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लालू को जेल से बाहर लाने की हर सम्भव कोशिश, काउंसिल का निर्देश बन रहा रोड़ा

Ranchi: लालू यादव की रिहाई का इंतज़ार और लम्बा होता जा रहा है. लेकिन JSBC का निर्देश उनकी रिहाई के बीच सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है. झारखंड हाईकोर्ट से जामनत मिलने के लगभग एक सप्ताह बाद भी लालू यादव खुली हवा में सांस नहीं ले पा रहे. जामनत की शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण अब तक जमानत पर उनकी रिहाई नहीं हुई है और वो न्यायिक अभिरक्षा में ही हैं.

तेजस्वी ने स्टेट बार काउंसिल से विनम्र आग्रह किया है

 दरअसल लालू यादव को जामनत मिलने के एक दिन बाद ही झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने राज्य के सभी वकीलों को किसी भी तरह के न्यायिक कार्य से दूर रहने का सख्त निर्देश दिया है और इस वजह से लालू का बेल बांड नहीं भरा पाया है. इस बीच रिहाई में वक्त लगने से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव समेत लालू के परिवार के अन्य सदस्य भी काफी चिंतित हैं और उन्होंने झारखंड स्टेट बार काउंसिल से विनम्र होकर आग्रह किया है कि काउंसिल की अगली बैठक में इस बात पर विचार किया जाये की जिन कैदियों की जामनत हो चुकी हैं उनके वकील उनका बेल बांड भर पाएं.

झारखंड स्टेट बार काउंसिल की रिव्यू मीटिंग सम्भवतः रविवार को होगी

इस बीच रांची समेत झारखंड के लगभग सभी जिलों में सैकड़ों ऐसे कैदी हैं जिनकी जामनत पर रिहाई की इजाजत विभिन्न न्यायलयों ने दे दी है. लेकिन वे जेल के सलाखों के पीछे हैं और अपनी रिहाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. झारखंड स्टेट बार काउंसिल की रिव्यू मीटिंग सम्भवतः रविवार को होगी और उम्मीद की जा रही है की काउंसिल के सदस्य बेल बांड भरने की रियायत मांगेंगे. बता दें की चारा घोटाले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के अध्यक्ष लालू यादव को पिछले दिनों झारखंड हाईकोर्ट ने 1-1 लाख रूपये के निजी मुचलके और 10 लाख रूपये जुर्माने की राशि जमा करने की शर्त पर जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है.

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