- इमाम जामा मस्जिद जैप 1 डोरंडा और डोरंडा ईदगाह के मौलाना सैय्यद शाह अल्कमा शिबली कादरी
Ranchi : रमजान शरीफ के रोजे के मुकम्मल होने पर अल्लाह की तरफ से इनाम के तौर पर जो उपहार मिला है, वो ईद है. रमजान के पूरे माह में जिस तरह हमने आपने आप को बुरे कामों से बचाया और अल्लाह की इबादत की, उसी तरह रमजान माह के खत्म होने के बाद भी हमें चाहिए कि बुरे कामों से तौबा करें और अल्लाह की इबादत करें. जरूरतमंदों की मदद करें. जिस तरह हमने रमजान के माह में जरूरतमंद लोगों की मदद की, हमेशा यह कोशिश हो कि किसी का अपने जानिब से दिल न दुखे. ईद के मौके पर हमें सिर्फ अपने बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि अपने आस-पड़ोस में भी ये देखना चाहिए कि कोई गरीब-यतीम है, तो उसके घर भी ईद कैसे मने. उसकी भरपूर मदद करनी चाहिए, ताकि उसके घर भी ईद अच्छे से मने. असल ईद यही है. गरीबों की मदद करें और बुराई से बचें. पूरी जिंदगी नेक काम में गुजारें. अपने बच्चों को दीनी और दुनियावी दोनों तालीम जरूर दें. बच्चों को अगर आप अच्छी तालीम देंगे, तो अपना माशरा अच्छा होगा. युवा बुराई की तरफ नहीं जाएंगे. आज के नौजवान नशे की लत में फंस चुके हैं और अपना ईमान, शरीर और समाज सब खराब कर रहे हैं. इसे रोकने की दिशा में हमें मिल कर काम करना होगा, ताकि बच्चों को बर्बाद होने ने बचाया जा सके. हमें अपने आसपास नजर रखने की जरूरत है. जो भी युवा असामाजिक कार्यों में लगे हैं उन्हें अच्छे कामों की तरफ लाएं. उन्हें सही और गलत का फर्क बताएं, ताकि ऐसे लोग अपने कौम को बदनाम न कर पाएं. हम सभी लोगों के साथ मिलजुल कर रहें, चाहे वो मुस्लिम हों या गैर मुस्लिम हों. आपसी भाईचारा समाज में कायम रखें. इसी में अपना, समाज और राज्य एवं देश का भला होगा. राज्य और मुल्क के विकास में अपना पूरा सहयोग दें. आपसी मोहब्बत कायम रहे, जरूरतमंदों की भरपूर मदद करें, यही असल ईमान है और यही असल ईद का तोहफा है. [wpse_comments_template]
Leave a Comment