Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

वक्त रहते आंखों को बचाया जा सकता है : डॉ उमेश कुमार

Advertisement
Advertisement
Hazaribagh: कोलकाता के रेटिना सर्जन डॉ वरुण गर्ग ने कोडरमा के एक युवक की खोयी आंखों की नूर ऑपरेशन कर लौटा दी. अब वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण आई हॉस्पिटल बहेरा आश्रम की बदौलत फिर से पहले की भांति दुनिया देख सकता है. हजारीबाग से करीब 45 किलोमीटर दूर जीटी रोड स्थित चौपारण के लोकनायक जयप्रकाश नारायण आई हॉस्पिटल बहेरा आश्रम ने महज चार दिनों में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की. बता दें कि इससे पहले नवभारत जागृति केंद्र से संचालित इस आई हॉस्पिटल में डॉ आलोक कुमार ने इम्प्लांटेबल कॉलेमर लेंस का प्रत्यारोपण कर बरही निवासी भारी मशीन के ऑपरेटर मनोज कुमार यादव की आंखों की रोशनी लौटी थी. दूसरे केस में कोडरमा स्थित डोमचांच के 18 वर्षीय युवक आशीष सिंह की आंखों की रोशनी चोट लगने के कारण चली गई थी. उसे उस आंख से कुछ भी दिखाई नहीं देता था. उसने अस्पताल के प्रबंधक संतोष कुमार को पूरी जानकारी दी. उन्होंने उसे वरीय सर्जन डॉ उमेश कुमार के पास भेजा. पूरी जांच करने के बाद उन्होंने युवक को रेटिना सर्जन से दिखाने की सलाह दी. फिर कोलकाता के रेटिना सर्जन डॉ वरुण गर्ग ने युवक की आंखों का ऑपरेशन किया. डॉ गर्ग लोकनायक जयप्रकाश नारायण आई हॉस्पिटल में हर शुक्रवार को अपनी सेवा देते हैं. उन्होंने आशीष की आखों की पूरी जांच की और आयुष्मान योजन के तहत ऑपरेशन किया, जो सफल रहा. इसे भी पढ़ें– मोकामा">https://lagatar.in/former-mokama-mla-anant-singhs-health-deteriorated-admitted-to-icu-of-pmch-in-patna/">मोकामा

के पूर्व विधायक अनंत सिंह की बिगड़ी तबीयत, पटना के PMCH के ICU में कराया गया भर्ती
डॉ उमेश कुमार कहते हैं कि वक्त रहते आंखों को बचाया जा सकता है. सही समय पर डॉक्टर के पास मरीज आएं, तो कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है. डॉ बरुन गर्ग कहते हैं कि रेटिना का इलाज संभव है. वक्त पर इलाज हो, तो उनकी पुरानी दृष्टि भी वापस आ सकती है. वहीं इस सफल ऑपरेशन में डॉ वरुण के साथ रेटिना यूनिट इंचार्ज अन्नपूर्णा देवी, सहायक रुक्मणी कुमारी, राजकुमार सिंह, संतोष राम, अशोक यादव व अभिनव कुमार का सराहनीय योगदान रहा. वहीं चिकित्सकों का कहना है कि रेटिना सर्जरी एक लम्बी, जटिल और अति संवेदनशील सर्जरी प्रक्रिया है. इसमें आंखों की सबसे भीतरी परत पर सर्जन और उनकी टीम काम करती है. साथ ही रेटिना में हुए छिद्र या दरार को भरने का काम करती है. मरीज आशीष सिंह कहते हैं कि आंख ठीक हो जाने से उन्हें जीवन में नई ऊर्जा मिल गई है. उन्होंने डॉक्टर उमेश और डॉ गर्ग के साथ पूरी टीम के प्रति आभार जताया. इसे भी पढ़ें– पुरानी">https://lagatar.in/on-the-implementation-of-the-old-pension-scheme-the-workers-reacted-saying-hemant-hai-to-dare/">पुरानी

पेंशन योजना लागू होने पर कर्मियों ने दी प्रत‍िक्रिया, कहा- ‘हेमंत है तो हिम्मत है’
[wpse_comments_template]
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही