा में संचालित एशियन हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा क्षेत्र के युवक-युवतियों को लोक संगीत का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह प्रयास एशियन हेरिटेज फाउंडेशन के प्रमुख प्रभु साहू द्वारा किया जा रहा है. सादरी नागपुरी कौशल एवं प्रतिभा विकास कार्यक्रम के माध्यम से प्रभु साहू युवक-युवतियों को सिखाने का काम कर रहे हैं. वर्तमान में 8 से 45 साल की आयुवर्ग के करीब 65 युवक-युवतियां नागपुरी लोक गीत व वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. प्रभु साहू बताते हैं कि आज के दौरा में शादी-ब्याह से लेकर विभिन्न समारोहों में आधुनिकता हावी हो गई है, और नागपुरी संस्कृति गौण होती जा रही है. इसे पढ़ें-जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-karnataka-scored-300-runs-thanks-to-devdutts-114-runs-got-a-lead-of-36-runs/">जमशेदपुर

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यही कारण है कि नागपुरी लोक, संस्कृति को जीवित रखने एवं इससे भावी पीढ़ी को जोड़े रखने के लिए उन्होंने एशियन हेरिटेज फाउंडेशन का गठन किया है. इसके तहत नागपुरी गीतों के अलावे नागपुरी वाद्य यंत्र मांदर, हारमोनियम, नाल, जिप्सी, पैड व बांसुरी बजाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रभु आगे बताते हैं कि इस प्रयास में उन्हें अडाणी फाउंडेशन का भरपूर सहयोग मिल रहा है. अडाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडाणी की सराहना करते हुए प्रभु साहु ने कहा कि डॉ. प्रीति को कला और संस्कृति के प्रति गहरा लगाव है, और यही वजह है कि झारखंड की लोककला को संरक्षित करने का प्रस्ताव उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से एशियन हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा चलाया जा रहा यह कार्यक्रम अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है. इसे भी पढ़ें-रांची">https://lagatar.in/engineers-and-supervisors-of-ranchi-smart-city-used-to-steal-government-camera-batteries-caught/">रांची

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साहु ने कहा कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों से काफी युवा नागपुरी संगीत सिखने को उत्सुक हैं और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देकर पारंगत बनाने का प्रयास हो रहा है. उनके यहां प्रशिक्षण पाकर कई युवक-युवतियों को स्थानीय म्यूजिक एलबम में काम करने का मौका भी मिला है, और वह सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हैं. साहु सिर्फ सादरी नागपुरी लोक-कला के प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी योजना सादरी नागपुरी साहित्य को लिपीबद्ध करने की भी है. नागपुरी लोक संगीत के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है. [wpse_comments_template]

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