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हजारीबाग में लगाया गया विलुप्तप्राय कल्पतरु का पौधा

धार्मिक मान्यता के अनुसार कल्पतरु समुद्र मंथन से हुआ था प्राप्त धार्मिक महत्व के साथ इस पौधे में हैं कई औषधीय गुण पूरे देश भर में 700, झारखंड में रांची समेत कल्पतरू के हैं महज तीन विकसित पेड़ Gaurav Prakash Hazaribagh : धरती से कल्पतरु वृक्ष अब पूरी तरह से गायब होता जा रहा है. आलम यह है कि देश में जहां महज 600-700 पेड़ बचे हैं, वहीं झारखंड की राजधानी रांची में सिर्फ दो पेड़ ही शेष हैं. एक पेड़ जमशेदपुर पुलिस लाइन में है. ऐसे में अब इस दुर्लभ वृक्ष को लगाने की कोशिश की जा रही है. इसी कड़ी में हजारीबाग में भी कल्पतरु वृक्ष का पौधा लगाया गया है. दरअसल पूरे राज्य भर में कल्पतरु वृक्ष को बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. इसी मुहिम के तहत हजारीबाग में भी देव वृक्ष के रूप में जाना जाने वाला कल्पतरू लगाया जा रहा है. इसे भी पढ़ें :इंटक">https://lagatar.in/intuc-removed-latehar-gumla-and-lohardaga-district-president/">इंटक

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जानिए धार्मिक मान्यता

पदमा के पं. परमानंद शर्मा ने बताया कि कल्पतरु के बारे में धार्मिक मान्यता यह है कि समुद्र मंथन के दौरान यह वृक्ष निकला था. कामधेनु जब समुद्र मंथन से प्राप्त हुआ, उसके बाद कल्पतरु वृक्ष निकला था. इस कारण इसका धार्मिक महत्व अधिक है.

कल्पतरू में पाए जाते हैं छह तरह के अमीनो एसिड

कल्पतरू का जहां धार्मिक महत्व है, तो दूसरा इसमें औषधीय गुण भी मौजूद हैं. इस वृक्ष पर अनुसंधान करने वाले विशेषज्ञ डॉ. एम. सिंह बताते हैं कि इसमें छह तरह के अमीनो एसिड पाए जाते हैं. अमीनो एसिड से काफी महंगी दवा बनती है. इस कारण इसका अधिक महत्व है.

जर्मिनेट कर तैयार किया गया है कल्पतरू का पौधा

हजारीबाग की उप विकास आयुक्त ने कल्पतरू समाहरणालय परिसर में लगाया है. वृक्ष लगाने में हजारीबाग राजकीय बीएड कॉलेज के शिक्षक मनोज कुमार का महत्वपूर्ण योगदान है. उन्होंने बताया कि इस पौधा को रांची के गढ़कटंगा नर्सरी में तैयार किया गया है. नर्सरी वन विभाग का है, जहां डोरंडा स्थित कल्पतरु के बीज को जर्मिनेट करके तैयार किया गया. नर्सरी को पांच बीज दिया गया था, उसी में से एक पौधा तैयार हुआ है. शिक्षक मनोज कुमार ने यह भी कहा कि यह पौधा देव तुल्य पौधा है. पौधे को जर्मिनेट कराने में काफी परेशानी होती है. लेकिन जब पौधा एक बार लग जाता है तो फिर यह तैयार हो जाता है. इसे भी पढ़ें :‘शुभम">https://lagatar.in/shubham-sandesh-impact-construction-of-incomplete-bridge-on-liptas-dhoi-river-begins/">‘शुभम

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बालतरू वृक्ष भी विलुप्ति के कगार पर : मनोज

पर्यावरण संरक्षक मनोज कुमार यह भी बताते हैं कि बाल तरु अब विलुप्त होता जा रहा है. ऐसे में लोगों की कोशिश होनी चाहिए कि बाल तरु लगाएं और उसकी सुरक्षा भी करें.

डीडीसी ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में आज नया समाहरणालय परिसर में पौधारोपण अभियान का शुभारंभ उप विकास आयुक्त प्रेरणा ने किया. उप विकास आयुक्त ने कल्पतरू का पौधा लगाकर इसकी शुरुआत की. उन्होंने बताया कि पर्यावरण के संरक्षण व ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणामों से बचाव के लिए हर व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ लगाना चाहिए. जन सहयोग से हजारीबाग के जिला परिषद चौक से विनोबा भावे विश्वविद्यालय तक एनएच के दोनों किनारों में देवतरु पीपल के पौधों का रोपण किया जा रहा है, साथ इन पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड की भी व्यवस्था की जा रही है. [wpse_comments_template]

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