- कोई जेल से कोई बाहर से चला रहा नेटवर्क तो कोई जमीन कब्जे और रंगदारी में सक्रिय
- पुलिस बोली, जल्द होगा गिरोहों का सफाया,
- अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
झारखंड में नक्सलवाद पर पुलिस को काफी हद तक नियंत्रण हासिल हुआ है, लेकिन संगठित अपराध पर अंकुश लगाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. राज्य में छोटे-बड़े आपराधिक गिरोहों का नेटवर्क फैलने और युवाओं के इनके संपर्क में आने की जानकारी सामने आ रही है. पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 10 से अधिक आपराधिक संगठन सक्रिय हैं. इन संगठनों से बड़ी संख्या में लोगों के जुड़े होने की सूचना है. इनमें कई ऐसे युवा भी हैं, जो रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं और जल्द पैसा कमाने के लालच में अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं.
इन गिरोहों की गतिविधियां केवल रंगदारी तक सीमित नहीं बताई जा रही हैं. जमीन पर कब्जा कराने, कोयला कारोबार में हस्तक्षेप, अवैध बालू कारोबार और ठेकेदारी से जुड़े मामलों में भी इनके सदस्यों की सक्रियता की शिकायतें सामने आती रही हैं. आरोप है कि गिरोहों से जुड़े लोग रंगदारी नहीं मिलने पर कारोबारियों को धमकी देते हैं और कई मामलों में गोलीबारी तक की घटनाएं होती हैं. पलामू प्रमंडल में जमीन पर कब्जा करने और जमीन से जुड़े विवादों में धमकी देने की शिकायतें लगातार सामने आने की बात कही जा रही है.
बेरोजगारी का फायदा उठा रहे आपराधिक गिरोह
राज्य में युवाओं के अपराध की दुनिया में प्रवेश करने के पीछे बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जल्द पैसा कमाने की चाह को प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है. नौकरी की तैयारी करने वाले कई युवा लंबे समय तक सफलता नहीं मिलने के कारण निराश हो जाते हैं. ऐसे में आपराधिक गिरोह उनकी आर्थिक मजबूरियों और महत्वाकांक्षाओं का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं.
आरोप है कि कुछ गिरोह नए युवकों को प्रतिदिन पांच से दस हजार रुपये तक देने का लालच देकर अपने साथ जोड़ते हैं. शुरुआत में युवकों से छोटे-मोटे काम कराए जाते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर लिया जाता है. कई युवा इन गतिविधियों के कारण जेल पहुंच जाते हैं, जबकि कुछ आपराधिक घटनाओं में मारे भी जाते हैं. इससे उनका भविष्य तबाह होने के साथ परिवार भी प्रभावित होता है.
कुछ गिरोह सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर युवाओं तक पहुंच बना रहे हैं. फेसबुक पेज और अन्य माध्यमों से गिरोहों के संपर्क में आने वाले युवकों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. सवाल यह है कि रोजगार की तलाश कर रहे पढ़े-लिखे युवा किस परिस्थिति में अपराधियों के साथ जुड़ रहे हैं और उन्हें इस रास्ते पर जाने से रोकने के लिए सरकार तथा पुलिस क्या कदम उठा रही है.
जेल से गिरोह संचालन और संरक्षण के आरोप
राज्य में कुछ आपराधिक गिरोहों के जेल से संचालित होने के आरोप भी लगते रहे हैं. वहीं, कुछ अपराधियों पर समाजसेवी की छवि बनाकर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने की शिकायतें सामने आती हैं. पुलिस और प्रशासन के स्तर पर अपराधियों को संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं. इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है.
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के दौरान भी पुलिस पर टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे छोटे उग्रवादी संगठनों को कथित तौर पर सहयोग देने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच और आधिकारिक साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है. संगठित अपराध के मामले में भी पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों को आपराधिक नेटवर्क, आर्थिक स्रोतों तथा उनके सहयोगियों की पहचान कर कार्रवाई करने की जरूरत है.
आठ प्रमुख गिरोहों का जिलेवार नेटवर्क
झारखंड में सक्रिय आपराधिक संगठनों के संबंध में उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, राहुल सिंह, प्रिंस खान, राहुल दुबे, विकास पांडे, अखिलेश सिंह, डब्लू सिंह और लवकुश शर्मा गिरोह की गतिविधियां अलग-अलग जिलों में होने की सूचना मिलती रही है. इन गिरोहों से जुड़े सदस्यों की संख्या, नए युवकों की भर्ती और दर्ज आपराधिक मामलों के आंकड़े अलग-अलग हैं.
लातेहार : राहुल सिंह गिरोह
राहुल सिंह का गिरोह झारखंड के तेजी से सक्रिय हो रहे आपराधिक संगठनों में शामिल बताया जाता है. पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस संगठन में 148 से अधिक सदस्य जुड़े होने की सूचना है. हाल के दिनों में फेसबुक पेज के माध्यम से कई बेरोजगार युवकों के भी गिरोह के संपर्क में आने की जानकारी मिली है.
