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हाथी- घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की, चहुंओर हरे रामा-हरे कृष्‍णा की गूंज…

Ranchi : हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की, मदन गोपाल की...हजारीबाग बाल गोपाल के जन्मोत्सव में डूब गया है. श्रद्धालु कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम, तो कहीं चित्र प्रदर्शनी लगाकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के आनंद में विभोर हैं. कहीं बालरूप सज्जा प्रतियोगिता, तो कहीं राधाकृष्ण नृत्य का कार्यक्रम चल रहा है. दरअसल कोरोना के कारण दो वर्षों बाद मंदिरों और पंडालों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इससे श्रद्धालुओं में इस त्योहार को लेकर उल्लास और उमंग छाया हुआ है. उत्साह से लोग पूजनोत्सव में भाग ले रहे हैं. बड़ा अखाड़ा ठाकुरबाड़ी में 20 अगस्त को मनेगी जन्माष्टमी   बाडम बाजार रोड स्थित बड़ा अखाड़ा ठाकुरबाड़ी में पांच दिवसीय झूलनोत्सव कार्यक्रम का समापन हो चुका है. यहां 20 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी. बड़ा अखाड़ा ठाकुरबाड़ी में भगवान को सजाया-संवारा जा रहा है. उनकी रूप सज्जा की जा रही है. इससे पहले 19 अगस्त को यहां रूद्राभिषेक कार्यक्रम किया जा रहा है. बड़ा अखाड़ा के महंत विजयानंद दास और पुजारी आनंदी बाबा ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाने की पूरी तैयारी है. श्रद्धालु शनिवार की मध्यरात्रि जुटेंगे और भक्तिभाव से पूजन में भाग लेंगे. फिर प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होगा. [caption id="attachment_392779" align="alignnone" width="811"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/WhatsApp-Image-2022-08-18-at-10.33.11-PM-811x815.jpeg"

alt="" width="811" height="815" /> हाथी- घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की[/caption] पंचमंदिर में झूलन कार्यक्रम शहर के पंचमंदिर में भी जन्माष्टमी की धूम है. यहां बंशीधर की पूजा-अर्चना की जा रही है. यहां उनका जन्मोत्सव खास तरीके से मनाया जाएगा. शुक्रवार की शाम से जन्मोत्सव कार्यक्रम शुरू हो जाएगा. मध्यरात्रि लड्डू गोपाल के जन्म के बाद झूलनोत्सव होगा. यहां महिला श्रद्धालु भी काफी संख्या में उमड़ेंगे राधाकृष्ण मंदिर मथुरानगर ग्वालटोली में उल्लास राधाकृष्ण मंदिर मथुरानगर ग्वालटोली के भक्तों में उल्लास छाया हुआ है. यहां शुक्रवार को भक्तिभाव से राधाकृष्ण की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की जाएगी. इसके लिए राधाकृष्ण प्रतिमा  की साज-सज्जा कर कर्षक बना दिया गया है. मुख्य पुजारी अजय पांडेय ने बताया कि यहां भगवान के जन्म से पहले भजन-कीर्तन और जन्म के बाद झूलनोत्सव कार्यक्रम होगा. फिर प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होगा. मधुबन में बाल रूप में मन मोह रहे कन्हैया और राधा रवींद्र पथ स्थित मधुबन में श्रीराधाकृष्ण सेवा संस्थान की ओर से कार्यक्रम कराए जा रहे हैं. इनमें बाल रूप में राधा-कृष्ण लोगों का मन मोह रहे हैं. संस्थान के सचिव अर्जुन यादव ने बताया कि यहां चित्र प्रदर्शनी लगाई गई है और श्रीराधाकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता भी कराई जा रही है. बच्चे माखनचोर और बाला राधा के वेश में गीत, संगीत और नृत्य में भाग ले रहे हैं. चहुंओर उल्लास और भक्तिभाव का वातावरण है. शुक्रवार की रात यहां भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मटवारी कृष्णापुरी में विराजेंगे श्रीकृष्ण मटवारी स्थित कृष्णापुरी में भक्तिभाव से जन्माष्टमी मनाई जाएगी. दो वर्षों से कोरोना के कारण यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम बंद थे. इस