- CIP की जमीन अतिक्रमण के मुद्दे पर हाईकोर्ट में समिति दायर की जांच रिपोर्ट.
- कांके में CIP की जमीन की जमीन का बड़े पैमाने पर अवैध खरीद-बिक्री हुई है.
Ranchi: रेकार्ड रूम से सेंट्रल इंस्टीच्यूट ऑफ सायकेट्री (CIP), कांके को दी गयी जमीन की सात गजट नोटिफिकेशन में से चार नोटिफिकेशन गायब है. रेकार्ड रूम से गायब नोटिफिकेशन में से तीन वर्ष 1905 में और एक 1907 में जारी किया गया था. तत्कालीन नक्शा और स्पष्ट चौहदी नहीं होने की कारण CIP द्वारा किये गये दावों के अनुरूप जमीन का सत्यापन नहीं किया जा सका. इस बात का उल्लेख जिला प्रशासन द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में दायर जांच रिपोर्ट मे किया गया है. रेकार्ड रूम से इससे पहले भी जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के गायब होने का मामला प्रकाश में आ चुका है.
हाईकोर्ट में CIP की जमीन पर अतिक्रमण के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका में दिये गये निर्देश के आलोक में जिला प्रशासन द्वारा एक जांच समिति का गठन किया गया था. समिति को CIP के लिए अधिगृहित जमीन का सीमांकन करने के बाद अतिक्रमित जमीन का पता लगाना था. इसके लिए जांच समिति ने CIP से जमीन का ब्योरा मांगा.

कांके स्थित सीआइपी.
जांच के लिए CIP ने उपायुक्त को ब्रिटिश काल में जारी किये गये सात नोटिफिकेशन की सर्टिफाईड कॉपी उपलब्ध करायी. गजट नोटिफिकेशन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जमीन का नक्शा उपायुक्त कार्यालय में देखा जा सकता है. CIP द्वारा उपायुक्त को उपलब्ध कराये गये सात गजट नोटिफिकेशन में कुल 891.532 एकड़ जमीन शामिल है.
CIP द्वारा उपलब्ध कराये गये गजट नोटिफिकेशन का ब्योरा
| गजट/वर्ष | मौजा | रकबा(एकड़ में) |
| 11/1905 | कांके, कदमा | 55.00 |
| 46/1905 | कांके, कदमा | 131.16 |
| 49/1905 | कदमा | 32.16 |
| 16/1907 | कांके, सुकुरहुट्टू | 356.33 |
| 39/1913 | कांके | 285.71 |
| 25/1923 | कांके | 30.56 |
| 46/1938 | कांके | 0.612 |
जिला प्रशासन की ओर से कोर्ट में पेश जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि CIP द्वारा उपलब्ध कराये गये गजट नोटिफिकेशन से संबंधित दस्तावेज प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय से मांगी गयी. प्रमंडलीय आयुक्त की ओर से यह सूचित किया गया कि रेकार्ड रूम में CIP द्वारा उपलब्ध कराये गये सात में से सिर्फ चार नोटिफिकेशन ही उपलब्ध है. रेकार्ड रूप में वर्ष 1913, 1923 और 1938 में जारी गजट नोटिफिकेशन उपलब्ध है. प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय द्वारा इन तीनों गजट नोटिफिकेशन से संबंधित नक्शा नहीं उपलब्ध कराया गया.

कांके स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, इस संस्थान की जमीन का अतिक्रमण कर अवैध खरीद-बिक्री हुई है.
जांच समिति ने CIP द्वारा किये गये दावों की जांच में पाया कि वर्ष 1905 का तीन और 1905 का एक गजट नोटिफिकेशन Cadastral Survey के पहले का है. इसके चौहदी में तत्कालीन रैयतों का नाम दर्ज है. लेकिन इससे संबंधित नक्शा जिला और प्रमंडलीय रेकार्ड रूम में नहीं है. नक्शा और स्पष्ट चौहदी से संबंधित तत्कालीन दस्तावेज़ नहीं होने की वजह से इसका सत्यापन नहीं किया जा सका.
वर्ष 1913, 1923 और 1938 में जारी गजट नोटिफिकेशन Cadastral Survey के बाद और Revisional Survey के पहले के हैं. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि रेकार्ड रूम में उपलब्ध गजट नोटिफिकेशन नंबर 39/1913 में 285.71 एकड़, नोटिफिकेशन नंबर 25/1923 में 30.56 एकड़ जमीन है. दोनो गजट नोटिफिकेशन में शामिल जमीन पिठोरिया में स्थित है.
गजट नोटिफिकेशन नंबर 46/1938 में निहित जमीन पर CIP का कब्जा है. जांच रिपोर्ट में Revisional Survey और नक्शा के आधार पर मौजा कांके और कदमा में कुल 1118.60 एकड़ जमीन चिह्नित किया गया है. इस पर केंद्र सरकार के संस्थान सहित अन्य कार्यालय हैं. रिपोर्ट में इस जमीन पर अलग-अलग संस्थानों के कब्जे का उल्लेख किया गया है.
जमीन पर दखल कब्जा का ब्योरा
| बिरसा कृषि विश्वविद्यालय | 457.63 एकड़ |
| RINPAS+CIP | 522.64 एकड़ |
| इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट | 37.62 एकड़ |
| टाटा कैंसर अस्पताल | 23.50 एकड़ |
| अन्य संस्थान | 77.21 एकड़ |
उल्लेखनीय है कांके के CIP व बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की जमीन की बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है. भू-माफिया ने अतिक्रमित जमीन की अवैध खरीद-बिक्री बड़े पैमाने पर की है. इस मामले में कई एजेंसियों ने जांच की. कार्रवाई की है. गिरफ्तारियां हुईं. लेकिन अभी तक अतिक्रमित भूमि को सरकार अपने कब्जे में नहीं ले सकी है और जमीन माफिया खुला घूम रहे हैं.

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