गिरोह का कार्यक्षेत्र झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ बताया जाता है. पलामू, गढ़वा, रांची, लातेहार, लोहरदगा और चतरा समेत कई इलाकों में इसके सदस्यों की सक्रियता की सूचना है. इन क्षेत्रों में गिरोह के सदस्यों पर विभिन्न आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के आरोप हैं.
धनबाद : प्रिंस खान गिरोह
प्रिंस खान झारखंड के कुख्यात आपराधिक गिरोहों में से एक का संचालन करता है. इस गिरोह में 150 से अधिक सदस्य जुड़े होने की सूचना है. हाल के दिनों में 10 नए युवकों के भी गिरोह से जुड़ने की जानकारी सामने आई है.
प्रिंस खान गिरोह का नेटवर्क धनबाद से शुरू होकर रांची, रामगढ़, चतरा, पलामू, हजारीबाग, जमशेदपुर और बोकारो समेत कई इलाकों तक फैला हुआ बताया जाता है. इन क्षेत्रों में गिरोह के सदस्यों पर कई आपराधिक घटनाओं में शामिल होने के आरोप हैं. प्रिंस खान के भारत से फरार होकर पाकिस्तान में छिपे होने की जानकारी भी सामने आती रही है.
रामगढ़ : राहुल दुबे गिरोह
अमन साहू की मौत के बाद उसके संगठन के दो अलग-अलग गुटों में बंटने की जानकारी सामने आई. इनमें एक गुट राहुल सिंह और दूसरा राहुल दुबे गिरोह के रूप में सक्रिय बताया जाता है.
राहुल दुबे गिरोह में 80 से अधिक सदस्य काम कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में पांच से अधिक नए युवक भी इस संगठन से जुड़े हैं. गिरोह के सदस्यों पर रांची में जमीन पर कब्जा कराने, जमीन से जुड़े विवादों में हस्तक्षेप करने और कोयला कारोबारियों से रंगदारी मांगने के आरोप हैं. रंगदारी नहीं देने पर धमकी देने और गोलीबारी करने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं. गिरोह ने रांची, रामगढ़, हजारीबाग और चतरा में अपनी सक्रियता बढ़ाई है.
रामगढ़ : विकास पांडे गिरोह
विकास पांडे गिरोह में 70 से अधिक सदस्य सक्रिय होने की सूचना है. हाल के दिनों में पांच से 10 नए युवकों के भी इस गिरोह से जुड़ने की जानकारी मिली है. इस गिरोह की सबसे अधिक सक्रियता रामगढ़ क्षेत्र में बताई जाती है. गिरोह से जुड़े सदस्यों पर कोयला कारोबार और जमीन से संबंधित मामलों में सक्रिय रहने के आरोप हैं.
जमशेदपुर : अखिलेश सिंह गिरोह
जमशेदपुर के कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह गिरोह में 50 से अधिक सदस्य सक्रिय होने की सूचना है. हाल के दिनों में इस गिरोह से 10 नए सदस्यों के जुड़ने की जानकारी भी सामने आई है. अखिलेश सिंह फिलहाल जेल में बंद है. आरोप है कि जेल में रहने के बावजूद उसके गिरोह का संचालन किया जा रहा है.
जमशेदपुर में हाल के दिनों में हुई कई हत्याओं के मामलों में भी अखिलेश सिंह का नाम सामने आने की बात कही जा रही है. जमीन कारोबार और अन्य बड़े व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोगों से रंगदारी मांगने तथा रकम नहीं देने पर मोबाइल फोन के माध्यम से धमकी देने के आरोप भी लगते रहे हैं.
अखिलेश सिंह के खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी और पुलिस पर फायरिंग समेत कुल 56 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी. इनमें से 32 मामलों में उसे जमानत मिल चुकी थी, जबकि शेष 24 मामलों की सुनवाई अदालत में चल रही थी. उस पर जमशेदपुर के जेलर की हत्या, कोर्ट परिसर में ट्रांसपोर्टर उपेंद्र सिंह की हत्या और जज आरपी रवि पर फायरिंग जैसे गंभीर आरोप भी रहे हैं.
पलामू : डब्लू सिंह गिरोह
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पलामू प्रमंडल में डब्लू सिंह का नाम प्रमुख अपराधियों में लिया जाता रहा है. जेल जाने के बाद भी उसका नाम आपराधिक गतिविधियों से जुड़ता रहा है. पलामू में जमीन पर कब्जा करने से संबंधित शिकायतें मिलने के बाद उसके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की गई थी. राजू तिर्की नाम के एक सदस्य का नाम भी उसके साथ जुड़ा रहा है. डब्लू सिंह ने आत्मसमर्पण के बाद राजनीति में आने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो सका.
फिलहाल डब्लू सिंह गिरोह में 80 से अधिक सदस्य जुड़े होने की सूचना है. नए युवकों के गिरोह से जुड़ने की संख्या भी अधिक बताई जा रही है. गिरोह के सदस्यों पर जमीन पर कब्जा करने, कोयला और बालू कारोबार तथा ठेकेदारी से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप हैं. पुलिस मुख्यालय की ओर से गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
डब्लू सिंह के खिलाफ पलामू, लातेहार और रांची के विभिन्न थानों में रंगदारी, धमकी और अन्य गंभीर आरोपों से संबंधित कुल 37 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी है.
रांची : लवकुश शर्मा गिरोह
लवकुश शर्मा रांची के कुख्यात अपराधियों में शामिल है. उसके खिलाफ रंगदारी, गोलीबारी और हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. उसके गिरोह में 35 से अधिक सदस्य सक्रिय होने की सूचना है. हाल के दिनों में इस गिरोह में किसी नए सदस्य के जुड़ने की जानकारी सामने नहीं आई है.
क्या कहते हैं झारखंड के वरिष्ठ अधिवक्ता सह पीआईएल विशेषज्ञ राजीव कुमार

