शहरों के साथ गांवों में बिजली की कटौती जारी ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 10 से 12 घंटे ही मिल रही बिजली शहरी क्षेत्रों में औसतन 19 से 21 घंटे ही मिल रही बिजली नहीं शुरू हो पाया पतरातू थर्मल पावर प्लांट गर्मी में बिजली की डिमांड बढ़ कर 2500 से 3000 मेगावाट होने की संभावना Ravi Bharti Ranchi: इस साल भी गर्मी में बिजली रुलाएगी. अभी गर्मी शुरू होते ही 250 से 300 मेगावाट बिजली की कमी होने लगी है. ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है. जबकि शहरी क्षेत्रों में 19 से 21 घंटे ही बिजली मिल रही है. गर्मी में बिजली की डिमांड बढ़ कर 2500 से 3000 मेगावाट होने की संभावना जताई गई है. वित्तीय वर्ष 2014-15 में पीक ऑवर में (शाम छह बजे से रात 10 बजे तक) 86 मेगावाट कमी थी. जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में यही कमी बढ़ कर 535 मेगावाट हो गई है. झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने केंद्र सरकार के पावर एक्सचेंज से 300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग की है. इसके लिए पत्राचार भी किया गया है. पावर एक्सचेंज से बिजली नहीं मिल पा रही है. बिजली न मिलने की वजह से सुबह व शाम के समय रांची, जमशेदपुर, गढ़वा, पलामू, चाईबासा आदि जगहों पर प्रतिदिन बिजली की कटौती की जा रही है.
पतरातू पावर प्लांट से अब तक उत्पादन शुरू नहीं हुआ
बता दें कि पतरातू पावर प्लांट से अब तक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है. 2019 में ही पतरातू प्लांट से उत्पादन शुरू होना था, लेकिन 2024 अप्रैल में भी उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है. जानकारी के अनुसार अब जुलाई से उत्पादन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. पतरातू पावर प्लांट 4000 मेगावाट का है. इस पावर प्लांट से 85 फीसदी बिजली मिलेगी. वहीं नॉर्थ कर्णपुरा पावर प्लांट के दो यूनिट से बिजली मिलनी शुरू हो गयी है. वहीं गोड्डा स्थित अडाणी पावर से 1600 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है. इससे उत्पादित सारी बिजली बांग्लादेश भेज दी जाती है. हालांकि शर्तों के अनुसार, अडाणी झारखंड को 400 मेगावाट बिजली देने पर सहमत हैं. इसके लिए भी पीपीए की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है.झारखंड के पावर प्लांट की क्षमता 6200 मेगावाट, पर बिजली 1300 मेगावाट
झारखंड में में स्थापित पावर प्लांटों की क्षमता 6200 मेगावाट है. जबकि इन प्लांटों से 1300 मेगावाट बिजली ही मिल पाती है. बरसात के मौसम में ही 1600 मेगावाट बिजली मिल पाती है. इसका कारण है कि पूरी क्षमता से पावर प्लांटों से उत्पादन नहीं होता है. गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ कर 2500 से तीन हजार मेगावाट तक हो जाती है. इस मांग की पूर्ति के लिए बिजली खरीदनी पड़ती है. झारखंड में स्थित पावर प्लांट से कितनी मिलती है बिजली पावर प्लांट कितनी मेगावाट मिलती है बिजली टीवीएनएल 380 मेगावाट इनलैंड पावर 63 मेगावाट सिकिदिरी हाइडल 130 मेगावाट आधुनिक पावर 180 मेगावाट केटीपीएस(डीवीसी) 600 (डीवीसी कमांड एरिया) एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा 170 मेगावाट पंचेत हाइडल(डीवीसी) 00 पावर प्लांट प्लांट क्षमता (मेगावाट) राज्य को कितनी बिजली सीटीपीएस (डीवीसी) 500 00 मेगावाट बीटीपीएस(डीवीसी) 500 00 मेगावाट एमपीएल धनबाद 1050 150 मेगावाट अडाणी पावर गोड्डा 1600 00 मेगावाट सोलर 80 80 मेगावाट टाटा पावर कमांड एरिया के लिए जोजेबेड़ा (टाटा पावर) 469 टाटा स्टील के माध्यम से जमशेदपुर को मिलती है बिजली किस पावर प्लांटों से कितनी खरीदी जाएगी एनटीपीसी प्लांट का नाम मेगावाट फरक्का वन और टू 119.35 फरक्का थ्री 59.71 कहलगांव वन 18.34 तालचर 66.68 कहलगांव टू 10.21 बाढ़ वन 84.72 बाढ़ टू 18.97 कोरबा 50.00 दारीपल्ली वन 151.43 नॉर्थ कर्णपुरा 177.46 नॉर्थ कर्णपुरा न्यू 150.00 कांटी 16.10 नबीनगर 33.96 एनएचपीसी रंगीत 7.42 तीस्ता 48.34 पीटीसी चुक्का 27.99 ताला 116.89 कुरिचू 0.55 मांगडेटू 9.44 डीवीसी केटीपीएस 600 टीटीपीएस 420 आधुनिक 189 सोलर सेकी वन 450 सेकी टू 10 स्टेट आइपीपी 16 विंड एनर्जी पीटीसी 200 सेकी 100 इंलैंड पावर 63 सिकिदिरी 130 साल दर साल पीक ऑवर में बिजली की डिमांड कितनी रहा, कितनी कमी वित्तीय वर्ष डिमांड कितनी कमी 2014-15 1850 68 2015-16 1970 143 2016-17 2051 118 2017-18 2113 119 2018-19 2169 -41 2019-20 1396 07 2020-21 1619 53 2021-22 2358 281 2022-23 2636 514 2023-24 2715 535 वर्जनबिजली कटौती करने के एवज में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वर्तमान टैरिफ में दो फीसदी का पेनॉल्टी लगायी है. शहरी क्षेत्र में 23 घंटा और ग्रामीण क्षेत्र में 22 घंटा बिजली देना अनिवार्य है. जितना घंटा कम बिजली मिलेगी, उतना उपभोक्ता के फिक्स चार्ज कम लिए जाने का प्रावधान है. वितरण निगम को हर हाल में नियमों का पालन करना अनिवार्य है. अतुल कुमार, सदस्य तकनीक, झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग
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