Patna: बिहार में कोचिंग विवाद अभी ठंडा नहीं हुआ कि एक और चौकाने वाला मामला शिक्षा जगत से आया है. राज्य में एक भी इंजीनियरिंग कॉलेज के पास एनबीए (National Board of Accreditation)की मान्यता नहीं है. यानी जो बच्चे किसी भी टेक्निकल कोर्सेज में दाखिला लिया हुआ है, उनके शैक्षणिक करियर पर असर पड़ सकता है.
किसी भी संस्थान में जो कोर्स ऑप्शंस उपलब्ध हैं, उनके पाठ्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिशन की मान्यता महत्वपूर्ण होती है. एनबीए प्राप्त संस्थानों से निकले बच्चों को देश और देश के बाहर रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं. यदि वो आगे पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, तो भी वो देश-विदेश के संस्थान से उच्च शिक्षा हासिल कर सकते हैं.
बिहार में 50 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं की कमी हैं. यहां योग्य शिक्षकों की भी कमी है. इसी कारण राज्य के संस्थान एनबीए के तय मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं. जिससे बिहार के छात्रों के सामने कई चुनौतियां खड़ी है.
स्टेट गवर्मेंट को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. निर्धारित मानकों के अनुरूप ही बुनियादी ढांचे के विकास करना होगा. साथ ही योग्य शिक्षकों के साथ ही राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेज को नेशनल लेवल का बनाया जा सकता है, जिससे यहां पढ़कर निकलने वाले बच्चों बेहतर भविष्य मिले.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.
Leave a Comment