झारखंड के वरिष्ठ अधिवक्ता सह पीआईएल विशेषज्ञ राजीव कुमार का कहना है कि राज्य में युवाओं के बीच बढ़ती आपराधिक गतिविधियों के पीछे बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों की भी पड़ताल जरूरी है. राज्य गठन के बाद से जेपीएससी और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और भर्ती में देरी जैसी घटनाओं से युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है. लंबे समय तक रोजगार नहीं मिलने से पैदा हुई निराशा का फायदा आपराधिक गिरोह उठा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी है. झारखंड में आदिवासियों और गरीबों की जमीन पर कब्जा, कोयला चोरी तथा बालू-पत्थर जैसे प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर भी सरकार को सख्ती से नियंत्रण करना चाहिए.
राजीव कुमार ने कहा कि ऐसे मामलों में अपराधियों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों की लापरवाही या अपराधियों को मिलने वाला संरक्षण भी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है. सरकार, प्रशासन और पुलिस को अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि झारखंड को सुरक्षित बनाया जा सके.
उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर बढ़ाने चाहिए. बेरोजगारी की समस्या का समाधान नहीं होने पर अपराध की घटनाएं बढ़ने का खतरा बना रहेगा. कई कम उम्र के लड़के भी आपराधिक मामलों में फंस जाते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है. इसलिए अपराधियों पर सख्ती के साथ युवाओं को रोजगार, बेहतर अवसर और सही दिशा देना भी जरूरी है.
क्या कहते हैं लातेहार के वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील कुमार

लातेहार व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील कुमार ने कहा कि आज कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें कम उम्र के युवक और बेरोजगार युवा जाने-अनजाने अपराध की ओर बढ़ रहे हैं. आसानी से पैसा कमाने के चक्कर में कई युवक अपराध का रास्ता चुन रहे हैं.
उन्होंने कहा कि लातेहार जिले में कई कोयला परियोजनाएं चल रही हैं. इन परियोजनाओं में लेवी की मांग को लेकर आए दिन फायरिंग की घटनाएं होती हैं. हाल के दिनों में कई आपराधिक गिरोह सक्रिय हुए हैं, जिनकी ऐसी घटनाओं में कम उम्र के युवक शामिल रहते हैं. इसके अलावा ब्राउन शुगर और अफीम की तस्करी में भी ऐसे युवकों के नाम सामने आते हैं.सुनील कुमार ने कहा कि नौकरी के अवसर नहीं मिलने के कारण कई युवक भटककर अपराध की राह चुन लेते हैं.
क्या कहते हैं हजारीबाग के समाजसेवी सह आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज कुमार गुप्ता

हजारीबाग के समाजसेवी सह आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि झारखंड में बेरोजगारी के कारण कई युवा जल्द पैसा कमाने के लालच में अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं. कुछ युवा छोटे अपराधों से शुरुआत करते हैं और धीरे-धीरे गंभीर अपराधों में शामिल हो जाते हैं. कई युवा जेल तक पहुंच रहे हैं, जिससे उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है.
उन्होंने कहा कि सरकार को इस गंभीर समस्या पर ध्यान देते हुए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें गलत संगति से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि युवाओं को अपराध की राह पर जाने से रोका जा सके.
क्या कहते हैं जामताड़ा सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मुकेश सिंह

जामताड़ा सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मुकेश सिंह का कहना है कि झारखंड में रोजगार के अभाव के कारण कई युवा भटकाव का शिकार हो रहे हैं. जल्द और अधिक पैसा कमाने की चाहत में कुछ युवा अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं. केंद्र में पेपर लीक के मामले हों या राज्य में रोजगार के सीमित अवसर, इनका असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि रोजगार नहीं मिलने के कारण युवा पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग उन्हें पैसे का लालच देकर अपराध में धकेल रहे हैं. सरकार को युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए. युवाओं को उनकी शिक्षा के अनुरूप रोजगार मिले, तो उन्हें अपराध की राह पर जाने से रोकने में मदद मिल सकती है.
क्या कहते हैं गुमला के अधिवक्ता जगत राम भगत

गुमला के अधिवक्ता जगत राम भगत का कहना है कि युवाओं का अपराध की दुनिया की ओर बढ़ता रुझान समाज और व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है. बेरोजगारी, रोजगार के अवसरों की कमी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता और कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह युवाओं को गलत रास्ते पर धकेल रही है.
उन्होंने कहा कि आपराधिक गिरोह युवाओं की आर्थिक मजबूरियों और महत्वाकांक्षाओं का फायदा उठाकर उन्हें अपराध में शामिल कर रहे हैं. इस पर रोक लगाने के लिए सरकार को रोजगार के अवसर बढ़ाने, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत है. अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को भी युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए.
जगत राम भगत के अनुसार, रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने पर युवाओं में भटकाव बढ़ सकता है. इसलिए उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस पहल जरूरी है.
क्या कहते हैं बोकारो के अधिवक्ता रंजीत गिरी

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जल्द पैसा कमाने के लालच में गलत रास्ता न चुनें. सरकार को रोजगार के अवसर बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनाने की जरूरत है. युवाओं को अपनी मेहनत और कौशल पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अपराध का रास्ता उनका भविष्य बर्बाद कर सकता है.
क्या कहते हैं धनबाद के अधिवक्ता एमडी जावेद