वर्ष भी सादगी से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा समिति कृष्णापुरी के सदस्य सुधीर कुमार यादव ने बताया कि यहां बाल गोपाल की प्रतिमा और भगवान का फोटो रखकर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे. साथ ही  भजन-कीर्तन करेंगे. नेशनल पब्लिक स्कूल में श्रीराधाकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता शहर के न्यू एरिया स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल में जन्माष्टमी की धूम रही. यहां श्रीराधाकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता में नन्हे बच्चों ने अपनी अदाओं से मन मोह लिया. अलग-अलग आयु वर्ग में बंटकर बच्चों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया. बच्चों ने बंशीधर के वेश में अपनी अदाकारी से उपस्थित लोगों को आत्मविभोर कर दिया. बड़ा अखाड़ा बंशीधर मंदिर ईचाक में पूजे जाएंगे कन्हैया : ईचाक स्थित बड़ा अखाड़ा अतिप्राचीन बंशीधर मंदिर में कन्हैया की पूजा-अर्चना होगी. पदमा राजा सपरिवार यहां पूजा-अर्चना के लिए आते थे. यही उनके कुलदेवता भी थे. यहां बंशीधर की विशेष पूजा-अर्चना होती है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/WhatsApp-Image-2022-08-18-at-10.12.53-PM-360x323.jpeg"

alt="" width="360" height="323" /> रामगढ़ के राधा-रानी मंदिर में 1940 से मनाया जा रहा कृष्ण जन्मोत्सव रामगढ़ जिले के मंदिरों को सजाया रहा है. शहर के सबसे ऊंचे स्थान पर राधा रानी किला मंदिर है. स्थानीय लोगों के अनुसार,  कृष्ण जन्यमोत्हांसव यहां 1940 से मनाया जा रहा है. इस दिन मंदिर परिसर को  विशेष कर दूधिया रोशनी से सजाया जाता है. रात में बाल गोपाल को  स्नान कराकर सुंदर वस्त्र धारण करा झूला झुलाया जाता है और उनका प्रिय भोग अर्पित कर प्रसाद वितरित किया जाता है. स्थानीय लोग जन्माष्टमी पर उपवास कर मंदिर में कीर्तन और पूजा-पाठ कर भगवान से मिन्नतें मांगते हैं. मान्यता है कि कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा करने से भगवान की कृपा बरसती है और नि:संतानों को कान्हा जैसे सुंदर, प्यारे और ज्ञानी संतान की प्राप्ति होती है. जिले के कई जगहों पर भगवान कृष्ण की झांकियां निकाली जाती हैं. दुमका के बड़ी ठाकुरबाड़ी मंदिर में मारवाड़ी रीति-रिवाज से होगी पूजा दुमका जिले के बासुकीनाथ, बड़ी ठाकुरबाड़ी , शिवपहाड़  और गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.  बड़ी ठाकुरबाड़ी मंदिर में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है. मारवाड़ी रीति-रिवाज से यहां जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. मंदिर के पुजारी परमेश्वर शर्मा ने बताया कि भगवान कृष्ण का भव्य श्रृंगार किया जाता है. झूलनोत्सव की भी तैयारी रहती है. झेले पर भगवान कृष्ण के बाल रूप की फोटो रखी जाती है. श्रद्धालु झुला झुलाते हुए बजन-कीर्तन करते हैं. रात्रि 12 बजे के बाद प्रसाद का वितरण होता है. प्रसाद विशेष तरीके से बनाया जाता है, जिसे पंजीरी कहते हैं. देवघर में विदेशी भक्तों पर भी चढ़ा जन्माष्टमी का खुमार,  हरे रामा- हरे कृष्णा के गुंजायमान हुआ शहर जसीडीह स्थित इस्कॉन मंदिर में चार दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन देवघर बाबानगरी  जन्माष्टमी की रौनक भी देखते ही बन रही है. इस साल विदेशी भक्तों की मौजूदगी से माहौल पहले ही कृष्णमय हो चुका है. जसीडीह स्थित इस्कॉन मंदिर में इस बार चार दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया है,जिसमें शामिल होने के लिए बड़ी तादाद में विदेशी श्रद्धालु  देवघर पहुंच चुके हैं. महोत्सव को लेकर विदेशी श्रद्धालुओं की टोली भजन -कीर्तन करते हुए शहर के तमाम चौक -चौराहों पर पहुंच रही है. शोभा यात्रा के माध्यम से शहर के लोगों को जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होने का न्योता दिया जा रहा है. हरे रामा हरे कृष्णा के भजन गाते और थिरकते विदेशी श्रद्धालुओं को देख शहर के लोग भी खुद को झूमने से नहीं रोक पा रहे हैं. विदेशी श्रद्धालुओं ने बाबा मंदिर में भी भजन -कीर्तन किया.  पूरा शहर भगवान श्रीकृष्ण के रंग में रंग गया है. बता दें कि जसीडीह स्थित इस्कॉन मंदिर में चार दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान श्री कृष्ण लीला पर आधारित कई धार्मिक कार्यक्रम होंगे. पागल बाबा आश्रम में पहुंचने लगे श्रद्धालु जसीडीह स्थित पागल बाबा आश्रम में भी जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. आश्रम में स्थापित अष्ट धातु से बनी श्रीकृष्ण और राधा की मूर्ति  आकर्षण का केंद्र रही है. जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होने के लिए दूरदराज से भक्त पागल बाबा आश्रम पहुंच रहे हैं. कोलकाता से आये भक्त अजय पोद्दार ने बताया कि तकरीबन 5 दशक से आश्रम में जन्माष्टमी पर्व का आयोजन किया जा रहा है. हजारों की तादाद में भक्त यहां पर पहुंचते हैं. देर रात तक श्रद्धालु नाचते- झूमते  भजन गाते हैं. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन शाम 4 बजे शुरू होकर रात 12 बजे तक लगातार ज़ारी रहेगा . इस मौके पर विभिन्न प्रकार के व्यंजन का स्वाद भी श्रद्धालु चखते हैं. पगला बाबा ट्रस्ट द्वारा संचालित विद्यालय के बच्चे भव्य सांस्कितिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. सरायकेला-खरसावां में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा की तैयारी जोरों पर सरायकेला सहित सीनी, खरसावां एवं राजनगर क्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. सरायकेला के श्री कृष्ण मंदिर सहित खरसावां व राजनगर के  मंदिरों एवं कुछ निजी घरों में पूजा अर्चना होगी. सरायकेला प्रखंड के महालिमोरूप के जगन्नाथपुर गांव स्थित मंदिर में पांच दिनों तक श्रीकृष्ण पूजा सहित मेला का भी आयोजन किया जा रहा है. सभी स्थानों पर रात के नौ बजे से पूजा अर्चना प्रारंभ की जाएगी. क्षेत्रीय गौड़ समाज महालिमोरुप के तत्वावधान में सरायकेला के जगन्नाथपुर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सह जन्माष्टमी मेला को लेकर स्थानीय निवासियों में उत्साह है. जगन्नाथपुर के रांगाटांड में श्रीकृष्ण मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है, जहां रात 8:22 बजे से श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पूजा होगी, जो भगवान श्री कृष्ण के जन्म पश्चात देर रात तक चलेगी. क्षेत्रीय गौड़ समाज के अध्यक्ष नीलसेन प्रधान ने बताया श्रीकृष्ण मंदिर परिसर में शाम छह बजे से  बजे पंचायत की मुखिया पानो माहली व थाना प्रभारी द्वारा पूजा पंडाल का उद्घाटन किया जाएगा.  शुक्पांरवार को ही पांच दिवसीय मीनाबाजार व मेला का भी उद्घाटन होगा. मंदिर परिसर में 20 अगस्त को शंख ध्वनि प्रतियोगिता व 21 अगस्त को श्रीकृष्ण भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. जिसमें महिला- पुरुष बच्चे सभी भाग ले सकेंगे. 22 अगस्त की शाम 8 बजे पूजा-अर्चना व आरती के पश्चात भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा का विसर्जन  होगा.  क्षेत्रीय गौड़ समाज के सलाहकार सह सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक शंभूनाथ प्रधान ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण गौड़ समाज के कुलदेवता हैं. भगवान श्री कृष्ण का लालन-पालन नंद जी गौड़ के घर में हुआ यानी भगवान श्री कृष्ण गौड़ जाति के घर में बड़े हुए, इसलिए गौड़ जाति भगवान श्री कृष्ण को कुल देवता के रूप में मानते हैं. बेरमो अनुमंडल के मंदिरों की सजावट की गयी बेरमो अनुमंडल के तेनुघाट स्थित राधेश्वर धाम,  गोमिया के आईइएल काली मंदिर में जन्माष्टमी  की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. मंदिर की साज सज्जा कर दी गयी है.  साड़म,    ललपनिया, स्वांग, कथारा, जारंगडीह, बोकारो थर्मल, फुसरो के बाजारों में  जन्माष्टमी की पूजा सामग्री की बिक्री जोरों पर है. कृष्ण का झूला, माखन मटका, बांसुरी, मोर पंख और मुकुट की  खरीदारी लोग जोरशोर से कर रहे हैं.  आईइएल काली मंदिर के सदस्य जितेंद्र पांडेय उर्फ जीतू पांडेय ने बताया कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी में मंदिरों को सजाया गया है.  धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूरा दिन तो जल ग्रहण करने की छूट होती है, लेकिन सूर्यास्त के बाद से रात 12 बजे तक  भगवान के जन्म  तक जल ग्रहण करना वर्जित होता है. बोकारो के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए मंदिरों की साज-सज्जा बोकारो में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. मंदिरों की साफ सफाई के साथ -साथ रंगविबरंगी लड़ियों और फूलों से आकर्षक साज-सज्जा की गयी है.  सेक्टर 2, सेक्टर 4, सेक्टर वन श्री राम मंदिर, सेक्टर नौ व 12 में भव्य पूजा पंडाल का निर्माण कराया गया है.  बाजारों में श्रीकृष्ण की मूर्तियों और उनके श्रृंगार के सामानों की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गयी है.  मूर्तियों और सामानों की की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के बावजूद खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है. मंदिरों की आकर्षक साज-सज्जा जन्माष्टमी को लेकर कई मंदिरों में कई तरह के कार्यक्रम प्रस्तावित है.  कीर्तन मंडलियों द्वारा भजन कीर्तन का भी आयोजन किया जाएगा.  मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की प्रतिमा भी स्थापित  कर पूजा अर्चना और झूलन कार्यक्रम की तैयारियां की गयी हैं.   मूर्तिकार से लेकर मंदिर के व्यवस्थापक  द्वारा भव्य तैयारियां की गई हैं. पुलिस प्रशासन भी काफी मुस्तैद हैं और कई जगहों पर मजिस्ट्रेट की भी तैनात की जाएंगी. एसपी चंदन झा ने सभी थाना प्रभारियों को गश्कित लगाने और अलर्सीट मोड में रहने का निर्देश दिया है.  लोगों से किसी भी तकर की अफवाह पर ध्यान नहीं देने को कहा गया है. अगर कोई किसी तरह की  अफवाह फैलता है, तो इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को देने के साथ ही साथ पुलिस का सहयोग करने की अपील भी की है. इसे भी पढ़ें : गढ़वा">https://lagatar.in/garhwa-shri-banshidhar-temple-is-at-the-place-of-confluence-of-three-states/">गढ़वा

: तीन राज्‍यों के संगम स्‍थल पर स्थित है श्री बंशीधर मंदिर, सोने से बनी है कृष्‍ण की मूर्ति
चाकुलिया के ठाकुरबाड़ी मंदिर में 110 साल पुरानी है कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया के पुराना बाजार स्थित सत्यनारायण (ठाकुरबाड़ी) मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने का इतिहास 110 साल पुराना है. मंदिर कमेटी और मारवाड़ी महिला समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और शनिवार को नंदोत्सव कार्यक्रम का आयोजन होगा.  इसे लेकर मंदिर की  भव्य तरीके से सजावट की जा रही है.  कोलकाता के कारीगरों द्वारा फूलों का नयनाभिराम श्रृंगार  किया जा रहा है.   फूलों का श्रृंगार और फूलों का बंगला आकर्षण का केंद्र होगा. जमशेदपुर के महावीर अग्रवाल व रोहित गुलाटी भजनों की गंगा बहाएंगे मंदिर कमेटी के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल और सचिव बासुदेव रुंगटा ने बताया कि  शुक्रवार रात नौ  बजे से जमशेदपुर के भजन गायक महावीर अग्रवाल भजनों  की गंगा बहाएंगे. रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मारवाड़ी महिला समिति द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे. जमशेदपुर के भजन गायक रोहित गुलाटी द्वारा भजन एवं बधाई गीत प्रस्तुत किए जाएंगे. इसके बाद सामूहिक आरती  के बाद प्रसाद का वितरण किया जाएगा लातेहार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों को सजाया गया लातेहार जिला मुख्यालय के विभिन्न मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. शहर के थाना चौकस्थित मनोकामना हनुमान मंदिर में  जन्माष्टमी उत्सव भव्य तरीके से मनाया जाएगा. मंदिर में आकर्षक विदद्युतीय साज-सज्जा की गयी है. मंदिर के पुजारी त्रिभुवन पांडेय ने बताया कि शुक्रवार की मध्यरात्रि पूजन प्रारंभ होगा. इससे पहले भजन मंडली  द्वारा श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से संबंधित भजन  प्रस्तुत किए जाएंगे. होटवाग  शिव मंदिर में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां की जा रही है. आयोजन समिति के नागेश्वर यादव ने बताया कि मध्यरात्रि पूजन से पहले टेमकी-पकरार के व्यास कुशेश्वर यादव और उनकी टीम के कलाकारों के द्वारा भजन- कीर्तन किया जायेगा. इसी प्रकार शहर के बीचोबीच ठाकुरबाड़ी में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. मंदिर के पुजारी दिलीप उपाध्याय ने बताया कि मंदिर में स्थापित राधा-कृष्ण की प्रतिमा की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. हालांकि ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा गुरुवारको ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया गया. केंद्र के बाईपास रोड शाखा में बीके अमृता बहन की अगुवाई में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनायी गयी.  मौके पर बाल कृष्ण व राधा के वेश में छोटे-छोटे बच्चों ने आकर्षक छटा बिखेरी. इस अवसर पर बीके राजमणि प्रसाद, नवीन कुमार गुप्ता, सुनीता गुप्ता, आलोका, बिनोद समेत कई लोग उपिस्थत थे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/WhatsApp-Image-2022-08-18-at-10.13.30-PM-750x375.jpeg"

alt="" width="750" height="375" /> इसे भी पढ़ें : गढ़वा:">https://lagatar.in/garhwa-organizing-shri-krishna-roop-decoration-competition-in-the-school/">गढ़वा:

स्कूल में श्रीकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन
ईचाक के  300 साल प्राचीन बंशीधर मंदिर की अलग है पहचान रामगढ़ राज परिवार के हैं कुलदेवता, पदमा राजा के वंशज ने कराया था निर्माण जन्माष्टमी के दिन होती है विशेष पूजा-अर्चना, भोग में चढ़ाया जाता है खीर-पूड़ी बंशीधर स्टेट के नाम से जाना जाता है हजारीबाग, रामगढ़ और चतरा का राजघराना इलाका गौरव प्रकाश हजारीबाग ऐतिहासिक जिला है. यह कभी रामगढ़ राजा की रियासत का हिस्सा हुआ करता था. इस कारण यहां कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहर हैं,  जिनका जिक्र इतिहास के पन्नों में भी है. रामगढ़ राजा रामनारायण सिंह की राजधानी ईचाक थी. लगभग 300 साल पहले राजा ने ईचाक मुख्य बाजार में बंशीधर मंदिर बनाया था, जो आज भी हजारीबाग और आसपास के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र  है. इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है और इसकी अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान है. खासकर जन्माष्टमी के दिन यहां धूमधाम से विशेष पूजा-अर्चना होती है. यहां रामगढ़ राजघराने से जुड़े हजारीबाग, रामगढ़ और चतरा इलाके के लोग विशेष पूजा में भाग लिया करते थे. आज भी यहां हजारों श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में पूजा-अर्चना के लिए जुटते हैं. हजारीबाग, चतरा और रामगढ़ राजपरिवार के इलाके बंशीधर इस्टेट के नाम से प्रसिद्ध है. ईचाक बाजार का विराट सिंह दरवाजा और बंशीधर मंदिर का गौरवशाली इतिहास लगभग तीन सौ वर्ष पुराना है. इसकी स्थापना महाराज बहादुर कामाख्या नारायण सिंह के पूर्वजों ने की थी. वर्तमान में पदमा राजा के वंशज पूजा-अर्चना के लिए यहां आते रहते हैं. फिलहाल मंदिर की देखरेख व पूजा पुरोहित अशोक तिवारी के अलावा स्थानीय लोगों के भरोसे चल रही है. इसे भी पढ़ें : आलमगीर">https://lagatar.in/alamgir-alams-instructions-party-mlas-should-not-go-out-of-jharkhand/">आलमगीर

आलम का निर्देश, झारखंड से बाहर न जाएं पार्टी के विधायक
 सुनाई देती थी बंशी की धुन सुनने के लिए रातभर जागते थे श्रद्धालु बंशीधर मंदिर को लेकर एक किवदंती भी है. बताया जाता है कि रात में भगवान श्रीकृष्ण की बंशी की धुन सुनाई पड़ती थी, जिसे सुनने के लिए राजा, प्रजा व श्रद्धालु रातभर जागते थे. मंदिर के पुजारी अशोक तिवारी बताते हैं कि मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. वर्षों पहले राजा कामख्या नारायण सिंह के पूर्वज सहदेव और बाघ देव यहां शिकार करने आए थे. इसी दौरान राजा को बंशी की धुन सुनाई पड़ती थी. जब भी शिकार करने के लिए ईचाक आते, तो बंशी की मधुर धुन सुनाई पड़ती थी.उसी दौरान  श्री राधा कृष्ण की मूर्ति स्थापित कर बंशीधर मंदिर की स्थापना की गई.  पुजारी की सातवीं पीढ़ी करा रही पूजा, पूरी होती हैं मन्नतें पुजारी अशोक तिवारी ने बताया कि वे लोग सात पीढ़ी से मंदिर में पूजा करते आ रहे हैं. यहां कभी जन्माष्टमी के दिन 36 मन अरवा चावल से तैयार खीर का भोग लगता था, जो दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु प्रसाद के रूप में ग्रहण करते थे. लेकिन धीरे-धीरे राजा के वंशजों ने मंदिर की सुध लेनी बंद कर दी और अब स्थानीय लोग मिलजुल कर पूजा-अर्चना  करते हैं. इस मंदिर की मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे दिल से मन्नतें मांगता है, उसकी मुराद जरूर पूरी होती है. इस वजह से श्रद्धालुओं के मन में इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है. साहिबगंज :  फूलों से मंदिरों की सजावट साहिबगंज ज़िले महाकालेश्वर मंदिर, सत्यनाराण मंदिर और डाकिनाथ मंदिर सहित मोहल्लों और कॉलोनियों में  जन्माष्टमी  की तैयारियां चल रही हैं. मंदिरों को  आकर्षक एलईडी लाइट ओर फूलों से सजाया जा रहा है. इस्कॉन मंदिर में भी बाल गोपाल के अवतरण की तैयारी जोरों पर है. भगवान के लिए महिलाएं फूलों की मालाएं गूथ रही हैं.  जगह-जगह भजन कीर्तन का सिलसिला भी शुरु हो चुका है. गिरिडीह में दक्षिणेश्वर काली मंदिर का प्रारूप दिखेगा गिरिडीह में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाया जाएगा. शहर के बरगंडा, मकतपुर, टॉवर चौक, गांधी चौक,  मोहलीचुवा, हुटटी बाजार समेत कई मुहल्लों में जन्माष्टमी  की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. हुटटी बाजार में यादव महासंघ की ओर से  इस बार कोडरमा सांसद  प्रतिनिधि दिनेश यादव की मां के देहांत के कारण भक्ति जागरण इस वर्ष स्थगित है. मोहलीचुवा में श्रीबजरंग क्लब और जन्माष्टमी पूजा समिति तैयारी में जुटी है. विगत 28 वर्षों से यहां जन्माष्टमी मनाया जाता रहा है. इस वर्ष यहां पूजा पंडाल की थीम कोलकाता स्थित प्रख्यात दक्षिणेश्वर काली मंदिर है. पूजा समिति के सदस्यों के अनुसार शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण की  प्रतिमा स्थापित की जाएगी. 20 अगस्त को  जागरण का आयोजन किया जाएगा. इसे भी पढ़ें : गंभीर">https://lagatar.in/the-jailer-stopped-the-seriously-ill-former-cs-from-taking-him-to-rims-the-court-expressed-displeasure-sought-report-know-the-whole-matter/">गंभीर

रूप से बीमार पूर्व सीएस को जेलर ने रिम्स ले जाने से रोका, कोर्ट ने जताई नाराजगी, मांगी रिपोर्ट, जानिये पूरा मामला
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