Lagatar Desk: चुनाव आयोग ने तीन नवंबर को फॉर्म 6 को लेकर जो ताजा आदेश या स्पष्टीकरण दिया है, उसमें एक बार फिर से शब्दों का खेल किया गया है. अब तक आयोग पर जो अविश्वास बन चुका है, जो नुक़सान हो चुका है, उसे नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है. यह बताता है कि SIR की पूरी प्रक्रिया कितनी खराब ढंग से की गई है. यह बात कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक पोस्ट में कहा है.
जयराम रमेश ने तीन प्रमुख बातें की है-
पहली- फॉर्म 6 की घोषणा साफ-साफ पूछती है कि क्या आप “पहली बार वोटर बनने के लिए आवेदन” कर रहे हैं. आयोग का स्पष्टीकरण आया है कि SIR के दौरान पुनः वोटर बनने के लिए आवेदन करने वाले मतदाताओं को भी पहली बार का माना जा सकता है. यह एक और धोखाधड़ी भरा शब्दों का खेल है, जिससे एक दोषपूर्ण प्रक्रिया को ढकने की कोशिश की जा रही है, जिसमें मतदाताओं से झूठी घोषणा करवाई जा रही है.
दूसरी- मतदाताओं से झूठी घोषणा पर हस्ताक्षर करवाने के बाद, ECI अब उन्हें कानूनी परिणामों से सुरक्षा दे रहा है और वह भी बाद में. इससे पता चलता है कि SIR प्रक्रिया कितनी अधूरी सोच के साथ बनाई गई है.
तीसरी- महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने ECI को लिखकर कहा था कि फॉर्म 6 का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इस मुद्दे पर मुकदमा चल रहा है, जहां बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने ECI द्वारा दिए गए तर्क पर सवाल उठाए हैं, जिसमें अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं को छोड़ दिया गया है.
जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा है कि चुनाव आयोग असली समस्या का समाधान नहीं कर पा रहा है. SIR की प्रक्रिया जिस तरह से डिजाईन की गई है, वह वोटर जोड़ने से अधिकार वोटर लिस्ट से नाम काटने वाला है. यह पहले मतदाताओं को हटाता है, फिर उनसे नए मतदाता के रूप में पुनः वोटर बनने के लिए आवेदन करने को कहता है. हमारा मानना है कि कोई भी इस तरह के बचाव का रास्ता SIR की दोषपूर्ण प्रक्रिया को रोक नहीं सकता. इसे रोकना ही एक मात्र विकल्प है.