चुनावी चकल्लस : ए जी, ओ जी, लो जी- सुनो जी, करता हूं जो मैं तुम भी करो जी...
Sanjay Singh जी हां... एगो राष्ट्रीय पार्टी के झारखंडी नेताजी लोगन ए घरी विधानसभा चुनाउवा के टिकटवा हथियावे लगे रांची से दिल्ली तक दौड़ईत-दौड़ईत हांफे लगल हैं. एक-एक गो विधानसभा सीटवा से दु-दु दर्जन नेताजी लोगन टिकट के चाहत में राजधानी के श्रद्धानंद रोड से लेकर नेताजी के घर तक कोड़ डालीन हैं. नवरात्र के बहाने मिठाई के डिब्बा लेले नेताजी लोग अपन-अपन आका के ईहां घुमरी चकईया लगाईले हैं. ए गो नेताजी के देखादेखी दूसरको नेताजी भी उहे ढर्रा पर आगे बढ़ गईल हैं. चमचागिरी दे बेस्ट पॉलिसी वाली नीति अपनाईले नेताजी लोगन के हंफनी देख के पार्टिए के मउराइल नेताजी लोग कांग्रेस ऑफिसवा के बरामदा समिति के आबाद कईले हैं. ईहां खाली टिकट ला छिछिआइत फिर रहे नेताजी लोगन पर ढेरे टीका टिप्पणी हो रहल है. जईसही कोनो टिकटार्थी पर नजर पड़ती है, बरामदा समिति आबाद करेवाला मउराइल नेताजी लोग झट से टिप्पणी ठोक देते हैं. यहां दिन के ग्यारहे बजे से बैठकी चालू हो जाती है. चाय-पान, गुटखा का दौर चलता रहता है. फ्री फोकटिया का जुगाड़ होईए जाता है, कोई न कोई क्लाइंट बरामदा समितिवाला मउराइल नेताजी लोग फंसाइए लेता है. ई लोग पर उहे जुमला ठीक बइठता है, सुबह होती है, शाम होती है, इसी तरह बस जिंदगी तमाम होती है. अब देखिए ई बरामदा समिति के मेंबरान लोग झट से एक-एक कर सभे 81 सीटव पर चर्चा कर डालता है. पंजा लड़वइया नेताजी दफ्तर देने दिखते हीं बरामदा समिति मेंबर लोग ओनिए लपकता है. फिर.. गीत गुनगुनाए लगता है, भाई टिकटार्थी लोग पर तो ई गानवा फिट आउर हिट बइठता है- ए जी, ओ जी, लो जी- सुनो जी, करता हूं जो मैं तुम भी करो जी... वइसे दिन भर बरामदा समिति के मेंबरान चकल्लस कईले रहते हैं. कौन सीट से के जीतेगा, कौन अपना बदौलत जीतेगा, कौन गठबंधन के भरोसे, कौन पंजा के भरोसे, एकरो एनालाइज कर देते हैं. राजधानी की हॉट सीट गठबंधन में केकरा पाले जाएगा, केकरा हाथ मले पड़ेगा, एकरा लेकर खूबे ज्यादा चर्चा बरामदा समिति के मेंबर लोग कईले हैं. एगो मउराईल नेताजी चश्माधारी, गुटखा प्रेमी हैं. एगो टिकटार्थी पर नजर पड़ते हीं दन से कहते हैं, ई हो हऊ दौड़ में रे भाई. तबतक समिति के दूसरे सदस्य कहते हैं- तो का होलऊ...एहो धन्नासेठ हऊ. पइसवा से तो सभे मैनेज कर लतेऊ रे भाई. तबतक टिकटार्थी उनके समिति के सदस्यों के पास पहुंच जाते हैं, पूछते हैं, का हाल चाल है भाई, देखिएगा, तनिका हमरो पर ध्यान दीजिएगा. आपलोग तो जानबे करते हैं, हम केतना एक्टिव रहते हैं. हमेसा सभे के सुख-दुख में शामिल होबे करते हैं, जेकरा जईसन जरूरत वइसने मददो करते हैं. तभी समिति के एक नेताजी टोकते हुए कहते हैं- देखो भाइवा ईहां पैडलवा मारवे से कुछो न भेंटावेवाला है. ऊपरेवाला सेटिंगवा काम आएगा. और भाई आपको तो दिल्ली में गजबे सेटिंग है. ईहां तो बस आपके ही बिरादरीवाले को टिकट मिलेगा, तो पंजवा के बेड़ा पार हो जाएगा. देखिए बॉस ऊपरे धइले रहिए. तबतक समिति के एक अन्य सदस्य बोले लगते हैं, तो टिकटार्थी भइया के हंफनी धर लेता है. बरामदा समितिया के ई नेताजी कहते हैं, देखिए भाई, गठबंधन में लड़ाई होवेगा, तो रांची सीटवा तो गियो. तबरिए देखिए ना झामुमो कैंडिडेट भाजपा के सीपी चचा के पानी पिलाई दीहिस थी. थोड़के सा मार्जिन रह गिया था, नहीं तो सीपी चचा के घोलटाईए देले थी. इसलिए बॉस ई सीटवा तो कांग्रेस के हाथ से गियो. ई तो नहीं मिलेगा. देखिए भाई, कोनो दूसरकी सीटवा पर फोकस कीजिए. बेकारे ईहां गोईंठा में घी सुखाईला के कोनो फायदा न होखे वाले है. फिर क्या था, टिकटार्थी महोदय का मुंह लटक गईस. बेचारे के हंफनी धर लीहिस. लेकिन समिते के ऊ सदस्य के बुझा गिया कि भाई जी परेशान हैं, तो तनिका उनके फेवर में बतियावे लगीन, ताकि शाम वाला भी कुछ जुगाड़ पानी होईए जाए. कहने लगे, देखिए बॉस ई सीटवा पर पंजे का हमेशा से कब्जा रहिस है. अभियो मौहाल हमी लोग के पक्ष में है. बस ऊपरे दिल्लीवाला नेताजी लोगन के विश्वास में लेवे पड़ेगा, तभिए बात बनेगी. न तो हमलोग ईहां बइठ कर के तो कुछो करियो ना सकते हैं. देखिए..बॉस कुछ कहल नहीं जा सकता है. कुछो हो सकता है, तो मुन्ना भाई टाइप के लगले रहिए. लगे हाथ ऊ एगो संस्कृत में ना जाने कउची तो बोले लगे, तानिके सा बुझाया...ऊ नेताजी कह रहिन थे कि नारीयस्य त्रियाचरित्रम, पुरुषस्य भाग्यम कोऊ न जानत भाई जी. एसलिए निगेटिव न होना है. मछरिया के आंखें लेखा निशाना साधले रहे के काम है. [wpse_comments_template]
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