Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

EXCLUSIVE : CID की जांच में सामने आये कई तथ्य, पलामू जंगल कांड में बड़े अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध

Palamu : कोरोना लॉकडाउन के दौरान पलामू के मनातू-पांकी क्षेत्र में हुई बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. झारखंड हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सीआईडी ने वर्षों से बंद पड़ी फाइल दोबारा खोल दी है. जांच तेज कर दी गयी है. लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जो पूरे वन विभाग की कार्यशैली और जांच एजेंसी की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. 

 

सूत्रों के अनुसार पांकी थाना क्षेत्र निवासी पंकज कुमार उर्फ पप्पू ने अपनी बेटी की शादी के लिए टेबल, पलंग और कुर्सी बनाने का हवाला देते हुए तत्कालीन डीएफओ कुमार आशीष से 102 पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी. इसके बाद विभाग की ओर से 102 पेड़ों की कटाई की स्वीकृति जारी कर दी गई. 

 

लेकिन आरोप है कि इस अनुमति की आड़ में करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र में फैले जंगल से सागवान, शीशम, सखुआ, साले, जामुन, कहुवा, गिजन समेत कई बहुमूल्य प्रजातियों के हजारों पेड़ काट दिए गए. सूत्रों का दावा है कि करोड़ों रुपये मूल्य की लकड़ी मनातू के रास्ते बिहार भेजी गई, जहां उसे ऊंची कीमत पर बेचा गया. 

 

बताया जा रहा है कि जिस दौरान यह अवैध कटाई हुई, उस समय बाहर से लकड़ी काटने के लिए मशीन मंगाई गयी थी. आरोप है कि स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और तस्करी की गई. मामला सामने आने के बाद तत्कालीन डीएफओ कुमार आशीष का तबादला हो गया और राहुल कुमार ने नए डीएफओ के रूप में पदभार संभाला.

 

सूत्रों के अनुसार तब तक जंगल का बड़ा हिस्सा साफ किया जा चुका था. बाद में कार्रवाई के दौरान आनंद खनन क्षेत्र से 200 से अधिक ट्रैक्टर लकड़िया जब्त की गई, जिन्हें लेस्लीगंज रेंज कार्यालय लाया गया. इसके बाद तत्कालीन रेंजर जितेंद्र कुमार हजरा, फॉरेस्टर महाराज सिंह और वनरक्षी महफूज अंसारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें निलंबित कर दिया गया. 

 

जांच के दौरान सीआईडी ने तत्कालीन डीएफओ कुमार आशीष से भी पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने बयान दिया कि उनके कार्यकाल में पेड़ नहीं काटे गए और यह सब उनके तबादले के बाद हुआ. हालांकि जांच में ऐसे तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है, जिनसे संकेत मिलता है कि पेड़ों की कटाई उनके कार्यकाल में भी हुई थी. 

 

इसके बाद सीआईडी ने तत्कालीन डीएफओ राहुल कुमार से भी पूछताछ की. उन्होंने जांच एजेंसी को बताया कि सूचना मिलने के बाद उन्होंने कई वाहनों को लकड़ी सहित जब्त कराया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर एफआईआर दर्ज कराई. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पांच किलोमीटर क्षेत्र में फैला जंगल साफ हो गया और किसी अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी? 

 

सूत्रों का कहना है कि अवैध लकड़ियों को बिहार भेजने के दौरान कम से कम तीन प्रमुख चेकपोस्ट पड़ते थे. पहला पांकी चौक के पास, दूसरा मनातू थाना क्षेत्र में और तीसरा तरहसी थाना क्षेत्र में. इसके अलावा वन विभाग की भी निगरानी व्यवस्था थी. ऐसे में करोड़ों रुपये की लकड़ी लगातार बाहर जाती रही, फिर भी किसी स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पूरे नेटवर्क की जानकारी संबंधित अधिकारियों को नहीं थी या फिर सब कुछ मिलीभगत से हो रहा था? यही सवाल अब जांच के केंद्र में है. 

 

सूत्रों का दावा है कि लकड़ियों की बिक्री चार अलग-अलग श्रेणियों में की गई थी. अकेले सागवान के एक पेड़ की कीमत करीब 40 हजार रुपये बताई जा रही है. आरोप है कि कटाई के बाद लकड़ी को मनातू में प्रोसेस कर दस्तावेज तैयार किए गए और फिर बिहार भेज दिया गया. इसके बावजूद जांच एजेंसी अब तक पूरे सप्लाई नेटवर्क और कथित आर्थिक लेनदेन का खुलासा नहीं कर सकी है. 

 

सूत्रों के अनुसार तत्कालीन डीएफओ कुमार आशीष की भूमिका को लेकर विभागीय जांच भी चल रही है और कई बिंदुओं पर उनका मामला संदिग्ध माना जा रहा है. हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही होगा. उधर, सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन दोनों डीएफओ, कुमार आशीष और राहुल कुमार से पूछताछ की जा चुकी है और आवश्यकता पड़ने पर दोबारा भी पूछताछ की जाएगी.

 

जांच एजेंसी ने बताया कि इस मामले में एक आरोपी को जेल भेजा जा चुका है, जबकि दो अन्य आरोपी हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बाहर हैं.  अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये के जंगल घोटाले का आरोप है, सैकड़ों ट्रैक्टर लकड़ी जब्त हुई, कई अधिकारी कार्रवाई के दायरे में आये.

 

मामले में  हाईकोर्ट तक को हस्तक्षेप करना पड़ा, तब भी जांच आखिर किन बिंदुओं पर अटकी हुई है? क्या पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा या फिर जांच सिर्फ निचले स्तर तक सीमित रह जाएगी? पलामू की इस बहुचर्चित अवैध पेड़ कटाई मामले में अब सबकी नजर सीआईडी की अगली कार्रवाई पर टिकी है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें  

 

 

 

 

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही