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Entertainment News : वायरल हुआ ऋचा चड्ढा का वीडियो, बेटियों व बेटों की सुरक्षा पर छिड़ी बहस

एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा हाल ही में एक कार्यक्रम में शामिल हुईं, जहां उन्होंने बेटियों की सुरक्षा और समाज में पुरुषों की जिम्मेदारी पर अपनी राय रखी.
 

Lagatar desk : एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा हाल ही में एक कार्यक्रम में शामिल हुईं, जहां उन्होंने बेटियों की सुरक्षा और समाज में पुरुषों की जिम्मेदारी पर अपनी राय रखी.इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि समाज में बदलाव लाना है, तो लड़कों की परवरिश और व्यवहार पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है.

 

ऋचा ने कहा कि बेटियों को रोकने-टोकने के बजाय परिवारों को अपने बेटों को सही संस्कार और जिम्मेदारी सिखानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी बच्चे के व्यवहार में गलत संकेत दिखाई दें, तो समय रहते उस पर ध्यान देना जरूरी है.

 

अपने लड़कों को संभालें वाले बयान पर छिड़ी चर्चा

इवेंट के दौरान ऋचा ने कहा कि माता-पिता को अपने बेटों के व्यवहार के प्रति सजग रहना चाहिए. उनका मानना था कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए लड़कों को जिम्मेदार नागरिक बनाना आवश्यक है.उन्होंने यह भी कहा कि यह सोच गलत है कि नाबालिग होने के कारण किसी युवक को उसके अपराधों के लिए गंभीर परिणामों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

 

महिला ने पूछा- लड़कों को कौन बचाएगा?

ऋचा की बातों के बीच दर्शकों में मौजूद एक महिला ने सवाल उठाया कि चर्चा केवल लड़कियों की सुरक्षा तक सीमित क्यों है. महिला ने कहा कि कई मामलों में पुरुष भी पीड़ित होते हैं और उनकी सुरक्षा व समस्याओं पर भी बात होनी चाहिए.महिला ने कहा, हर बार गलती लड़कों की ही नहीं होती. बेटियों को तो बहुत पढ़ा लिया, लेकिन बेटों को कौन बचाएगा?

 

मुस्कान रस्तोगी और सोनम का किया जिक्र

महिला ने आगे कुछ चर्चित आपराधिक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बेटा अब शादी करने से डरता है. उन्होंने कहा कि पुरुषों को भी कुछ महिलाओं द्वारा किए गए अपराधों से सुरक्षा की जरूरत है.

 

इस पर ऋचा चड्ढा ने जवाब देते हुए कहा कि किसी महिला द्वारा किए गए अपराध का मामला इसलिए अधिक याद रह जाता है क्योंकि ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं, जबकि पुरुषों द्वारा किए गए अपराधों की खबरें अधिक संख्या में सामने आती रहती हैं.

 

NCRB आंकड़ों का भी हुआ जिक्र

बहस के दौरान महिला ने दावा किया कि देश में बड़ी संख्या में पुरुष आत्महत्या करते हैं और इस विषय पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने आग्रह किया कि पुरुषों की मानसिक और सामाजिक समस्याओं पर आधारित कहानियां और फिल्में भी बनाई जानी चाहिए.

 

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