शशिबाला सिंह सिंह बनीं रिम्स की नयी प्रभारी निदेशक 450 करोड़ खुद हो गई अंडर ग्राउंड बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए कई योजनाओं लायी गईं. रांची के लिए अंडग्राउंड केबलिंग का काम शुरू किया गया. दावा किया गया कि आंधी-पानी में भी बिजली नहीं कटेगी. लेकिन सात साल गुजर जाने के बाद भी अंडरग्राउंड केबिलिंग का काम पूरा नहीं हो पाया. कुल योजना लगभग 450 करोड़ रुपए की थी. यह काम पॉलिकैब कंपनी को दिया गया था. इस पर 400 करोड़ रुपए भी खर्च हो गए. 2018 में अंडरग्राउंड केबलिंग की हुआ था शुरू
2018 में शुरू हुई अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना शुरू हुई थी. लेकिन अभी भी यह परियोजना अधूरी है. इस परियोजना के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग की जानी थी. जिनमें अरगोड़ा, हरमू, पुंदाग, कुसई, आईटीआई पिस्कामोड़, मोरहाबादी, राजभवन, कांके, एयरपोर्ट, कोकर अर्बन, कोकर रूरल, आरएमसीएच, बरियातू और सदर अस्पताल को भी जोड़ा गया था.मेंटेनेंश में सालाना खर्च 343 करोड़ रुपए बिजली वितरण निगम मेंटेनेंश में सालाना 343.30 करोड़ रुपए खर्च करता है. मेंटेनेंश के नाम पर ही दो से तीन घंटे तक बिजली काटी जाती है. हाल ही में पावर ट्रांसफरमर की मरम्मत के लिए तीन से 12 अप्रैल तक शहर के विभिन्न इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही थी. बिजली व्यवस्था में सुधार में कितना हो रहा खर्च
आइटी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन- 69.55 करोड़
आइटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट- एक करोड़
एनर्जी एकाउंटिंग- 63 करोड़
पावर इंप्रुवमेंट- 5.50 करोड़
आरडीएसएस स्कीम- 200 करोड़इसे भी पढ़ें -भारत">https://lagatar.in/indias-most-wanted-isi-linked-babbar-khalsa-terrorist-happy-pasia-arrested-in-us/">भारत
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