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33 साल बाद भी सिकनी कोलियरी के विस्थापितों को नहीं मिला उनका हक

Sunil Kumar  Latehar : झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड द्वारा संचालित सिकनी कोलियरी की शुरुआत वर्ष 1990 में हुई थी. इस कोलियरी को खोलने के लिए निगम ने रैयतों से सरकारी दर पर 51.57 एकड़ जमीन खरीदी थी. उस समय निगम ने विस्थापितों को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में नौकरी देने का आश्वासन दिया था. साथ ही कई संवेदनशील मुद्दों को अपने एमओयू में शामिल किया था. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि 33 साल बाद भी विस्थापितों को उनका हक मिला. निगम ने ना तो विस्थापितों की नौकरी नियमित नहीं की और ना ही उन्हें सरकार द्वारा संचालित विस्थापन एवं पुनर्वास नीति का कोई लाभ मिला. (पढ़ें, साहिबगंज">https://lagatar.in/sahibganj-fearless-criminals-entered-the-house-in-broad-daylight-and-shot-injured/">साहिबगंज

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सरकार के निर्देश के बाद भी विस्थापितों को नहीं मिला हक

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alt="" width="600" height="400" /> 30 मार्च 2006 को आयोजित निगम की निदेशक पर्षद की 16वीं बैठक में इस मामले को रखा गया था. विस्थापितों ने बैठक में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा था. लेकिन इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. विस्थापितों को विस्थापन एवं पुनर्वास नीति का हवाला देकर आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया गया. इसके बाद वर्ष 2008 में तत्कालीन विधायक प्रकाश राम ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर सरकार से कार्रवाई करने की अनुरोध किया था. सरकार ने खान और भूतत्व विभाग से इस संदर्भ में कार्य करने का निर्देश भी दिया. फिर भी इन विस्थापितों को उनका हक नहीं मिला. इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/ranchi-ihm-honored-with-csr-award-for-excellence-2023/">रांची

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कोलियरी प्रभावित क्षेत्र में निगम ने नहीं किया विकास कार्य

मालूम हो पहले फेज में कोयला समाप्त होने के बाद निगम को विस्तारित परियोजना के तहत 137.75 एकड़ वन भूमि का खनन पट्टा स्वीकृत हुआ. लेकिन कतिपय राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण आज तक द्वितीय विस्तारित योजना में भी विस्थापितों को कोई लाभ नहीं दिया गया. एमओयू के अनुसार, निगम ने कोलियरी प्रभावित क्षेत्र में कोई भी विकास कार्य नहीं किया. ना तो यहां कोई स्कूल खुले , ना कोई अस्पताल खुला और ना ही जीविकोपार्जन के लिए कोई व्यवस्था की गयी. जबकि कोलियरी चालू होने से पहले निगम ने विस्थापितों और आम लोगों को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने का वायदा किया था. सिकनी कोलयरी से दूसरे फेज का भी आधा से अधिक कोयला निकाला जा चुका है. लेकिन सिकनी निवासियों का इसका भी लाभ नहीं मिल पा रहा है. हालांकि ताकतवर लोग मालामाल जरूर हुए हैं. इसे भी पढ़ें : SC">https://lagatar.in/hearing-on-the-petition-requesting-independent-investigation-of-the-murder-of-atiq-ahmed-ashraf-on-28th-in-sc/">SC

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