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एप्स्टीन Files, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, नये खुलासे और उठते सवाल

हरदीप पुरी ने इसे एक सामान्य मेल के रूप में नहीं लिया. उन्होंने एप्स्टीन के सहयोगी को वीजा दिलवाने के लिए अपनी सारी हदें पार कर दी! उन्होंने रिटायर्ड राजदूत प्रमोद कुमार बजाज और न्यूयॉर्क में एक संजीव नामक व्यक्ति को ईमेल किया और उन्हें एप्स्टीन की मदद करने का निर्देश दिया. पूर्व राजदूत प्रमोद बजाज ने बात मान ली.
 

S Sandeep Deo

24 अक्टूबर 2014 को, यौन तस्कर जेफरी एप्स्टीन ने हरदीप पुरी को को एक मेल में लिखा.  “मेरी असिस्टेंट को जल्दी वीज़ा चाहिए ताकि वह भारत में एक शादी में शामिल हो सके. क्या दूतावास में कोई है जिससे वह बात कर सके?” इसके बाद जो हुआ, वह भारत के लिए बेहद चिंताजनक है!

 

हरदीप पुरी ने इसे एक सामान्य मेल के रूप में नहीं लिया. उन्होंने एप्स्टीन के सहयोगी को वीजा दिलवाने के लिए अपनी सारी हदें पार कर दी! उन्होंने रिटायर्ड राजदूत प्रमोद कुमार बजाज और न्यूयॉर्क में एक संजीव नामक व्यक्ति को ईमेल किया और उन्हें एप्स्टीन की मदद करने का निर्देश दिया. पूर्व राजदूत प्रमोद बजाज ने बात मान ली.

 

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अमेरिकी संसद की कमेटी द्वारा जारी ई-मेल की कॉपी.

 

यदि हम इस घटनाक्रम की टाइम लाइन देखें तो यह और भी चौंकाने वाली है!  हरदीप पुरी 2013 में IFS से रिटायर हुए थे और जनवरी 2014 में BJP में शामिल हुए थे. वह जेफरी एप्स्टीन की तरफ से एक भाजपा सदस्य के रूप में अपने डिप्लोमैटिक पहुंच और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे थे. 

 

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पूर्व राजदूत प्रमोद बजाज की फाईल फोटो.

 

ज्ञात हो कि वर्ष 2008 में एप्सटीन को एक नाबालिग से जुड़े मामले में सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी ठहराया गया था. अर्थात् भाजपा सदस्य हरदीप पुरी, जो पूर्व में एक डिप्लोमेट थे और वर्तमान में भारत के एक केंद्रीय मंत्री हैं, एक सेक्स अपराधी के अपराध से परिचित होते हुए भी सारी हदों को पार करते हुए एप्स्टीन की मदद कर रहे थे.

 

अब इससे स्वाभाविक रूप से कुछ गंभीर सवाल उठते हैं

  • 01. हरदीप पुरी ने एक अंतरराष्ट्रीय सेक्स अपराधी एप्स्टीन के सहयोगी की मदद के लिए डिप्लोमैटिक और राजनीतिक प्रभाव का गलत इस्तेमाल क्यों किया?
  • 02. क्या हरदीप पुरी ने बाद में यह वेरिफाई किया कि एप्सटीन के सहयोगी की यात्रा सच में "एक शादी" के लिए थी या वह किसी अन्य कारण से भारत की यात्रा पर थी? एप्सटीन के साथी की इस यात्रा से भारत की सुरक्षा और गरिमा पर कोई आंच तो नहीं आई? 
  • 03. आखिर हरदीप पुरी को इस शर्मनाक कार्य के लिए एप्स्टीन से क्या हासिल हुआ? वह एप्सटीन के किस एहसान को चुकाने के लिए इतनी जल्दी में सारी हदें पार करते हुए उसकी मदद कर रहे थे?
  • 04. क्या हरदीप पुरी अब भी यही कहेंगे कि एप्स्टीन के साथ उनकी बातचीत सिर्फ "डिजिटल इंडिया" अभियान को बढ़ावा देने तक सीमित थी? 
  • 05. हरदीप पुरी के इस 'कुतर्क' के बाद भी यह सवाल उठता है कि आखिर एक यौन अपराधी भारत सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान में किस हैसियत से मदद कर रहा था?

डिस्क्लेमरः लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह टिप्पणी उनके सोशल मीडिया पेज से साभार लिया गया है. 

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