New Delhi : चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े केंद्र सरकार के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज गुरुवार को सुनवाई हुई. सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 14 मई को तय की है.
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की. कहा कि यह बहुमत की तानाशाही है. सत्ता में आने के बाद हर राजनीतिक दल अपना रुख बदल लेता है. कोर्ट ने इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया.
खबर है कि सुनवाई के के क्रम में प्रशांत भूषण ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को चयन समिति से बाहर रखने वाले नये कानून का विरोध किया. याद दिलाया कि जब लालकृष्ण आडवाणी विपक्ष में थे, तब उन्होंने भी नियुक्ति प्रक्रिया पर कार्यपालिका के पूर्ण नियंत्रण को गलत ठहराया था.
प्रशांत भूषण का तर्क था कि जो भी पार्टी सत्ता पर काबिज होती है.वह अपने फायदे के लिए कानून का इस्तेमाल करती है. वह चुनाव आयोग की स्वतंत्रता भूल जाती है. इस दलील पर जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, यह चुने हुए लोगों की तानाशाही जैसा है. यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.
सतीश चंद शर्मा ने भी इसे बहुमत की तानाशाही करार दिया. कहा कि ऐसा कानून होना चाहिए, जिससे आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो. बता दें कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में चीफ जस्टिस की भूमिका समाप्त करने के केंद्र सरकार के कानून पर रोक लगाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गयी है.
सुप्रीम कोर्ट में आज दूसरे दिन की सुनवाई के क्रम में याचिकाकर्ता ADR की ओर पेश वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि इस कानून पर बहस के समय विपक्ष के ज़्यादातर सदस्यों को सस्पेंड कर दिया गया था. वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने अदालत से कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में हुई है.
हंसारिया ने कहा कि 2024 में नये कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका दाखिल की गयी थी, लेकिन सुनवाई से पहले ही केंद्र सरकार ने तेजी से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली. बताया कि 13 मार्च 2024 को विपक्ष के नेता को 200 नामों की सूची सौंपी गयी.
इसके अगले दिन चयन समिति की बैठक हुई. उसमें ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को चुन लिया गया. हंसारिया का तर्क था कि जब सारी शक्ति एक व्यक्ति के हाथ में दे दी जाती है तो यही होता है. इसी पर जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की कि कि जजों की नियुक्ति में भी ऐसी ही तेजी होनी चाहिए.
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