Ranchi : झारखंड में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. हाल के महीनों में पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई जिलों में कार्रवाई कर ऐसे गिरोहों का खुलासा किया है, जो पैसे लेकर नकली जाति, निवास, जन्मतिथि और शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार कर रहे थे.
सूत्रों के अनुसार यह नेटवर्क राज्य के रांची, पलामू, धनबाद, बोकारो और जामताड़ा सहित कई जिलों तक फैला हुआ है. पुलिस जांच में सामने आया है कि एक प्रमाण पत्र बनाने के लिए 5 हजार से 50 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि बड़े स्तर पर नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की डील भी हो रही है.
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राज्य में फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़े सैकड़ों मामले दर्ज किए जा चुके हैं. अकेले 2023–26 के बीच विभिन्न जिलों में दर्जनों एफआईआर में यह सामने आया कि सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए फर्जी जाति और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया गया.
सबसे ज्यादा मामले अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़े पाए गए हैं, जहां आरक्षण का लाभ लेने के लिए जालसाजी की जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से न सिर्फ योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जाता है, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं.
कुछ दिन पहले पलामू और धनबाद सहित कई जिलों के प्रशासन ने अब प्रमाण पत्र सत्यापन की प्रक्रिया को सख्त करने की बात कही है.डिजिटल वेरिफिकेशन और आधार लिंकिंग जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है.हालांकि, जमीन पर अब भी बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय है, जो सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर धांधली को अंजाम दे रहा है.
सवाल यह है कि बार-बार खुलासों के बावजूद यह फर्जीवाड़ा क्यों नहीं रुक रहा? क्या सिस्टम में मौजूद खामियां ही इस सर्टिफिकेट माफिया को संरक्षण दे रही हैं, या फिर जांच और सजा की प्रक्रिया अब भी कमजोर है?
फर्जी प्रमाण पत्रो की केस स्टडी, झारखंड के किन-किन जिलों में सामने आये मामले
केस स्टडी -28 अप्रैल 2026: धनबाद में ग्रामीण डाक सेवा की बहाली प्रक्रिया के दौरान डाक विभाग में फर्जी प्रमाण पत्र के साथ पहुंचे आठ अभ्यर्थियों को पकड़ा गया है. सभी को मौके पर ही पुलिस के हवाले कर दिया गया. इनके साथ एक बिचौलिया भी मौजूद था, जिसे भी पुलिस ने हिरासत में लिया है.
केस स्टडी -30 अप्रैल 2026 रांची में फर्जी प्रमाण पत्र और दुष्कर्म साजिश मामले में कार्रवाई: रिम्स प्रबंधन ने मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन (एमएचए) की छात्रा ओली विश्वकर्मा का नामांकन रद्द कर दिया है.ओली पर डेंटल सर्जरी की एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की साजिश रचने का गंभीर आरोप है और वह फिलहाल जेल में है.
केस स्टडी -2026 धनबाद में
फर्जी मैट्रिक सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी का प्रयास पकड़ा गया. पुलिस ने एक दलाल को हिरासत में लिया.पूछताछ में नेटवर्क के संकेत मिले.शिक्षा विभाग ने जांच बैठाई.कई और दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं.
केस स्टडी -15 मार्च 2026 बोकारो में
निवास प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ. तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज. भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठे थे इसके बाद दस्तावेज सत्यापन सख्त किया गया.
केस स्टडी -22 मार्च 2026 जामताड़ा में
साइबर ठगी गिरोह का फर्जी सर्टिफिकेट कनेक्शन सामने आया.पैसों के बदले दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे.पुलिस ने छापेमारी कर सबूत जुटाने के बाद कई संदिग्धों की पहचान की थी
केस स्टडी - 2 अप्रैल 2026 हजारीबाग में
शिक्षक बहाली में फर्जी प्रमाण पत्र का मामला पकड़ा गया. मामला सामने आने के बाद जांच कमेटी की गठित हुई थी इसके बाद कई अभ्यर्थियों के कागजात संदिग्ध पाया गया था. भर्ती प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकी गई.
केस स्टडी -25 अप्रैल 2026 पलामू में आंगनबाड़ी चयन में फर्जी दस्तावेज का खुलासा. स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन होने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए.
केस स्टडी -13 नवंबर 2025 दुमका में मेडिकल कॉलेज में फर्जी ST प्रमाण पत्र के जरिए सीट लेने वाली छात्रा का एडमिशन रद्द किया गया.
केस स्टडी -19 फरवरी 2026 को झारखंड के लोगों द्वारा 15,569 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का बड़ा रैकेट उजागर, कई आरोपी गिरफ्तार, महाराष्ट्र पुलिस ने खुलासा किया.
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