Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अनियमितता की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की परतें लगातार खुलती जा रही हैं.CID की पूछताछ में कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है.
सूत्रों के अनुसार अभय तिवारी और JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के बीच कथित सांठगांठ के जरिए परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने और अभ्यर्थियों से पैसे लेकर मदद पहुंचाने का नेटवर्क चलाया जा रहा था. CID की पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर परीक्षा में पद और कैटेगरी के हिसाब से पैसे लिए जाने की जानकारी दी है.
DSP पद के लिए 1 करोड़ 20 लाख का कथित रेट
पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, DSP पद के लिए कथित तौर पर 1 करोड़ 20 लाख रुपये तक का रेट तय था. वहीं, अन्य पदों के लिए 70 से 80 लाख रुपये तक की रकम लिए जाने का दावा किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक पद और कैटेगरी के आधार पर रकम तय की जाती थी. CID अब इस पूरे कथित लेनदेन की जांच कर रही है.
अभय तिवारी के बयान से खुल रही नेटवर्क की परतें
जांच के दौरान CID को कथित तौर पर अभय तिवारी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और कितने अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए.
पूछताछ के दौरान अलग-अलग आरोपियों के बयानों में 17 से अधिक लोगों के नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है. CID अब इन सभी नामों और उनकी भूमिका की जांच कर रही है.
JPSC और JSSC की परीक्षाओं पर भी जांच का फोकस
जांच में यह भी सामने आने की बात कही जा रही है कि अभय तिवारी और श्वेता गुप्ता के माध्यम से JPSC की मेन्स परीक्षा और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में भी कथित तौर पर अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का नेटवर्क चलाया गया.
CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितता केवल 14वीं सिविल सेवा परीक्षा तक सीमित थी या परीक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों में भी इसका प्रभाव था.
5 लाख रुपये नकद बरामद
CID की कार्रवाई में JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी और TDPL कंपनी के निदेशक राजवीर सिंह समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया था.
पूछताछ और जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया. गिरफ्तार मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी के घर से करीब 5 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है.
हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और डायरी से खुलेंगे राज
जांच के दौरान श्वेता गुप्ता और TDPL कंपनी के निदेशक राजवीर सिंह से जुड़े ठिकानों पर भी छापेमारी की गई. CID ने कथित तौर पर हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डायरी और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं.
इन डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों में अभ्यर्थियों से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण कागजात शामिल बताए जा रहे हैं. CID इन सभी की फॉरेंसिक जांच करा रही है.
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
JPSC परीक्षा विवाद में CID ने केस नंबर 16/2026 दर्ज कर जांच शुरू की थी. इसके बाद JPSC कार्यालय समेत परीक्षा से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की गई.
CID ने रांची पुलिस के सहयोग से JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते के JPSC कार्यालय स्थित कक्ष, सरकारी आवास और JPSC कार्यालय समेत अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई की.
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