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ताजमहल से हिकारत भी देशभक्ति है!

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श्रीनिवास

‘राष्ट्र कवि’ घोषित होने को आतुर एक कवि, जो इन दिनों कथावाचक के रूप में अधिक दिखते हैं, ने ताजमहल को ‘सफेद रंग का कब्रिस्तान’ कहा है! कहा- लोग अब उस ‘कब्रिस्तान’ की जगह अयोध्या जा रहे हैं, देश बदल रहा है! पता नहीं राजघाट स्थित गांधी की समाधि को वे क्या मानते हैं, जहां मोदी जी भी साल में कम से कम दो बार, भारी मन से ही सही, सर झुकाने जाते हैं!

 

हालांकि कवि जी गांधी और नेहरू के बारे में काफी प्रशंसात्मक स्वर में बोलते रहे हैं. पर कहा जा रहा है कि राज्यसभा-प्रवेश के लिए आतुर हैं! कवि जी को शायद मालूम नहीं होगा या याद नहीं होगा कि 2015 में महामानव जब म्यांमार (बर्मा) गये थे, तो ‘घुसपैठियों’ के अंतिम बड़े सरदार बहादुर शाह जफर की मजार (कवि के शब्दों में कब्रिस्तान) पर फूल और चादर चढ़ाने गये थे! वैसे कब्रिस्तान पूरी आबादी के लिए दफनाने की जगह को कहते हैं, किसी ‘खास आदमी की ‘कब्र’ को मजार. शाहजहां से कोई लाख चिढ़े, वह बादशाह रहते हुए मरा था. 

 

अब कवि जी को चाहिए कि मोदी जी से कह कर उस ‘सफेद रंग के कब्रिस्तान’ को पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित करवा दें. लाखों का नुकसान होगा तो होगा! आश्चर्य, कवि ने ‘ताजमहल’ के ‘तेजोमहालय’ होने का दावा नहीं किया! उन पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लग सकता है कि एक ‘मंदिर’ को ‘कब्रिस्तान’ कैसे कह दिया!

 

अब जरा ताजमहल के आर्थिक पहलू को जान लेते हैं- एबीपी न्यूज के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक, ताजमहल की टिकट बिक्री से सरकार की कुल कमाई 98.55 करोड़ के आसपास रही. इस अवधि में लगभग 67.8 लाख पर्यटकों ने ताजमहल का दौरा किया. टिकट की कीमत, विदेशी व भारतीय पर्यटकों में अंतर और अलग-अलग शुल्क को ध्यान में रखते हुए यह कमाई हुई. अगर इसे दिन के हिसाब से बांटा जाए, तो ताजमहल से सरकार को रोजाना लगभग 27 लाख की औसत कमाई होती है. 

 

इस तरह ताजमहल न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि आर्थिक रूप से भी देश के लिए सोने की तरह चमकता खजाना है. ताजमहल से होने वाली यह कमाई स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डालती है. आगरा में होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और स्मारिका दुकानों से जुड़ा व्यवसाय इस आय का हिस्सा है. यानी ताजमहल की लोकप्रियता सीधे तौर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देती है. यह भी जान लें कि ताजमहल के संरक्षण पर 2023-24 में लगभग 3.17 करोड़ रुपये खर्च किये गये, जो कुल आय का मात्र लगभग 3.2% है. 

 

राजनीतिक दृष्टि से ‘तेजोमहालय’ का मुद्दा जितना भी लाभप्रद हो, मगर मुझे नहीं लगता कि सरकार कवि की सलाह मान कर ताजमहल से होनेवाली इतनी बड़ी आय से हाथ धोना चहेगी.

 

 

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