Ranchi: रांची नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है. इसमें जोनल सुपरवाईजर सहित निगम के कर्मचारी शामिल हैं. घोटाले के सूबत के तौर पर 21 हजार मासिक पर काम करने वाले सुपरवाइजरों के आलीशान मकान और महंगी गाड़ियों को बतौर सूबत पेश किया जाता है. निगम में जारी इस घोटाले की भनक अधिकारियों को भी है. लेकिन इसकी चर्चा दबी जुबान से होती रहती है.
रांची नगर निगम क्षेत्र के 53 वार्डों की सफाई व्यवस्था पर नगर निगम का औसत मासित खर्च तीन करोड़ रुपये हैं. इसमें सफाई और उसपर नजर रखने वाले कर्मचारियों को दी जाने वाली मजदूरी सहित अन्य चीजें शामिल है. निगम में सफाई के लिए कुल 2100 सफाई मजदूर कार्यरत हैं. इसमें से VIP इलाके की सफाई के लिए 300 मजदूर काम करते हैं. इन मजदूरों से काम लेने की जिम्मेवारी संबंधित VIP क्षेत्र के सुपरवाइजरों की है.
निगम क्षेत्र के सभी वार्डों की सफाई व्यवस्था पर नजर रखने और अतिरिक्त सफाई की व्यवस्था की जिम्मेवारी जोनल सुपरवाइजरों की है. इसके लिए निगम में चार जोनल सुपरवाइजर हैं. इन सुपरवाइजरों को अपने काम के लिए मजदूर, ट्रैक्टर, एंटी स्मॉग गन (Anti Smog Gun), Grass Cutter आदि दिये गये हैं. सुपरवाइजरों द्वारा इन्हीं मशीनों और मजदूरों के सहारे इस घोटाले को अंजाम दिया गया है.
निगम क्षेत्र में कार्यरत जोनल सुपरवाइजरों के अधीन औसतन 100-100 मजदूर कार्यरत हैं. सुपरवाइजरों को 1-1 JCB, 1-1 Anti Smog Gun, 4-4 ट्रैक्टर, और 2-2 Grass Cutter दिये गये हैं. JCB को प्रतिदिन 30 लीटर, ट्रैक्टर के तीन लीटर प्रति ट्रिप (अधिकतम 12 लीटर), Grass Cutter को प्रति दिन पांच लीटर और Anti Smog Gun को 40 लीटर की दर से तेल मिलता है. सुपरवाइजरों के अधीन कार्यरत सफाई मजदूरों को प्रति मजदूर प्रति माह 12000 रुपये की दर से भुगतान किया जाता है.
जोनल सुपरवाइजरों के अधीन कार्यरत कुल मजदूरों के नाम पर औसतन 8-10 लाख रुपये प्रति माह मजदूरी का भुगतान किया जाता है. बताया जाता है कि इसमें से अधिकांश मजदूर कागजी होते हैं. यानी वे काम पर नहीं आते हैं, लेकिन उनके नाम पर मजदूरी का भुगतान किया जाता है.
इस तरह किये गये भुगतान के एक हिस्सा मजदूर और एक हिस्सा जोनल सुपरवाइजर सहित निगम के अन्य कर्मचारियों को मिलता है. इसी तरह सुपरवाइजरों के सफाई आदि के लिए दिये गये मशीन-उपकरण का इस्तेमाल भी कम होता है. लेकिन कागजों में उन्हें नियमित रुप से सफाई के काम में लगा हुआ दिखाया जाता है. इन कागजी मजदूरों और मशीनों के इस्तेमाल से सुपरवाइजरों को प्रति माह लाखों की अतिरिक्त आमदनी होती है.
जोनल सुपरवाइजरों की इस अवैध कमाई के सूबत के तौर पर उन्हें मिलने वाले मानदेय के मुकाबले उनके आलीशान मकान और सुख सुविधाओं को बतौर पेश किया जाता है. जोनल सुपरवाइजर को प्रति माह 21000 रुपये मानदेय मिलता है.
अनिल नाम के एक जोनल सुपरवाइजर का तीन मंजिला आलीशान मकान है. मकान के बाहर भी कीमती सजावटी पत्थर लगे हैं. बेटा मुंबई में पढ़ता है. फुलेश्वर प्रमाणिक नाम के जोनल सुपरवाइजर के पास कार है. वह ड्राइवर भी रखता है. शंकर चौबे नाम के जोनल सुपरवाइजर का भी कुसुम विहार में तीन मंजिला मकान है. बताया जाता है कि वह बोड़ेया में एक दूसरा मकान भी बनवा रहा है.
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