अप्रैल में 8.2 लाख परिवारों को मिला था रोजगार, दिसंबर में घट कर हो गया आधा राज्य में कुल जॉब कार्ड 5790697, एक्टिव 35,08067, एक्टिव मनरेगा वर्कर 43,03352 Pravin Kumar Ranchi: राज्य सरकार का ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर है. पिछले चार सालों में झारखंड के ग्रामीण परिवारों की रीढ़ के रूप में मनरेगा योजना सामने आयी है. योजना के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों (सार्वजनिक कार्य-संबंधित अकुशल मजदूर) को न्यूनतम मजदूरी पर 100 दिन का रोजगार मिलता है. हर साल लाखों योजनाएं राज्य में पूरी की जाती हैं, इसके बाद भी मनरेगा कभी भी ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का रोजगार देने के करीब नहीं पहुंच पाया. चालू वित्त वर्ष में 60591 परिवारों को ही दिसंबर माह तक 100 दिन रोजगार मिल सका है. इस साल जुलाई माह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना परिषद की बैठक में मनरेगा के तहत जिला कार्यक्रम समन्वयक की जिम्मेवारी जिलों के उपायुक्तों को देने के प्रस्ताव पर सहमति जतायी थी. इससे पूर्व उप विकास आयुक्तों के पास मनरेगा की जिम्मेवारी हुआ करती थी. उपायुक्तों को कार्यक्रम समन्वयक बनाये जाने के बाद से ही से दिनो-दिन मनरेगा से रोजगार सृजन के मामले कम होते जा रहे हैं. मनरेगा योजना में ग्रमीणों को काम नहीं मिल रहा है. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल माह में 1 करोड़ 25 लाख 15 हजार 193 मानव दिवस रोजगार सृजन हुए, जिसमें 8 लाख 20 हजार 192 परिवारों को रोजगार मिल सका. जो दिसंबर माह में घट कर 39 लाख 59 हजार 915 हो गया. इसमें मात्र 4 लाख 09 हजार 629 परिवारों को ही रोजगार मिल सका.
मनरेगा में घट रहे रोजगार, उपायुक्तों को मिली अहम जिम्मेदारी
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