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संयुक्त राष्ट्र कंवेशन के मद्देनजर झारखंड में बने बाल बजट का पूरा पैसा भी खर्च नहीं

Ranchi News: बाल बजट के ऑडिट के दौरान महालेखाकार को अकाउंटिंग सिस्टम में कई तरह की गड़बड़ी मिली. इसमें सरकार द्वारा बाल बजट में खर्च का विशिष्ट शीर्ष (Specific head of account) का उल्लेख नहीं करने का मामला पाया गया. बाल बजट में योजनाओं का नाम जेनरल बजट में दिये गये योजनाओं के नाम से मेल नहीं खाने का मामला भी ऑडिट टीम ने पाया. इसलिए महालेखाकार ने ऑडिट के दौरान Sub-head से खर्च के आंकड़ों का विश्लेषण किया.
 
सांकेतिक तस्वीर.

Jharkhand News: बच्चों के अधिकार और संरक्षण के लिए बने “बाल बजट” का पूरा पैसा खर्च नहीं हो पा रहा है. संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के फैसले के आलोक में राज्य सरकार ने 2019-20 में पहली बार बाल बजट पेश किया था. महालेखाकार ने 2024-25 के बाल बजट के खर्च का ऑडिट किया. इसमें सिर्फ 54.16% राशि ही खर्च होने की पुष्टि हुई. सरकार ने 2026-27 के बजट भाषण में 2025-26 के दौरान बाल बजट पर 72.66% राशि खर्च करने का दावा किया.

 

बाल बजट के ऑडिट के दौरान महालेखाकार को अकाउंटिंग सिस्टम में कई तरह की गड़बड़ी मिली. इसमें सरकार द्वारा बाल बजट में खर्च का विशिष्ट शीर्ष (Specific head of account) का उल्लेख नहीं करने का मामला पाया गया. बाल बजट में योजनाओं का नाम जेनरल बजट में दिये गये योजनाओं के नाम से मेल नहीं खाने का मामला भी ऑडिट टीम ने पाया. इसलिए महालेखाकार ने ऑडिट के दौरान Sub-head से खर्च के आंकड़ों का विश्लेषण किया.

 

 

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ग्राफिक्स में समझें, किस विभाग को कितनी राशि और कितना खर्च.

 

इसमें यह पाया गया कि सरकार ने 2024-25 के बाल बजट में चार क्षेत्रों को शामिल किया गया था. इसमें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता, स्वास्थ्य शिक्षा व परिवार कल्याण, कल्याण विभाग और महिला बाल विकास विभाग को शामिल किया गया. सरकार ने इन बाल बजट के मद में इन चारों विभागों के लिए कुल 8866.69 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया था.

 

हालांकि बाल बजट पर खर्च करने के इस अनुमान के मुकाबले सिर्फ 4803.01 करोड़ रुपये खर्च किया था. यह बजट अनुमान का सिर्फ 54.16% था. यानी सरकार बाल बजट की पूरी राशि भी खर्च नहीं कर सकी.

 

सरकार ने 2024-25 का बाल बजट बनाने के लिए जनगणना 2011 के आंकड़ों को आधार बनाया था. जनगणना 2011 के अनुसार, राज्य में बच्चों (0-18साल) की आबादी 1.46 करोड़ थी जो आबादी का 44.25% था. बच्चों की इस संख्या में 75.66 लाख लड़के और 70.34 लाख लड़कियां थीं. वर्ष 2024-25 का बजट बनाने वक्त झारखंड में आबादी के ग्रोथरेट के आधार पर बच्चों की संख्या में वृद्धि का अनुमान किया गया. इसमें लड़कों की संख्या 92 लाख और लड़कियों की संख्या 86 लाख होने का अनुमान किया गया. इसी आधार पर बजटीय प्रावधान किया गया था.

 

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा 20 नवंबर 1989 को बच्चों के अधिकार और संरक्षण के मुद्दे पर फैसला किया गया था. इसके तहत बच्चों के जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा और संरक्षण को सुनिश्चित करना है.

 

बाल बजट क्यों? चार मुख्य सिद्धांत 

  • 01- भेदभाव न करने का अधिकार.
  • 02- बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता.
  • 03- जीवन जीने, जीवित रहने और विकास का अधिकार. 
  • 04- बच्चों के विचारों का सम्मान और सुने जाने का अधिकार.

 

इसी के आलोक में राज्य में पहली बार वित्तीय वर्ष 2019-20 में बाल बजट पेश किया गया था. पहले बाल बजट में 6182.44 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. इसके बाद का दो वित्तीय वर्ष कोविड-19 से प्रभावित रहा. इस दौरान बाल बजट पेश नहीं किया गया. इसके बाद 2023-24 तक के बजट भाषण में विभिन्न विभागों द्वारा बच्चों के कल्याण के लिए चलायी जाने वाली योजनाओं की चर्चा की गयी.

 

सरकार ने 2024-25 से मूल बजट के साथ अलग से बाल बजट पेश करना शुरू किया. वित्तीय वर्ष 2025-26 में बाल बजट के लिए 9411.27 और 2026-27 में 10793.16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया. 2026-27 के बजट भाषण में सरकार ने 2025-26 के दौरान बाल बजट पर 6939.00 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया. महालेखाकर द्वारा 2025-26 के बाल बजट का ऑडिट नहीं किये जाने से सरकार के दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है.


2024-25 में बाल बजट और खर्च की स्थिति (करोड़ में)

बाल बजट में शामिल विभाग  बजट खर्च उपलब्धि
स्कूली शिक्षा व साक्षरता 3143.88 1018.84 32.40%
स्वास्थ्य परिवार कल्याण 1818.86 1466.86 80.64%
महिला बाल विकास विभाग 1993.07 1044.19 52.39%
नगर विकास व आवास विभाग 1881.50 1243.74

66.10%

 

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