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हौसला : स्कूल में यौन शोषण की शिकार किन्नर ने खुद को संभाला और अपने जैसे दूसरों को भी

Vinit Abha Upadhyay
Ranchi :  जिन विपरीत परिस्थितियों में आम लोग आत्महत्या करने का विचार अपने मन में ले आते हैं, उसी परिस्थिति में एक किन्नर ने न सिर्फ खुद को संभालते हुए नए जीवन की शुरुआत की, बल्कि अपने जैसे सैकड़ों किन्नरों को एकजुट कर उन्हें जीवन जीने की नयी राह और उम्मीद दी. जमशेदपुर की रहने वाली किन्नर अमरजीत का जीवन आम किन्नरों की तरह ही था, लेकिन उसने बधाई मांगकर और ट्रेन के डिब्बों में पैसे मांगने से बेहतर खुद को इस काबिल बनाने पर मेहनत की, जिससे कि उसे दूसरों के सामने हाथ नहीं पसारना पड़े.
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विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसने हार नहीं मानी

अमरजीत जब हाईस्कूल में थी, तब उसका यौन शोषण भी हुआ. यौन शोषण से वह इतनी डर गई कि उसने पढ़ाई छोड़ दी. किसी तरह उसने मैट्रिक तक पढ़ाई पूरी कर पायी. थोड़ी बड़ी हुई तो उसे एहसास हुआ कि वह आम लोगों से अलग है. यह एहसास उसे समाज के लोगों ने ही करवाया. लेकिन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसने हार नहीं मानी.

खुद के साथ 125 से ज्यादा किन्नरों को रोजगार दिलाया

कुछ वर्षों पहले अमरजीत ने किन्नर समुदाय (थर्ड जेंडर) के लिए आवाज बुलंद करने के लिए एक संस्था बनाई. जिसका नाम है उत्थान. कोरोना काल में थर्ड जेंडर को वैक्सीन उपलब्ध कराने, सरकारी कार्यालयों और पब्लिक प्लेस पर थर्ड जेंडर के लिए शौचालय निर्माण समेत उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए कई अधिकारियों की चौखट पर गई. फिलहाल अमरजीत टाटा स्टील में एंबुलेंस ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है. अमरजीत से प्रेरणा पाकर करीब 125 से ज्यादा किन्नरों ने टाटा स्टील में ट्रेनिंग ली और उन्हें भी रोजगार मिला.

26 किन्नरों की पढ़ाई- लिखाई का जिम्मा लिया

उत्थान संस्था ने 26 किन्नरों की पढ़ाई- लिखाई का जिम्मा भी लिया. अमरजीत कहती हैं कि लिंग के आधार पर किसी को जज नहीं करना चाहिए. कई किन्नरों के साथ उनके घर वाले भी अच्छा व्यवहार नहीं करते. मां- बाप, भाई- बहन सड़क पर उनके साथ चलना नहीं चाहते. लोग घर में कुत्ता पालते हैं. उससे प्यार करते हैं. लेकिन किन्नर को जानवर जितना प्यार भी नहीं देते, आखिर क्यों ?
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