Shruti Prakash Singh Ranchi : अपना आशियाना खोने के 11 साल बाद भी इस्लामनगर के निवासी बेघर ही हैं. पुनर्वास की प्रतीक्षा करते-करते 11 साल कब निकल गये, इन्हें पता ही नहीं चला. अब न्याय पाने की आस भी उम्मीद छोड़ती जा रही है. 11 साल पहले यानि छह अप्रैल 2011 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण कर मकान बना चुके लोगों को इस्लामनगर से हटाया गया था. वहां रह रहे विस्थापित परिवार सुप्रीम कोर्ट तक चले गए. उसके बाद कोर्ट ने उनको उसी जगह पर पक्का मकान बनाकर देने का निर्देश दिया. सरकार ने 2018 में वहां छह एकड़ जमीन मकान बनाने के लिए आवंटित की. साथ ही 30 करोड़ रुपए से मकान बनाने के लिए पैसा भी आवंटन किया गया. इस्लामनगर में जो फ्लैट बने हैं, उसमें 291 लोगों को ही फ्लैट मिलेगा. बाकी के 153 विस्थापित परिवार कहां जाएंगे, इसे लेकर अभी से आवाज उठनी शुरू हो गई है. लोगों का कहना है कि इस्लामनगर में जो 444 परिवार हैं, उनको वहां बसाया जाए, लेकिन सरकार की ओर से 291 फ्लैट ही अभी तक बनाया गया है. इतने ही लोगों को अभी वहां बसाना है. अब बाकी के बचे 153 परिवार को अभी भी अपना आशियाना पाने के लिए संघर्ष करना होगा. इसे भी पढ़ें - मुठभेड़">https://lagatar.in/plfi-militant-laka-pahan-was-killed-in-encounter-wanted-in-61-cases/">मुठभेड़
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alt="11 साल बाद भी बेघर हैं इस्लामनगर निवासी, जोह रहे पुनर्वास की बाट" width="600" height="400" /> इस्लाम नगर के विस्थापित लोगों की तस्वीर[/caption]
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सरकारी व गैर-सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने का था निर्देश
इस्लामनगर राजधानी रांची के मध्य में स्थित है, जो पत्थलकुदवा चौक और केएम रोड (कुरैशी मोहल्ला रोड) से घिरा है. यह मुख्य रूप से एक मुस्लिम इलाका है, जिसमें कुछ आदिवासी और हरिजन परिवार हैं. 28 फरवरी, 2011 को झारखंड हाईकोर्ट ने असित कुमार नाम के शख्स की जनहित याचिका पर निर्णय लेते हुए जिला प्रशासन को सरकारी और गैर-सरकारी दोनों भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए. 29 मार्च, 2011 की शाम, इस्लामनगर के निवासियों को जिला प्रशासन से एक नोटिस मिला, जिसमें कहा गया था कि भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है. नोटिस में लिखा था कि हाईकोट के आदेश अनुसार, उन्हें जमीन खाली करनी होगी अन्यथा जबरदस्ती के लिए तैयार रहना होगा. [caption id="attachment_302864" align="aligncenter" width="600"]alt="11 साल बाद भी बेघर हैं इस्लामनगर निवासी, जोह रहे पुनर्वास की बाट" width="600" height="400" /> इस्लाम नगर के विस्थापित लोगों की तस्वीर[/caption]
जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया
लोगों से बात करने पर उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि 6 अप्रैल, 2011 को जिला प्रशासन ने `अतिक्रमण हटाओ अभियान’ शुरू किया और नागा बाबा खटाल को ध्वस्त करने के बाद, वे विक्रांत चौक पर पुलिस और बुलडोजर के साथ एकत्र हुए. विरोध तेजी से फैल रहा था. लेकिन सुबह 11 बजे तक स्थिति तनावपूर्ण हो गई. जबकि विक्रांत चौक से इस्लामनगर जाने के रास्ते में बुलडोजरों ने पहले ही कई घरों को ध्वस्त कर दिया, पॉलीटेक्निक कॉलेज के पास उन्हें कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. भीड़ को शांत करने के लिए, पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें दो युवकों की गुड्डू और गोल्डन की गोली लगने से मौत हो गयी, दोनों इस्लामनगर के ही निवासी थे. शाम करीब 5 बजे तक लगभग 1,300 लोग अपने घर खो चुके थे. कुछ सामान इकट्ठा करके विभिन्न मस्जिदों और मदरसों में लोगों ने शरण ली थी. इसे भी पढ़ें - हाईकोर्ट">https://lagatar.in/doubts-on-high-court-bar-association-election-after-jsbcs-letter-observer-said-election-will-not-be-held-by-keeping-rules-in-mind/">हाईकोर्टबार एसोसिएशन चुनाव पर संशय, JSBC के पत्र के बाद ऑब्जर्वर ने कहा- नियम ताक पर रख कर नहीं होगा चुनाव [wpse_comments_template]
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