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जल का एक-एक बूंद किसान और प्रत्येक जीव के लिए महत्वपूर्ण- डॉ. दिनेश रूसिया

Ranchi: वैज्ञानिक डॉ. दिनेश रूसिया ने जल के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि जल हमारे राज्य के किसान भाइयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हम सभी नागरिकों के लिए और पशु-पक्षी और जानवरों के लिए एक-एक बूंद बहुत मायने रखता है. यह बताने की आवश्यकता नहीं है. इस साल मानसून समय पर नहीं आया. राज्य के किसान बहुत चिंतित रहे. बहुत जगह निश्चित एकजोत तय समय सीमा होती है. जिसमें धान की रोपाई नहीं हो सकी.

जल संरक्षण पर जोर

वैज्ञानिक डॉ. दिनेश रूसिया ने बताया कि अभी बीते 15 दिन से बारिश हो रही है, लेकिन जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर फसल को लगाने का एक निश्चित समय होता है. बाद में लगाने से पैदावार नही होती है. फिर भी किसानों ने भरसक प्रयास किया है. अब जिन क्षेत्रों में थोड़ा बहुत पानी मिल गया बरसात का, उन लोगों ने रोपाई भी की. बीते कई सालों से राज्य सरकार ने भरसक प्रयत्न किया कि कैसे किसानों को जल संरक्षण का फायदा मिल सके. विभिन्न योजनाएं चलाई गई, इसमें कोई संदेह नहीं है कि जल का संरक्षण नहीं कर सके. पानी का संरक्षण बहुत जरूरी है. हमारा यह सोचना है कि प्रत्येक गांव और पंचायत का पानी बहते बहते अधिकांश बाढ़ का रूप ले लेता है. उसे रोका जा सकता है. इसके लिए सरकार कोई नई योजना लाए. इससे छोटे छोटे स्तर पर जल का संरक्षण हो सकता है. पहले भी हम लोगों ने ध्यान दिया कि धान लगने के बाद और धान के कटने के बाद, दूसरी फसल बहुत पहले नदी, नाले ,बहते हुए पानी, पानी के स्रोत के आसपास या इर्द- गिर्द पर लगाया जाता था. किंतु समय के साथ- साथ बढ़ते हुए जल संरक्षण के कार्यक्रम से राज्य में सब्जी का उत्पादन क्षेत्र भी बहुत बढ़ा है.  इसे भी पढ़ें-साहिबगंज">https://lagatar.in/in-the-cpi-conference-chandrashekhar-said-being-a-communist-is-not-so-easy/">साहिबगंज

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जीडीपी में भी योगदान दे सकें किसान : डॉ दिनेश रूसिया

आज हम बहुत सक्षम हैं. इस मामले में हमको अब यह देखना है कि धान के कटने के बाद जितने क्षेत्र में धान लगती है, इतने ही क्षेत्र में अगर रवि की फसल है तो यह देश के लिए बहुत अच्छा होगा. दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण हमारे किसान भाई बनेंगे. इससे पलायन रुकेगा और हमारे यहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. हम जीडीपी में भी राज्य में योगदान दे सकें. इस पर थोड़ा सोचने की आवश्यकता है कि हम जल संरक्षण के क्षेत्र को थोड़ा और विकास कैसे कर सकते हैं. इस पर हमको कैंप लगाने होंगे . इस पर हमको एक बार सभी पंचायत के माध्यम से कार्यशाला आयोजित करना होगा. कार्यशाला केवल कार्यशाला तक ही सीमित ना रह जाए, इसको धरातल पर उतारने का प्रयास भी करना होगा. इसमें पंचायतों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होगी. राज्य सरकार को अपने बजट में इसे बढ़ावा देना होगा. हमें छोटी-छोटी संरचनाओं पर ध्यान देना होगा. यह भी बात सही है कि जमीन पर जो संरचना बनेगी जल संरक्षण की. उस पर पानी बरसात खत्म होने के बाद थोड़े दिन तक ही रह पाएगा. उसके बाद वह सीपेज होकर नीचे की तरफ चला जाए तो हमको मध्यम जमीन पर और निकली जमीन पर ज्यादा संरचनाएं बनाने की आवश्यकता है. क्योंकि भूमि संरक्षण विभाग, कृषि विभाग के पास बजट की राशि उपलब्ध है. किसान पंपसेट लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से, पाइप के सिंचाई के माध्यम से अनेक योजनाएं उठा रहे हैं, जिसमे सरकार को ज्यादा खर्च होता है. एक साथ बैठा कर योजना को तैयार करने की आवश्यकता है. किसानों के लिए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय उपलब्ध है. पूरे राज्य में कृषि विज्ञान केंद्रों और क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र मुख्यालय सहित हर जिले में उनके साथ हैं, हमारी जहां भी मदद की आवश्यकता होती है हम विभिन्न विभिन्न माध्यमों से हर किसान तक पहुंचने में सक्षम होते हैं. जरूरत केवल इस को आकार देने की है. इसे भी पढ़ें-राष्ट्रीय">https://lagatar.in/national-christian-federation-delegation-meets-union-minister-nitin-gadkari/">राष्ट्रीय

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खोते की गहरी जुताई से बढ़ता है जलस्तर  

हमको एक उन्नत कृषि उपकरणों का इस्तेमाल करना होगा और उन्नत कृषि उपकरण के इस्तेमाल हमारी लागत को बहुत करता है. हम कम लागत में अच्छे उपकरणों का प्रयोग करके कृषि लागत को घटा सकते हैं और समय को भी बचा सकते हैं. पौधे को भी समय पर भोजन देकर हष्ट पुष्ट कर सकते हैं, लेकिन उसके पहले हमको प्रत्येक 3 से 4 साल में एक बारअपने खोते की गहरी जुताई करके नीचे की मिट्टी को ऊपर लाने की भी आवश्यकता है. मिट्टी पलटने से जो खरपतवार की जड़े जो गहराई तक नीचे जा चुकी है वह अंदर ही अंदर सड़ती रहती है. वह खेतों के लिए अच्छा होता है. अच्छी मात्रा में जल, जमीन के अंदर प्रवेश करता है और जितना जमीन के अंदर गहराई तक जल का प्रवेश होगा, वह पौधों के लिए फायदेमंद रहेगा बल्कि हमारे जमीन के नीचे जल स्तर को बढ़ाने में भी मदद करेगा. [wpse_comments_template]

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