धनबाद के अधिवक्ता एमडी जावेद का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार को युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए. रोजगार और बेहतर भविष्य की मांग को लेकर युवा जंतर-मंतर के साथ झारखंड में भी प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार और विकास जैसे जरूरी मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय धार्मिक मुद्दों में उलझाना उचित नहीं है. जावेद के अनुसार, कुछ युवा बड़े राजनेताओं और अपराधियों के साथ तस्वीर खिंचवाकर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं. ऐसी सोच युवाओं को गलत दिशा में ले जा सकती है.
उन्होंने कहा कि सरकार को रोजगार के अवसर बढ़ाने, युवाओं की समस्याओं का समाधान करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.
क्या कहते हैं सिमडेगा के सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश श्रीवास्तव

उन्होंने कहा कि सरकार को रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ कौशल विकास और स्वरोजगार पर ध्यान देना चाहिए. स्कूल-कॉलेजों में युवाओं को नैतिक शिक्षा और कानूनी जागरूकता से जोड़ना जरूरी है. अभिभावकों और समाज के जिम्मेदार लोगों को भी युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए.
मुकेश श्रीवास्तव के अनुसार, केवल पुलिस की कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है. युवाओं को अपराध से दूर रखने के लिए सरकार, समाज और परिवार को मिलकर प्रयास करना होगा, ताकि उनकी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लग सके.
सांसद प्रतिनिधि धनंजय कुमार पुटूस ने क्या कहा-
रामगढ़ के सांसद प्रतिनिधि धनंजय कुमार ने कहा कि आज युवाओं का अपराध की ओर बढ़ता कदम समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है. मुझे लगता है इसके पीछे बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और कई बार उनके साथ हुआ कोई अन्याय भी बड़ी वजह है.

धनंजय कुमार
जब युवाओं को उचित अवसर, सम्मान और न्याय नहीं मिलता, तो कुछ युवा भटककर गलत रास्ता चुन लेते हैं. अपराध रोकने के लिए केवल सजा नहीं, बल्कि रोजगार, न्याय और सही मार्गदर्शन के अवसर भी देने होंगे.
6 महीने में 700 से अधिक हत्याएं
इन मामलों में पलामू प्रमंडल में जमीन पर कब्जे और धमकी से जुड़ी शिकायतों को लेकर विशेष चिंता जताई जा रही है. आरोप है कि कई मामलों में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है. हालांकि, हत्या और रंगदारी से जुड़े इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है. पुलिस मुख्यालय के प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर ही राज्य में अपराध की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकता है.
पुलिस मुख्यालय की निगरानी में कार्रवाई की तैयारी : आईजी अभियान

आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह ने बताया कि पूरे मामले की पुलिस मुख्यालय स्तर पर निगरानी की जा रही है और जल्द ही बड़ी कार्रवाई की तैयारी है. उन्होंने कहा कि कई अपराधी जेल में बंद हैं और कुछ के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई भी की गई है. इसके बावजूद यदि वे आपराधिक गतिविधियों से बाज नहीं आते हैं, तो झारखंड पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी. नरेंद्र सिंह ने अपराधियों से गलत रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने की अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी.
झारखंड में अपराधियों के खिलाफ मुठभेड़ की घटनाएं भी हुई हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमन साहू पलामू में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था. वहीं, जामताड़ा में सुजीत सिन्हा के मारे जाने का भी उल्लेख किया गया है. इसके अलावा पुलिस के ऑपरेशन लंगड़ा के तहत 10 से अधिक अपराधियों के साथ मुठभेड़ होने और उनके पैरों में गोली लगने की जानकारी है.
राज्य में संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ गिरोहों के आर्थिक नेटवर्क, जेल से कथित संचालन, नए सदस्यों की भर्ती की जांच होने जरूरत है, ताकि उन्हें अपराध की दुनिया में जाने से रोका जा सके.
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