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रजरप्पा मंदिर परिसर की सफाई-सफाई पर जोर रामगढ़ की तीन अहम खबरें

Ramgarh : स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शनिवार को यूनिसेफ सहयोगी संस्था डेवनेट द्वारा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर एक दिवसीय स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया. अभियान में संयुक्त सचिव सह संयुक्त निदेशक इंद्रदेव मंडल ने बताया कि रजरप्पा मंदिर झारखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है. यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पूजा करने आते हैं. ऐसे में यह आवश्यक है कि मंदिर परिसर और आसपास की सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित हो, ताकि विभिन्न स्थानों से आने वाले श्रद्धालु मां छिन्नमस्तिके मंदिर रजरप्पा की सफाई की स्थिति को देखकर एक अच्छे विचार के साथ वापस लौटें. कार्यक्रम में डेवनेट संस्था के सचिव अमरेंद्र सिंह ने अभियान की रूपरेखा के बारे में बताया, साथ ही अभियान के उद्देश्यों के संबंध में चर्चा की. कार्यक्रम में यूनिसेफ से आए हुए ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन सलाहकार संजय पांडे ने बताया कि अलग-अलग प्रकार के कचरा के निपटान के लिए कई प्रकार के विकल्प मौजूद हैं. चर्चा के पश्चात अभियान में शामिल सभी सदस्यों के द्वारा भेड़ा नदी तथा दामोदर नदी से प्लास्टिक एकत्रित किया गया, उसके बाद भेड़ा नदी पुल के नीचे जाली लगाया गया, ताकि पानी के साथ बहकर आने वाला कचरा जाली में फंस जाए और सफाई कर्मियों के द्वारा लगातार उसकी सफाई सुनिश्चित की जा सके.

विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल का दो दिवसीय प्रांतस्तरीय कार्यशाला आयोजित

शनिवार को रामगढ़ स्थित मारवाड़ी धर्मशाला के सभागार में बजरंगदल विश्वहिंदू परिषद् प्रांतस्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ जिलाध्यक्ष आलोक रत्न चौधरी ने किया. संगठन की इस दो दिवसीय बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में बजरंग दल के राष्ट्रीय सह संयोजक सूर्यनारायण राव सहित प्रांत के कई बड़े पदाधिकारी मंचस्थ हुए. इस कार्यशाला में झारखंड के सभी प्रांतों से उपस्थित हुए दर्जनों पदाधिकारियों का हौसला बढ़ाते हुए बजरंगदल के राष्ट्रीय सह संयोजक सूर्यनारायण राव ने कहा कि हमारी संस्कृति और सभ्यता साढ़े चार हजार साल पुरानी है, जो विश्व भर की सभी सभ्यताओं से हजारों वर्ष पुरानी मानी जाती है. जब कहीं बिजली, कंप्यूटर, टेलिस्कोप,विमान या कैलकुलेटर नहीं हुआ करता था, तब भी हमारे ऋषि मुनियों को खगोलीय ज्ञान और ग्रहों की दूरी का ज्ञान था. हमारे वेद और पुराण में शब्द इसके गवाह हैं. विश्व का सबसे पुराना और हमारी वैदिक ज्ञान का धरोहर कही जाने वाली नालंदा विश्वविद़यालय को मुगलों के द्वारा जलाया गया था, जिसमें रखी लाखों कीमती पुस्तकें कई महीनों तक जलती रही थी. जिससे हमारी वैदिक संस्कृति को नष्ट कर हमें बौद्धिक गुलाम बना सकें. कुछ विदेशी वैज्ञानिक पृथ्वी और सूर्य की दूरी को अपने यंत्रों से नापने पर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं. उसको हमारे गोस्वामी तुलसीदास ने पंद्रहवीं शताब्दी में हीं अपनी स्वरचित हनुमान चालीसा के 18वीं चौपाई में बता दिया था. इसलिए कहता हूं कि जब दुनियां को खाने और रहने का तरीका नहीं आता था, उस वक्त भी हम विश्वगुरु थे. मंचस्थ प्रांत कार्याध्यक्ष तिलक राज मंगलम ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज आप सभी युवाओं के सहयोग से हमारा संगठन देश के उत्थान में अपना योगदान देने के साथ हीं अपनी सनातन संस्कृति को को संजोए रखने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए हमेशा आगे आ रहे हैं, जिसको दुनिया ने देखा है. उन्होंने कहा कि चाहे मौका देश में फैली महामारी का हो या देश की संस्कृति और आस्था को बचाने का रहा हो. हमारे बजरंगियों ने हर मौके पर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कर मुसीबतों का सामना किया और अपनी जीत हासिल की है.

11वां वेतन समझौता को लेकर कोल माइंस वर्कर्स यूनियन ने की सभा

कोल माइंस वर्कर्स यूनियन द्वारा शनिवार को बिरसा परियोजना कैंटीन में सभा का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता राजेश पासवान व संचालन मधु बाउरी ने किया. बैठक में कोल इंडिया के मजदूरों का लंबित 11वां वेतन समझौता जल्द से जल्द लागू कराने को लेकर मजदूरों को जगाने का कार्य किया गया. सभा को संबोधित करते हुए यूनियन के क्षेत्रीय सचिव डॉ. आशीष कुमार ने कहा कि कोल इंडिया प्रबंधन एवं केंद्र सरकार की ढुलमुल रवैये के कारण कोयला मजदूरों का वेतन समझौता अधर में लटका है. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि अब कोयला मजदूरों को वेतन समझौता के के लिए संघर्ष करने की जरूरत है. कोल इंडिया में हड़ताल करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कोल इंडिया प्रबंधन एवं केंद्र सरकार की मंशा साफ नहीं है. एक साल बीत जाने के बाद भी कई बार मीटिंग हो रही है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया जा रहा है. श्री कुमार ने केंद्र सरकार एवं कोल इंडिया प्रबंधन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कोयला मजदूरों का 11वां वेतन समझौता जल्दी लागू नहीं हुआ तो कोल इंडिया का चक्का जाम कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में कोयला उद्योग को प्राइवेट नहीं होने दिया जाएगा.

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