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चुनाव रणक्षेत्र : मेरे मामा जरूर आएंगे... बहार लाएंगे

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Ghatshila : चाकुलिया के मेम क्लब के पास एक बरगद के वृक्ष के नीचे पुटूश और अमोरी फूलों की माला पहने जमुरे पश्चिम दिशा की ओर टुकुर - टुकुर ताक रहा था. और तभी उस्ताद आ पहुंचे. उस्ताद बोले. अरे जमुरे बचवा! चुनाव के मौसम में तुम मुंह लटकाए अकेले चुपचाप काहे बैठे हो? प्रचार प्रसार में नहीं जा रहे हो क्या? तुम्हारे विरोधी लोग जमकर प्रचार कर रहे हैं. चुनाव रण क्षेत्र में घूम घूम कर ताल ठोक रहे हैं. ऐसे में भला कैसे होगा? जमुरे बोला. गुरु! फिलहाल कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. अपनों ने मुंह मोड़ लिया है. सब हमसे दूरे दूरे भाग रहे हैं. कोई बात भी नहीं कर रहा है. जमुरे बोला. गुरु! अब संकट की इस घड़ी में मामा नाम केवलम जप के सिवाय मेरे पास दूसरा कोई चारा नहीं है. इसलिए गुरु हम अपने मामा का इंतजार कर रहा हूं. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु:">https://lagatar.in/kiriburu-three-clusters-have-been-made-to-run-44-booths-in-gua/">किरीबुरु:

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मेरे मामा आएंगे जरूर आएंगे और ........ बहार लाएंगे. मेरे मामा ही कोई चमत्कार कर सकते हैं. जमुरे बोला गुरु! मेरे मामा चमत्कारी हैं. उनके हाथ में जादू की छड़ी है. उनके पास सभी प्रकार के मंत्र हैं. मेरे मामा तो संकट मोचक हैं. एक बार मेरे मामा आ जाएं. फिर देखिएगा गुरु कैसा चमत्कार होगा? गुरु! मैं चुनाव रण क्षेत्र में गर्दा उड़ा दूंगा. विरोधी लोग सटक सीताराम हो जाएंगे. सबकी बोलती बंद हो जाएगी. जमुरे बोला. जानते हैं गुरु मेरे मामा ने कई बार मुझे संकट से उबारा है और इस बार भी उबार लेंगे. जमुरे बोला. अपने उसी चमत्कारी मामा के इंतजार में मैं मेम क्लब के पास सड़क के किनारे बरगद वृक्ष के नीचे बैठा हूं. उस्ताद बोले. तो ठीक है जमुरे तुम अपने मामा का इंतजार करो. मैं चलता हूं. [wpse_comments_template]

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