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चप्पल फेंकने के बहाने इंजीनियर मंत्री के आप्त सचिव को 7.5 करोड़ देने के बयान से मुकरा

Ranchi : ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य अभियंता प्रमोद कुमार ने ईडी को ठेकेदारों से कमीशन वसूल कर चुनाव खर्च के लिए 7.5 करोड़ रुपये संजीव लाल को देने की बात स्वीकार की. हालांकि बाद मे वह अपने बयान से यह कहते हुए मुकर गये कि उन्होंने कमीशन वसूलने से इनकार कर दिया था. इसलिए संजीव लाल ने उन पर चप्पल फेंका था. ईडी द्वारा पूछताछ के दौरान इंजीनियरों ने पहली बार पूछताछ के दौरान ठेकेदारों से कमीशन वसूल कर मंत्री के हिस्सेदारी के रूप में 54 करोड़ रुपये देने बात स्वीकार की. हालांकि बाद में इनमें से कई इंजीनियर अपने पहले के बयान से मुकर गये. 

 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ग्रामीण विकास विभाग में कमीशनखोरी की जांच के दौरान मुख्य अभियंता से कनीय अभियंता तक से पूछताछ की और उनका बयान दर्ज किया. पहली बार पूछताछ के दौरान इंजीनियरों ने विभाग में कमीशन वसूले जाने की परंपरा की जानकारी दी. खुद भी कमीशन वसूल कर देने की बात स्वीकार की. हालांकि दूसरी बार पूछताछ के दौरान कई इंजीनियर अपने पहले के बयान से मुकर गये.

 

तत्कालीन मुख्य अभियंता प्रमोद कुमार ने पूछताछ के दौरान ईडी को दिये गये अपने बयान में यह स्वीकार किया था कि पदभार संभालने के बाद मंत्री ने उन्हें अपने आप्त सचिव से मिलने का निर्देश दिया था. इसके बाद वह मंत्री के आप्त सचिव संजीव लाल से मिले. संजीव लाल ने ठेकेदारों से टेंडर मूल्य का तीन प्रतिशत कमीशन वसूलने का निर्देश दिया. उनके कार्यकाल में 350 करोड़ रुपये का 60 टेंडर निकाला गया था. ठेकेदारों से बतौर कमीशन 10.5 करोड़ रुपये की वसूली की गयी. इसमें से 7.5 करोड़ रुपये मंत्री के आप्त सचिव को चुनाव खर्च के लिए दिया गया था. 1.75 करोड़ रुपये खुद (प्रमोद कुमार) रख लिया था. बाकी 1.25 करोड़ रुपये दूसरे अधिकारियों के लिए रखा गया था.

 

हालांकि प्रमोद कुमार दूसरी बार हुई पूछताछ के दौरान अपने पहले के बयान से मुकर गये. दूसरी बार उन्होंने ईडी को दिये गये अपने बयान में कहा कि मंत्री के आप्त सचिव के निर्देश पर उन्होंने ठेकेदारों से कमीशन वसूलने से इनकार कर दिया था. इस वजह से आप्त सचिव संजीव लाल के साथ उनका संबंध अच्छा नहीं रहा था. वह हमेशा उन्हें बेइज्जत करता था. एक बार तो उसने उन पर चप्पल फेका था.

 

ईडी ने ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता सिंगारी टूटी से पूछताछ की. टूटी ने अपने बयान में विभाग में तीन प्रतिशत की दर से कमीशन वसूलने जाने की बात स्वीकार की. उन्होंने ईडी को जानकारी दी कि उनके कार्यकाल में 600 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ था. उनके  निर्देश पर अधीनस्थ इंजीनियरों ने ठेकेदारों से बतौर कमीशन 18 करोड़ रुपये वसूले थे. इसमें से 12 करोड़ रुपये संजीव लाल को दिया गया. यह रकम मंत्री के हिस्से की थी. छह करोड़ रुपये विभागीय अधिकारियों के लिए रखे गये थे. इसमें से करीब 2.5 करोड़ रुपये इनका (टूटी) का हिस्सा था, जो उन्होंने ले लिया था. 

 

हालांकि दूसरी बार पूछताछ के दौरान वह अपना हिस्सा लेने की बात से मुकर गये. दूसरी बार पूछताछ के दौरान उन्होंने कहा कि संजीव लाल ने उनके हिस्से की 2.5 करोड़ रुपये देने का वायदा किया था. लेकिन उसने उन्हें उनके हिस्से की 2.5 करोड़ रुपये नहीं दी. दूसरी बार पूछताछ के दौरार टूटी कमीशन वसूलने और मंत्री के आप्त सचिव के मंत्री के हिस्से की रकम देने की बात से नहीं मुकरे.

 

तत्कालीन मुख्य अभियंता राजीव लोचन ने ईडी को दिये गये बयान में कहा कि वह तीन महीने के लिए मुख्य अभियंता के अतिरिक्त प्रभार में थे. उन्होंने विभाग में कमीशन सिंडिकेट के सक्रिय होने की बात स्वीकार की. उन्होंने माना कि उनके कार्यकाल में 956 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हुआ था. इसमें 244 लेटर ऑफ एकसेपटेंस (LOA) जारी किया गया था. ठेकेदारों से नौ करोड़ रुपये की वसूली की गयी थी और संजीव लाल को दिया गया था.

 

मुख्य अभियंता सुरेंद्र कुमार ने भी विभाग में कमीशन और हिस्सेदारी की बात स्वीकार की. उन्होंने ईडी को दिये गये अपने बयान में कहा कि संजीव लाल ने मुन्ना सिंह और राजीव सिंह से संपर्क कराया. इसके बाद उन्होंने अपने अधीनस्थ इंजीनियरों को तीन प्रतिशत की दर से कमीशन वसूलने का निर्देश दिया. इंजीनियरों द्वारा ठेकेदारों से कमीशन की रकम वसूल कर राजीव के माध्यम से मुन्ना सिंह को दिया गया. उनके कार्यकाल में ठेकेदारों से 15 करोड़ रुपये वसूल कर मंत्री के आप्त सचिव संजीव लाल को दिया गया.

 

कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार ने ईडी को दिये गये बताया कि वह मुख्य अभियंता के तकनीकी सचिव भी थे. उन्होंने ठेकेदारों से तीन प्रतिशत कमीशन वसूले जाने की बात स्वीकार की. बयान उन्होंने कहा कि कमीशन में से 1.35 प्रतिशत मंत्री, 0.65 प्रतिशत विभागीय सचिव, 0.50 प्रतिशत मुख्य अभियंता और 0.50 प्रतिशत अन्य लोगों की हिस्सेदारी की बात स्वीकार की. उन्होंने ईडी को बताया कि मुख्य अभियंता सिंगारी टूटी ने उन्हें संजीव लाल को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया. इसके बाद मुख्य अभियंता बने राजीव लोचन ने ठेकेदारों से वसूली गयी गयी कमीशन में मंत्री के हिस्से की रकम संजीव लाल को देने का निर्देश दिया. संतोष कुमार ने 20 करोड़ रुपये वसूल कर मुन्ना सिंह के भाई को देने की बात स्वीकार की. बाद में वह अपने बयान से मुकर गये. कमीशन की वसूली और 20 करोड़ रुपये मुन्ना सिंह के भाई को देने से इनकार कर दिया.

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