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ईडी की जांच जारी, फिर किसके संरक्षण में हो रहा लिंकेज कोयला का अवैध कारोबार

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Ranchi :   एक तरफ जहां ईडी हजारीबाग जिले में लिंकेज कोयला के कारोबार की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर रामगढ़ और हजारीबाग जिले से लिंकेज कोयला का कारोबार शुरू हो गया है. जिले के कई बड़े कारोबारी तोपा और उरीमारी कोल परियोजना से सब्सिडी रेट पर मिले कोयला को अपनी फैक्ट्री में ना भेज कर सरकारी कागजात से छेड़छाड़ कर डेहरी और बनारस की मंडी में भेज दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हजारीबाग में किसके संरक्षण में लिंकेज कोयला का कारोबार हो रहा है.

हजारीबाग में लिंकेज कोयला का ईडी कर रही जांच

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीते दिनों हजारीबाग के चर्चित कोयला कारोबारी इजहार अंसारी को गिरफ्तार किया था. ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इजहार अंसारी ने लिंकेज (सब्सिडी दर) का 86568 टन कोयला वाराणसी और धनबाद की कोयला मंडियों में ज्यादा कीमत पर बेचा था. जिसकी कीमत बाजार मूल्य 71 करोड़ रुपए है. ईडी की जांच से पता चला है कि इजहार अंसारी ने कोयला लिंकेज नीति का दुरूपयोग किया है. जिसके तहत कैप्टिव खपत के लिए छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई) को सब्सिडी वाला कोयला आवंटित किया जाता था. इजहार अंसारी की 13 ऐसी एसएमई फर्मों को 71 करोड़ रुपए के बाजार मूल्य वाला लगभग 86568 टन कोयला आवंटित किया गया था. हालांकि इजहार अंसारी ने उद्योग में उपयोग करने के बजाय कोयले को खुले बाजार में बेच दिया और इससे बड़े पैमाने पर लाभ कमाया.

कोयले का अवैध कारोबार

लिंकेज कोयला का हर माह आबंटन होता है. सब्सिडाइज्ड दर पर उन्हें कोयला देने का मकसद यह है कि स्थानीय छोटी कंपनियों को मदद मिल सके और लोगों को रोजगार मिल सके. लेकिन जिन्हें भी लिंकेज कोयला मिलता है.वह फैक्ट्री को चलाते ही नहीं हैं या फिर उसे बनारस व डेहरी की मंडियों में ले जाकर बेच देते हैं. इसकी शिकायत मिलने पर साल 2016 में प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर लिंकेज कोयला के प्रावधान को खत्म कर दिया गया था. लेकिन फिर से शुरू कर दिया गया है. [wpse_comments_template]

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